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भीड़ रोकने ओंकारेश्वर मंदिर के गेट बंद किए, ट्रस्टी बोले- जेल में डाल दो, गेट बंद नहीं होंगे

प्रदेशभर से बसों में भरकर लाई गई भीड़ भी चार एकड़ के पंडाल में पड़ रही थी कम।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 08:39 AM IST
ओंकारेश्वर मंदिर के गेट बंद कर दिए गए थे। ओंकारेश्वर मंदिर के गेट बंद कर दिए गए थे।

ओंकारेश्वर/खंडवा. आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना के लिए सोमवार को हुए भूमिपूजन कार्यक्रम में प्रदेशभर से लोगों को बसों में लाया गया था। इसके बावजूद सभास्थल पर चार एकड़ में बने पंडाल में अपेक्षानुरूप भीड़ नहीं हो पा रही थी। अफसरों ने भीड़ जुटाने के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के पट दो घंटे पहले ही सुबह 10.30 बजे बंद करवा दिए। विरोधस्वरूप ट्रस्टी ने कहा भले जेल में डाल दो, गेट बंद नहीं होंगे। इसके बाद गेट खोल दिए गए। नियमों के मुताबिक मंदिर के गेट दोपहर 12.30 बजे से 1.30 बजे तक बंद रहते हैं। इस दौरान भोग लगता है। ग्रहण के दौरान शास्त्र सम्मत तरीके से गेट बंद होते रहे हैं।

आधे घंटे बाद 11 बजे पट खाेले गए
यात्रा के समापन कार्यक्रम में भीड़ बढ़ाने के लिए स्थानीय अवकाश घोषित किया, अफसर-पटवारी और शिक्षक भी जुटे पर भीड़ नहीं आई। जो लोग आए वे भी ओंकारजी के दर्शन व नर्मदा स्नान के लिए जाने लगे। लोगों को सभास्थल पर भेजने के लिए अफसरों ने ओंकारजी मंदिर के मुख्य गेट पर ताला डलवा दिया। एसडीओपी यशपाल सिंह ने झूला पुल के गेट पर पुलिस अफसर तैनात कराए। वे भी डंडे के दम पर लोगों को कार्यक्रम में भेज रहे थे। नौकायन बंद करा दिया, ताकि श्रद्धालु कार्यक्रम में जाएं। स्थानीय लोगों को भी अपने घर नहीं जाने दिया गया। श्रद्धालुओं ने विरोध किया तो आधे घंटे बाद 11 बजे पट खाेले गए।

प्रतिमा पर्वत पर हो, केंद्र नीचे स्थापित किए जाएं
षड्दर्शन संत मंडल के संरक्षक महामंडलेश्वर विवेकानंदपुरी ने शोध सहित अन्य केंद्रों को नीचे स्थापित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा प्रतिमा की स्थापना पर्वत पर हो। शोध केंद्र, न्यास व अन्य जो भी किया जा रहा है उसे नीचे स्थापित किया जाए, ताकि लोग उससे सीधे जुड़ें। यदि वहां शोध केंद्र व अन्य न्यास स्थापित होते हैं तो लोग नहीं जा सकेंगे।

स्थापना के लिए आया दान
सत्यमित्रानंद ने संबोधित करते हुए कहा आदि शंकराचार्य के संदेश को जन-जन तक फैलाने के लिए मुख्यमंत्री ने जो सांस्कृतिक न्यास बनाने की योजना बनाई है, यह दिव्य है। इसे पूरा होना चाहिए। उन्होंने न्यास के लिए 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। चिन्मय मिशन के प्रमुख स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने सांस्कृतिक एकता न्यास के लिये 25 लाख रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम को परमानंद गिरि, परमात्मानंद सरस्वती, संबित सोमगिरि, अखिलेश्वरानंद, सुप्रतिप्तानंद व अन्य संत मौजूद रहे।

वैदिक मंत्रों व शंखनाद से हुआ शुभारंभ
मुख्यमंत्री ने धर्माचार्यों व अतिथियों का शॉल-श्रीफल से अभिनंदन किया। वे आदि शंकराचार्य की चरण पादुकाएं व साधना सिंह द्वादश कलश सिर पर लेकर मंच पर आए। शुभारंभ स्वस्तिवाचन से हुआ।

मुख्यमंत्री ने शाम को किए ओंकारजी के दर्शन

मुख्यमंत्री ने शाम 6 बजे ओंकारजी के दर्शन पत्नी के साथ किए। इसके बाद वे सैलानी टापू गए। मुख्यमंत्री ने संतों को लाने के लिए भी हेलिकाप्टर का उपयोग किया।

काठमांडू से भी आई मिट्टी

काठमांडू, 13 राज्यों के प्राचीन शिव मंदिरों, प्रदेश की 23 हजार पंचायतों, चारों पीठों से।

मूर्ति बनाने के लिए चित्र बनाने वाले का सम्मान
मूर्ति बनाने के लिए चित्र बनाने वाले महाराष्ट्र के वासुदेव कामथ को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री पारस चंद्र जैन, संस्कृति राज्यमंत्री सुरेंद्र पटवा, मंत्री अर्चना चिटनीस, सीएम की पत्नी साधना सिंह व अफसर मौजूद थे।

ऐसी बनेगी 108 फीट ऊंची प्रतिमा। ऐसी बनेगी 108 फीट ऊंची प्रतिमा।
कार्यक्रम में कुचिपुड़ी, भारत नाट्यम, ओडिसी नृत्य भी हुआ। कार्यक्रम में कुचिपुड़ी, भारत नाट्यम, ओडिसी नृत्य भी हुआ।