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65 साल की महिला का हुआ ब्रेन डेड, लिवर और किडनियां मरीजों को ट्रांसप्लांट की

शहर में 26 माह में 29वीं बार अंगदान के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

Dainik Bhaskar

Dec 31, 2017, 05:37 AM IST
old womans brain dead, liver and kidney transplant patients

इंदौर . शहर में लगातार दूसरे दिन ग्रीन कॉरिडोर बना। एक नहीं, तीन बार। शनिवार को एमवाय अस्पताल में ब्रेन डेड 65 वर्षीय महिला का लिवर और दो किडनियां निकालकर (ऑर्गन रिट्राइवल) तीन निजी अस्पतालों में भेजी गईं, जिन्हें जरूरतमंदों को ट्रांसप्लांट किया गया। प्रदेश में यह पहला मौका है, जब किसी सरकारी अस्पताल में ऑर्गन रिट्राइवल किया गया। चूंकि एमवाय में ऑर्गन रिट्राइवल के लिए कुछ संसाधन नहीं हैं, इसलिए निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने अपने उपकरणों से वहां पहुंचकर यह काम किया। वहीं, शहर में 26 माह में 29वीं बार अंगदान के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

- बालदा कॉलोनी निवासी शारदा देवी पति मोतीलाल मौर्य शुक्रवार को सड़क हादसे में घायल हो गई थीं। परिजन उन्हें निजी अस्पताल ले गए, जहां रात में ही परिजन को उनकी ब्रेन डेड स्थिति की जानकारी दी। अंगदान के लिए महिला के भाई कमल ने रात 10.30 बजे कलेक्टर निशांत वरवड़े को कॉल कर इसकी व्यवस्था करवाने की बात कही। इस पर कलेक्टर ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों को कॉल कर इसकी सूचना दी। इसके बाद आॅर्गन रिट्राइवल के लिए महिला को एमवाय शिफ्ट किया गया।

भीड़ देख भाई रुके, पता चला एक्सीडेंट बहन का ही हुआ
- शारदा देवी शनिवार को कुछ महिलाओं के साथ वृंदावन जाने वाली थीं। इससे पहले वे शुक्रवार दोपहर राजाबाग कॉलोनी में अपनी मां से मिलने गई थीं। वहां से घर लौटते समय लाल बाग पुल के सामने वहां से गुजर रही कार के साइड ग्लास से टकराकर गिर गईं।

- पत्थर से सिर में चोट लगी। उसी समय उनके भाई कमल जहाज पुलिया वहीं से गुजर रहे थे। भीड़ देखकर वे रुके तो पता लगा कि उनकी बहन का ही एक्सीडेंट हुआ। इस पर वे उन्हें यूनिक हॉस्पिटल ले गए थे। कमल, महिला के दोनों बेटे कमलेश और चंद्रशेखर मौर्य ने बताया कि वे अंगदान को लेकर सजग थीं। इसलिए हमने उनके अंगदान का फैसला लिया।
- महिला के परिजनों द्वारा अंगदान की इच्छा जताने पर इंदौर आॅर्गन डोनेशन सोसायटी के सचिव डॉ. संजय दीक्षित, एमवाय अधीक्षक डॉ. वीएस पाल व मुस्कान ग्रुप के जीतू बगानी वहां पहुंचे। परिजनों ने अंगदान के लिए सहमति दी तो डॉ. एडी भटनागर, डॉ. जफर शेख, डॉ. अमित अग्रवाल और डॉ. आरसी रायकवार की टीम ने दो बार ब्रेन डेथ सर्टिफिकेशन प्रक्रिया की।

- शाम करीब 5.30 बजे रिट्राइवल प्रक्रिया शुरू हुई। चोइथराम अस्पताल से डॉ. रतन सहजपाल और डॉ. अमित जोशी टीम के साथ रिट्राइवल के लिए जरूरी उपकरणों के साथ पहुंचे। डॉ. अमित भट्ट ने बताया कि मुंबई से भी हमारे सर्जन शाम को अस्पताल पहुंचे।

- ग्रेटर कैलाश हॉस्पिटल से डॉ. अनिल बंडी और बाॅम्बे हॉस्पिटल से डॉ. प्रीतेश श्रीमानी व डॉ. राजेश भराणी टीम के लिए साथ पहुंचे। महिला का लिवर चोइथराम अस्पताल में 57 साल के व्यक्ति और एक किडनी ग्रेटर कैलाश में 34 वर्षीय युवक और दूसरी किडनी बॉम्बे हॉस्पिटल में 62 वर्षीय महिला को ट्रांसप्लांट की गई।

तीन जगह रोका ट्रैफिक

- ग्रीन कॉरिडोर के लिए एमवायएच के सामने वाले चौराहे, चोइथराम अस्पताल के लिए सब्जी मंडी चौराहे पर और पलासिया से ग्रेटर कैलाश अस्पताल जाने के लिए आनंद बाजार के ट्रैफिक को रोका गया।

क्यों नहीं होता था प्रत्यारोपण; मंजूरी के बावजूद नहीं थे संसाधन
- एमवाय अस्पताल को दो साल पहले ही ऑर्गन रिट्राइवल की मंजूरी दे दी गई थी, लेकिन यहां संसाधन व व्यवस्थाएं कम होने के कारण एक भी बार रिट्राइवल नहीं किया गया। समय-समय पर इसे शुरू करने की कोशिश भी की गई, लेकिन बात नहीं बनी। इस बार भी निजी अस्पतालों से उपकरण यहां लाए गए। तब जाकर महिला का लिवर और दोनों किडनियां निकाली गईं।

आगे क्या उम्मीद; जल्द ही यहां एक ऑपरेशन थियेटर बन जाएगा
- अब उम्मीद बंधी है कि जल्द ही यह अस्पताल खुद को प्रत्यारोपण के लिए तैयार कर लेगा। इंदौर आॅर्गन डोनेशन सोसायटी के सचिव डॉ. संजय दीक्षित ने बताया कि प्रत्यारोपण के लिए एक ओटी बनवाया जा रहा है। सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू हाेते ही हम प्रत्यारोपण करने की भी स्थिति में रहेंगे। आंकड़ों के अनुसार आईसीयू में कोमा वाले मरीजों में पांच से आठ प्रतिशत ब्रेन डेड रहते हैं।

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