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शौक के लिए खरीद रहे ‌हथियार, इंदौर के 300 लोगों के सिकलीगरों से संपर्क होने का पता चला

इंदौर पुलिस ने 2017 में आर्म्स एक्ट के 1315 प्रकरण बनाते हुए 1300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया।

Dainik Bhaskar

Jan 19, 2018, 06:32 AM IST
people of Indore revealed contact with the cyligers

इंदौर. इंदौर पुलिस ने 2017 में आर्म्स एक्ट के 1315 प्रकरण बनाते हुए 1300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया। यह संख्या बीते पांच साल में सर्वाधिक है। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ कि यह कार्रवाई बहुत ही गोपनीय ढंग से एकत्र की गई जानकारी की बदौलत हो पाई। पांच साल में पकड़े गए सौ से ज्यादा सिकलीगरों की कॉल डिटेल से इन लोगों की जानकारी एसटीएफ को मिली और इतनी गिरफ्तारियां हो सकीं। हथियारों के मामले में इस कार्रवाई का ट्रेंड यह निकलकर आया कि सिर्फ अपराधी ही नहीं, कई लोग शौकिया तौर से भी अवैध हथियार खरीद रहे हैं। जिसने एक बार भी सिकलीगरों के मोबाइल नंबरों पर बात की, वे पुलिस के राडार में आ गए। अभी 300 से ज्यादा लोगों पर निगाह है, जिनके सिकलीगरों से संबंध पता चले हैं।


- पूरे देश में बेचे जा रहे अवैध हथियारों में सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश के सिकलीगरों ने बेचे। इसे देखते हुए अवैध हथियारों की मॉनिटरिंग के लिए एसटीएफ को नोडल एजेंसी बनाया गया है। एसटीएफ ने 2010 से 2015 के बीच में प्रदेश के 48 जिलों में गिरफ्तार सिकलीगरों की जानकारी निकाली।

- रिपोर्ट के मुताबिक पूरे प्रदेश में करीब 5 हजार सिकलीगर हैं। इनमें सौ से ज्यादा सिकलीगर एक से अधिक मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते पाए गए। 150 से ज्यादा की कॉल डिटेल से खुलासा हुआ प्रदेश 16 हजार लोग सिकलीगरों से संपर्क में हैं। जिलेवार बनी सूची में पता चला सर्वाधिक इंदौर से 1400 लोग संपर्क में रहे।


ऐसी पिस्टल बना रहे कि आर्मोरर भी नहीं दे पा रहे हैं सही सटीक रिपोर्ट
- अवैध हथियारों के साथ पकड़ाए सिकलीगरों पर आर्म्स एक्ट की सामान्य धाराएं तो लग रही, मगर धारा 25(1)(क)(क) नहीं। इस धारा के लगने से आरोपी को 7 साल की सजा हो सकती है। यह धारा पुलिस के प्रतिबंधित बोर 9 एमएम के लिए लगाई जाती है।

- पहले सिकलीगर 9 एमएम बोर की ही पिस्टल बना रहे थे, पर अब ऐसी पिस्टल बना रहे, जिसमें 7.62 से 7.65 बोर तक की बुलेट चल जाती है। इसकी सटीक रिपोर्ट पुलिस के आर्मोरर (हथियार एक्सपर्ट) भी नहीं दे पाते, जिसके कारण अपराधी सख्त कार्रवाई से बच रहे हैं।

40 प्रतिशत लोगों ने शौक और आत्मरक्षा के लिए अवैध पिस्टल खरीदना स्वीकार किया
- एएसपी क्राइम अमरेंद्र सिंह के मुताबिक 1315 लोगों में से करीब 40 % वे थे, जिन्होंने पूछताछ में आत्मरक्षा या शौक के लिए अवैध हथियार खरीदने की बात कही। कुछ ऐसे भी थे, जिनके खिलाफ पूर्व में कोई आपराधिक केस नहीं था।

- किसी ने सुरक्षा के बतौर, तो किसी ने दोस्ती के चक्कर में अवैध हथियार खरीदा और वे आरोपी बन गए। पुलिस को सूचना मिली है अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त कुख्यात बदमाश करवा रहे हैं, ऐसे करीब 90 आरोपियों की रैकी की जा रही है।

दोस्तों के कारण आरोपी बन गए
- तिल्लौर के रहने वाले बद्रीलाल जाट ने बताया कि उनके खिलाफ आज तक ट्रैफिक नियम उल्लंघन तक का चालान नहीं बना। लेकिन कुछ माह पहले दोस्तों के साथ ऐसी जगह बैठे थे, जहां नहीं होना चाहिए था। पुलिस ने छापा मारा तो वे भी पकड़े गए। उनके दोस्तों के पास अवैध पिस्टल और कारतूस थे। इसके कारण वे भी आरोपी बन गए।

आत्मरक्षा के लिए रखा अवैध कट्टा
- पुणे के सतेंद्र शुक्ला को क्राइम ब्रांच ने चार माह पहले अवैध पिस्टल के साथ पकड़ा था। सतेंद्र ने बताया उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं था। कई बार अकेले ट्रेवल करना पड़ता था तो खुद की सुरक्षा के लिए 5 हजार में कट्टा खरीद लिया था। नहीं पता था कि केस में फंस जाऊंगा।

शौक से खरीदी पिस्टल, नौकरी गंवाईं
- एक प्रतिष्ठित हॉस्पिटल में मेल नर्स विनोद राठौर को दो महीने पहले क्राइम ब्रांच ने अवैध पिस्टल के साथ गिरफ्तार किया था। विनोद ने बताया उसने दोस्त से पिस्टल मंगवाई थी। उसने सोचा भी नहीं था कि पुलिस उसके घर पहुंच जाएगी। अवैध हथियार का केस बनने के साथ विनोद की नौकरी चली गई।

फेसबुक पर फोटो डालने की गलती
- जुलाई 2017 में क्राइम ब्रांच ने मोती तबेला के हिमांशु को गिरफ्तार किया था। उसने पिस्टल के साथ फोटो फेसबुक पर पोस्ट किया था। सूचना मिलने पुलिस ने गिरफ्तार किया तो पिस्टल, कारतूस भी जब्त हुआ।

सिकलीगरों के पास दूसरे प्रदेशों के नंबर, लेकिन इस्तेमाल मध्यप्रदेश में हो रहा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक जिन 150 मोबाइल व लैंड लाइन नंबरों की कॉल डिटेल निकाली गई हैं, उनमें बहुत से नंबर राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र के हैं लेकिन इनका इस्तेमाल प्रदेश के सिकलीगरों द्वारा किया जा रहा है। उदाहरण बतौर बुरहानपुर के पास सिकलीगरों के अड्डों पर मप्र के मोबाइल टॉवर का नेटवर्क नहीं आता। वहां महाराष्ट्र के टॉवर से नेटवर्क आता है तो वहां के लोग महाराष्ट्र से सिम लेकर संचालित करते हैं।

सोशल मीडिया पर फोटो डालना भी अपराध
क्राइम ब्रांच ने सोशल मीडिया पर हथियार के साथ फोटो डालने के 20 से ज्यादा केस पकड़े। ऐसे पोस्ट अपराध की श्रेणी में आते हैं।

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