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पति की मौत के बाद मजदूरी के लिए घर से निकली तो पंचायत ने लगाया 5000 का जुर्माना

महिला ने बताया मेरी आर्थिक स्थिति खराब है। मैं 5 हजार रुपए का जुर्माना भरने में सक्षम नहीं हूं इसलिए गांव छोड़ना पड़ा।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 07:04 AM IST
पीड़िता फूलो आदिवासी। पीड़िता फूलो आदिवासी।

श्योपुर (ग्वालियर). दो महीने पहले पति की बीमारी से मौत हो गई। सिर पर 3 बच्चों को पालने की जिम्मेदारी लिए विधवा महिला फूलाे आदिवासी जब मेहनत मजदूरी करने के लिए घर से बाहर निकली तो समाज की पंचायत ने 5 हजार का जुर्माना ठोक दिया। आरोप भी अजीबोगरीब-समाज की महापंचायत में हुए फैसले के विरुद्ध महिला अकेली घर से बाहर क्यों निकली। मामला कराहल ब्लॉक के भेला भीमलत गांव का है।


पीड़िता ने कहा- जुर्माना भरने में सक्षम नहीं, इसलिए छोड़ा गांव

पीड़िता फूलो आदिवासी ने बताया मेरी आर्थिक स्थिति खराब है। मैं 5 हजार रुपए का जुर्माना भरने में सक्षम नहीं हूं इसलिए गांव छोड़ना पड़ा। गंभीर बात यह है कि जब मामला उजागर हुआ तो आदिवासी समाज के जिम्मेदारों ने ऐसे किसी फैसले से पल्ला झाड़ते हुए महिला की मदद की बात कहीं। सबसे शर्मनाक तो यह है कि मामले की जांच व महिला की मदद करने के बजाय कलेक्टर पन्नालाल सोलंकी ने इस मामले में आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से मना कर दिया। यहां बता दें कि श्योपुर-शिवपुरी में इन दिनों आदिवासी समाज में महापंचायतों के आयोजन कर शराबबंदी व अन्य कुरीतियां दूर करने के लिए निर्णय लिए जा रहे हैं। श्योपुर में भी 84 गांवों की महापंचायत गठित है, जिनकी अभी तक 4 बैठकें हो चुकी हैं।

अब कहा-हम महिला को ढूंढकर मदद करेंगे


आदिवासी महापंचायत के उपाध्यक्ष सतीश आदिवासी ने बताया कि हमारी महापंचायत की 4 बैठकें हुईं हैं। गांव स्तर पर आदिवासी पंचायतों ने कुछ अलग फैसले ले लिए हैं। जिससे महिलाओं को परेशानी हो रही है। भेला भीमलत गांव जाकर महिला के बारे में पता लगाएंगे। उसे ढूंढ़कर हम आर्थिक मदद भी मुहैया कराएंगे। विधवा महिला घर की मुखिया होने के नाते अकेले काम पर जा सकती है। हमारी महापंचायत की तरफ से ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। आदिवासी पंचायत के लोगों को भी समझाएंगे।

यह दो फैसले विवादास्पद


- दूसरे समाज के लोगों के साथ रहने वाली महिलाओं को समाज में वापस आने पर पंचों की झूठन खानी होगी व सिर पर चप्पल रखकर गांव के चक्कर काटने होंगे। फिर 11 हजार का जुर्माना भी देना होगा।
- 6 मार्च को भेला भीमलत में आदिवासी पंचायत हुई। जिसमें विधवा महिलाओं को अकेले काम पर न जाने का फरमान सुनाया और जुर्माने का प्रावधान रख दिया।

मैं कुछ नहीं कहूंगा


श्योपुर के कलेक्टर पन्नालाल सोलंकी ने बताया कि आदिवासी पंचायतों के फैसलों और भेला भीमलत गांव की विधवा महिला के संबंध में कुछ भी जवाब नहीं दे सकूंगा।