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बिजली अधिकारी को धमकी का मामला- आरोपी रघुवंशी के पास तो लाइसेंस ही नहीं

प्रमुख आरोपी वीरेंद्र सिंह रघुवंशी के पास रिवॉल्वर का लाइसेंस होना ही नहीं पाया गया है।

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 06:56 AM IST
Raghuvanshi not to get license even if threat to power officer

इंदौर. जनवरी में बिजली कंपनी के दफ्तर में अधिकारी से मारपीट और रिवाल्वर से धमकाने के मामले में प्रमुख आरोपी वीरेंद्र सिंह रघुवंशी के पास रिवॉल्वर का लाइसेंस होना ही नहीं पाया गया है। पहले मामला दर्ज करने से बच रही पुलिस अब सीआरपीसी का हवाला देकर इसकी गिरफ्तारी से भी बचती नजर आ रही है। बड़ा सवाल यह है कि घटना में रिकॉर्ड हुई रिवॉल्वर आखिर किसकी है।

- पुलिस का कहना है कलेक्टर कार्यालय से लाइसेंस की जानकारी मांगी है । यदि आरोपी के नाम से शस्त्र लाइसेंस नहीं पाया जाता तो आर्म्स एक्ट की धाराएं भी बढ़ाई जा सकती हैं। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि वह विधायक उषा ठाकुर का लाइसेंसी रिवॉल्वर लेकर चल रहा था।

- हालांकि विधायक का कहना है कि उसके पास न तो लाइसेंस है, न ही रिवॉल्वर। वीडियो फुटेज में नजर आ रही थी चीज एक टोपी है। उनका कहना है अपनी रिवाल्वर वीरेंद्र सिंह को कभी नहीं दी। वह अपने पास ही रखती हैं। गौरतलब है आरोपी वीरेंद्र सिंह को घटना के बाद निगम में एल्डरमैन भी बना दिया गया है।


क्या थी विवाद की वजह
- विधानसभा क्रमांक तीन में 35 ट्यूबवेल सालों से बिजली चोरी कर चलाए जा रहे थे। विद्युत कंपनी ने जब कनेक्शन काटे तो 19 जनवरी को विधायक उषा ठाकुर समर्थकों के साथ बिजली दफ्तर पहुंच गई।

- यहीं कहासुनी के दौरान विधायक प्रतिनिधि वीरेंद्र सिंह व साथियों ने बिजली अधिकारियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। यही नहीं ट्यूबवेल के कनेक्शन काटे जाने से आक्रोशित रघुवंशी द्वारा अधिकारी को कथित तौर पर रिवाल्वर लहरा कर धमकाने की घटना भी रिकॉर्ड हुई थी। पहले पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी करती रही पर बिजली कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन के बाद आखिरकार बाणगंगा पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था।

गिरफ्तारी जरूरी नहीं, नोटिस देकर बुलाएंगे
- आरोपी रघुवंशी की गिरफ्तारी के सवाल पर एडिशनल एसपी प्रशांत चौबे ने बताया फिलहाल मामला जांच में है। वैसे भी सीआरपीसी में 7 वर्ष से कम सजा वाली धाराओं में गिरफ्तारी जरूरी नहीं है। अभी गिरफ्तारी नहीं, बल्कि नोटिस देंगे। जांच में सहयोग करते हैं तो गिरफ्तार करने के बजाय, चालान वाले दिन सीधे कोर्ट में पेश होने को कहा जाएगा। ऐसा नहीं करने पर गिरफ्तारी भी हो सकती है।

जांच के बाद ही साबित हो सकेगा
- हालांकि यह तो जांच के बाद ही साबित हो पाएगा कि जिस रिवाल्वर से धमकाया गया वह रिवाल्वर किसकी है। लेकिन अभी तक की पुलिस जांच और खुद विधायक उषा ठाकुर के मुताबिक वीरेंद्र सिंह के पास रिवॉल्वर का लाइसेंस नहीं है। तो फिर यह रिवाल्वर किसका थी? और यदि वह रिवाल्वर किसी और की थी, क्या इसके लिए रिटेनरशिप का लाइसेंस लिया गया था? गौरतलब है उषा ठाकुर के पास भी एक लाइसेंसी रिवाल्वर है, जिसकी कीमत उन्होंने चुनाव आयोग के शपथ पत्र में साठ हजार बताई है।

रिवॉल्वर नहीं टोपी है : उषा ठाकुर
- विधायक उषा ठाकुर का इस बारे में कहना है कि मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। वीरेंद्र सिंह के पास ना तो लाइसेंस और ना ही वह रिवॉल्वर से धमका रहा था। सीसीटीवी फुटेज ध्यान से देखेंगे तो सब समझ में आ जाएगा कि उसके हाथ में टोपी है

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