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DPS की बस में स्पीड गवर्नर कंपनी का ऑफिस और वर्कशॉप सील, सर्टिफिकेट जब्त

गैस प्राइवेट लिमिटेड के संचालक नीरज अग्निहोत्री का ऑफिस और वर्कशॉप सोमवार को पुलिस ने सील कर दिए।

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2018, 07:25 AM IST
Office of the speed governor company and workshop seal

इंदौर. डीपीएस की हादसे वाली बस में स्पीड गवर्नर लगाने वाली कंपनी के डीलर सुविधा ऑटो गैस प्राइवेट लिमिटेड के संचालक नीरज अग्निहोत्री का ऑफिस और वर्कशॉप सोमवार को पुलिस ने सील कर दिए। आरोपी डीपीएस की बस के अलावा आईपीएस और एक मेडिकल इंस्टिट्यूट की बसों में भी ये डिवाइस इंस्टॉल कर चुका था। टीआई राजेंद्र सोनी ने बताया नीरज को दोपहर में तीन इमली क्षेत्र स्थित उसकी वर्कशॉप पर लेकर पहुंचे। डीपीएस की जिस बस का एक्सीडेंट हुआ, उसमें नीरज ने ही स्पीड गवर्नर इंस्टॉल किया था। आरोपी के ऑफिस में कम्प्यूटर से डाटा निकाला तो पता चला कि वह डीपीएस की हादसे वाली बस के अलावा बस व अन्य गाड़ियों में रोज मार्टा कंपनी के नाम से 24 डिवाइस इंस्टॉल कर सर्टिफिकेट जारी कर चुका था।

बाल कल्याण आयोग के अध्यक्ष बोले कई बसों के स्पीड गवर्नर में छेड़छाड़
- डीपीएस बस हादसे में पड़ताल के लिए राज्य बाल कल्याण आयोग के अध्यक्ष राघवेंद्र शर्मा सोमवार को इंदौर आए। उन्होंने डीपीएस पहुंचकर बसों को देखा तो दंग रह गए। कई बसाें में स्पीड गवर्नर से छेड़छाड़ की गई थी।

- यानी, स्पीड गवर्नर ब्रेक किए गए थे। यह भी पता चला कि जो बसें बाहर से अच्छी दिख रही हैं, उनमें भी कुछ खटारा हैं जिन्हें कलर कर चमकाया गया था। बसों के मेंटेनेंस के लिए कोई सिस्टम नहीं था। शर्मा ने इस बात पर स्कूल प्रबंधन काे फटकार लगाई।

फिटनेस के लिए स्कूल प्रबंधन ने लगाए थे फर्जी सर्टिफिकेट

- डीपीएस की जि बस (एमपी 09 एफए 2029) का हादसा हुआ उसे आरटीओ से स्पीड गवर्नर के फर्जी रिन्युअल लेटर के आधार पर ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी हुआ था। फिटनेस शाखा के प्रभारी परिवहन निरीक्षक रवींद्र ठाकुर ने बिना दस्तावेजों और वाहन की जांच के ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी कर दिया। जबकि मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक फिटनेस जांच तकनीकी रूप से विशेषज्ञ परिवहन उप निरीक्षक या निरीक्षक स्तर के अधिकारी को करना होती है।

लेटर में कंपनी का नाम भी अलग-अलग बताया

- परिवहन विभाग के अधिकारियों की जांच में भी यह बात सामने आई है कि स्कूल प्रबंधन ने स्पीड गवर्नर के रिन्युअल का जो लेटर लगाया था वह फर्जी है। लेटर में ही ऊपर और नीचे कंपनी का नाम अलग-अलग लिखा है। परिवहन उपायुक्त संजय सोनी ने बताया कि जांच में जो दोषी पाया जाएगा उस पर कार्रवाई होगी।

कंपनी का दावा हमारे सर्टिफिकेट में होता है बार कोड
- रिन्युअल लेटर में कंपनी का नाम रोजमार्टा टेक्नोलॉजीस लिमिटेड लिखा है। कंपनी के इंदौर में डीलर विशाल जैन ने भास्कर को बताया कि उनकी कंपनी मप्र में रोजमार्टा ऑटो टेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से स्पीड गवर्नर लगाने का काम करती है।

- वहीं कंपनी द्वारा जो सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं उनमें शासन के नियमानुसार ही बार कोड भी होता है, लेकिन उक्त सर्टिफिकेट में ऐसा कोई कोड भी नहीं है। इस दावे के बाद इस बात की आशंका को बल मिला है कि कहीं कंपनी के फर्जी नाम से तो स्पीड गवर्नर लगाने का गोरखधंधा फल-फूल नहीं रहा है। अफसर इस बिंदु पर भी जांच करेंगे।

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