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यहां ड्रम पर बैठ नदी पार करने को मजबूर स्कूली बच्चे, कभी भी हो सकता है हादसा

50 बच्चे स्कूल पहुंचने के पहले रोज 150 फीट चौड़ी और 20 फीट गहरी नदी से निकलने के लिए ड्रम का सहारा लेते हैं।

बहादुरसिंह चौहान | Last Modified - Dec 27, 2017, 04:38 AM IST

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    50 बच्चे स्कूल पहुंचने के पहले रोज 150 फीट चौड़ी और 20 फीट गहरी नदी से निकलने के लिए ड्रम का सहारा लेते हैं।

    शाजापुर (इंदौर).50 बच्चे स्कूल पहुंचने के पहले रोज 150 फीट चौड़ी और 20 फीट गहरी नदी से निकलने के लिए ड्रम का सहारा लेते हैं। बैलेंस बिगड़ते ही स्कूल बैग के साथ सीधे गहरे पानी में गिर जाते हैं। इस डर से टुंगनी गांव के बच्चों का सामना रोज होता है। इनके साथ ही प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ ही बाकि मरीजों को भी ऐसे ही ड्रम के सहारे नदी पार करना पड़ती है। 15 दिन पहले इसी नदी को पार कर स्कूल जा रहे तीन बच्चे बीच नदी में गिर पड़े। लेकिन मौके पर मौजूद गांव वालों की वजह से बच्चों को बचाया गया। इस कारण बनी कंडिशन...


    - टुंगनी के पास से चीलर नदी निकली है, जो 3-4 किमी दूर जाकर लखुंदर नदी में मिली है। पचोर के पास इस बार डेम बना दिया गया। उस डेम से रुका पानी गांव तक पहुंच गया और नदी में पानी आते ही रास्ता बंद हो गया।

    ढाई साल में भी नहीं बना पुल

    - टुंगनी और पास के गांव साफ्टी के बीच साढ़े 5 करोड़ से 2 साल में एक पुल बनना था। इससे गांव वालों की सारी मुसीबत खत्म हो जाती।

    - यह गांव एक किमी दूर है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही के कारण ढाई साल बाद भी इसका निर्माण शुरू नहीं हुआ।

    दूसरा रास्ता भी पानी से होते हुए
    - टुंगनी तक पहुंचने के लिए बड़ों की भी फजीहत है। ड्रम पर बैठने से डरने वाले या जिन्हें तैरना नहीं आता, उनको यहां से करीब एक किमी दूर ऊपर की तरफ जाना पड़ता है। यहां घुटने के ऊपर तक पानी होने से ग्रामीण कपड़े हाथ में लेकर नदी पार करते हैं।
    दूसरे गांव में रखते हैं वाहन

    - छह महीने पहले नदी में पानी जमा हुआ, तभी से गांव में एक बाइक तक नहीं पहुंची। गांव के लोग अपनी बाइक नदी के पार साफ्टी गांव में ही रखने लगे हैं। उसके बाद ड्रम से नदी पार कर घर आते हैं।

    ये सिर्फ उदाहरण है...

    - गांव के देवीसिंह चौहान ने बताया कि नदी के उस पार से फसल लाते समय दो क्विंटल सोयाबीन नदी में ही गिर गई।

    - करीब 15-20 दिन पहले स्कूल जा रही रोशनी, बुलबुल और विकास तीनों ड्रम से नीचे गए।

    - बच्चों को तैरना नहीं आता था, वहां मौजूद युवकों ने उन्हें जैसे-तैसे बचाया।

    - चार दिन पहले गीताबाई नाम की महिला की जान भी उनके बेटे दरबारसिंह ने बचाई।

    - इसके अलावा कई बार मोबाइल और अन्य सामान नदी पार करते समय पानी में गिर चुका है।

    आगे पढ़ाई के लिए कांकड़ी जाना पड़ता है
    - टुंगनी में पांचवीं तक स्कूल है। इसके आगे पढ़ना हो तो चार किमी दूर पास के गांव में जाना पड़ता है, वो भी नदी पार करके। यहां कोई पुल भी नहीं है।

    - ऐसे में बच्चे प्लास्टिक के ड्रम के सहारे नदी पार कर स्कूल जाते हैं। कई बार वे नदी में गिर भी चुके हैं।

    - यही नहीं 300 से ज्यादा आबादी वाले इस गांव की प्रेग्नेंट महिलाओं और बाकि मरीजों को भी ड्रम के सहारे ही नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया जाता है।

    - छह महीने से नदी में पानी है और तभी से एक भी गाड़ी इस गांव में नहीं पहुंचा।

    जल्द बनवाएंगे पुलिया
    - कलेक्टर श्रीकांत बनोठ का कहना है जानकारी लेंगे। पुलिया का निर्माण जल्द करवाएंगे। वहीं गांव पंचायत पचोर के सरपंच ने बताया दो साल का काम ढाई साल में भी नहीं हुआ। अफसरों को भी आवेदन दिया, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

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    टुंगनी के पास से चीलर नदी निकली है, जो 3-4 किमी दूर जाकर लखुंदर नदी में मिली है।
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    इस तरह जान जोखिम में डालते हैं बच्चे।
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Web Title: On The Drum, The Child Forced To Cross The River Crossing The School
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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