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इंदौर हादसा : सोशल मीडिया पर ऐसे रिएक्शन, कहा- ये एक्सीडेंट नहीं, मासूमों का कत्ल है

डीपीएस बस एक्सीडेंट में चार मासूमों की मौत के बाद सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पूरे शहर का गुस्सा देखा जा रहा है।

Danik Bhaskar | Jan 07, 2018, 04:29 AM IST

इंदौर. डीपीएस बस एक्सीडेंट में चार मासूमों की मौत के बाद सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक पूरे शहर का गुस्सा देखा जा रहा है। खास तौर से सभी के निशाने पर स्कूल मैनेजमैंट, आरटीओ, ट्रैफिक पुलिस है। कुछ लोगों ने साफ कहा कि यह रोड एक्सीडेंट नहीं था। बल्कि यह सीधे-सीधे चार मासूमों का कत्ल है। सोशल मीडिया पर कैंपेन भी चल रहा है, जिसमें स्कूल मैनेजमेंट से लेकर शासनऔर प्रशासन में सभी जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। इस कैंपेन पर 24 घंटे में आठ हजार से ज्यादा लोग सुझाव और समर्थन दे चुके हैं। संदेश में संवेदनाएं...

- मां ने कहा था कपड़ों पे स्याही न लगा के आना वरना डांट पड़ेगी... उनके कपड़ों पर खून लग गया था वो घर कैसे जाते?

- सवेरे जगाकर नींद से, अपने हाथों नाश्ता खिलाया होगा, छोड़ स्कूल के दरवाजे पिता ने प्यार से हाथ हिलाया होगा।
- बेटा मेरा महफूज़ है वहां, मां ने दिल को समझाया होगा, क्या बीती होगी उस मां पर जब फोन स्कूल से आया होगा।
- भागते हुए स्कूल की तरफ एक-एक कदम डगमगाया होगा, क्या गुजरा होगा दिल पर पिता के इस हाल में जब उसे पाया होगा।
- बिखर गए होंगे वो बदकिस्मत मां-बाप जब उसे आखिरी बार सीने से लगाया होगा, लौटेगा नहीं कभी वापस वो कैसे खुद को समझाया होगा।
- देश का भविष्य बनने निकले थे, समय ने उन्हें इतिहास बना दिया, वीरों की किताब पढ़कर चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह बनने निकले थे समय ने सीधा उन्हीं से मिला दिया।

सिस्टम के खिलाफ...

- खातीवाला टैंक से डीपीएस - 16 किमी दूर

- बिजलपुर से एडवांस एकेडमी - 20 किमी दूर

- लसूड़िया से एमराल्ड हाइट्स - 24 किमी दूर

- राजेंद्र नगर से शिशु कुंज -21 किमी दूर

- बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं या नौकरी, चार घंटे आने-जाने में, थोड़ा सोचना होगा।

- स्कूल मैनेजमेंट की ‘चलता है’ वाली सोच ने मासूमों की जिंदगी ले ली।

- यह अपराध है। स्टेयरिंग जाम होने की बात आ रही है। यह सीधे स्कूल की लापरवाही है।

- मैंने कई बार स्कूल से पुरानी बसों और ओवरलोड होने की बात कही, लेकिन मैनेजमेंट अपने पर ही अड़ा रहा। उनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना है और वह चाहते हैं कि अधिक से अधिक छात्र आएं, जिससे उन्हें पैसे मिले।

- डीपीएस में एक सेक्शन में 46 बच्चे हैं। पूरा बाजार बना दिया है और उद्देश्य केवल पैसा कमाना है।

- यह बताता है कि आरटीओ में किस स्तर का भ्रष्टाचार है जो इस तरह बसों को सर्टिफिकेट जारी कर देता है।

- छात्रों की सुरक्षा, स्कूल मैनेजमेंट की पहली जिम्मेदारी है।

- स्कूल मैनेजमेंट और आरटीओ इस घटना के लिए जिम्मेदार हैं।

पैरेंट्स का दर्द

- मेरा बच्चा हैदराबाद के डीपीएस में जाता है। ये 20 साल से ज्यादा पुरानी बसें चला रहे हैं।

- कुछ महीने पहले मैं इसी रूट की बस में थी। बहुत तेज बस चलाते हैं। मैंने स्कूल मैनेजमेंट से शिकायत भी की थी।

- डीपीएस मैनेजमेंट को दंडित करना चाहिए। वह बहुत ज्यादा फीस लेते हैं, पर बच्चों की सुरक्षा में फेल हो गए।

- यह बहुत पुरानी बस थी, जिसे रंगरोगन कर नया बना दिया। इतना पैसा लेने के बाद भी यह लापरवाही।

- मैं जब इस स्कूल में पढ़ता था, तब भी इसी तरह की ड्राइविंग देखता था।

- स्कूल मैनेजमेंट का गलत रवैया, इतनी फीस के बाद भी।

- स्कूल मैनेजमेंट में मानवता नहीं है। वह बच्चों को केवल मशीन समझकर उनसे पैसा बना रहे हैं।

- स्कूल मैनेजमेंट की गलती है। वह इतनी फीस के बाद भी बच्चों की सुरक्षा नहीं कर पाए।

- कचरा फेंकने और थूकने पर जो अधिकारी इतनी मुस्तैदी से जुर्माना वसूलते हैं, वो अफसर ऐसी घटिया बसें चलने के लिए परमिट भी दे देते हैं। फिर जांच भी नहीं करते।

अपने आप से एक सवाल...

- हर स्कूल बस के पीछे लिखा रहता है कि रश ड्राइविंग देखते ही नीचे दिए हुए नंबर पर शिकायत करें। हम सब देखते हैं, लेकिन कभी किसी ने काॅल कर स्कूल से शिकायत की?