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​राजबाड़ा ने ली सांस; खुले विकास के खिड़की-दरवाजेे पर बंद हुआ व्यापार

स्मार्ट सिटी एरिया में शामिल राजबाड़ा क्षेत्र की जो बाधाएं रविवार को हटी हैं, उसके बाद यहां विकास की नई राह खुल गई है।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 04, 2017, 06:46 AM IST

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    इंदौर .स्मार्ट सिटी एरिया में शामिल राजबाड़ा क्षेत्र की जो बाधाएं रविवार को हटी हैं, उसके बाद यहां विकास की नई राह खुल गई है। राजबाड़ा जहां खुलकर सांस लेगा, वहीं उसकी दीवारों पर आए दिन लगने वाली कीलों की टीस भी कम होगी। 20 करोड़ की लागत से राजबाड़ा का विकास अब शुरू हो सकेगा तो गोपाल मंदिर पर भी 10 करोड़ खर्च होंगे। बांके बिहारी मंदिर का विकास धर्मस्व विभाग और आईडीए मिलकर करेंगे। तीनों धरोहरों का अगले दो साल में संरक्षण और जीर्णोद्धार पूरा होता है तो यह इंदौर के इतिहास को दोबारा संवारने जैसा होगा। कमर्शियल काम्पलेक्स बनने से हटाए गए दुकानदारों को भी नया मार्केट मिलेगा।

    गोपाल मंदिर के पीछे फिर मिलेंगी दुकानें, निगम मार्केट का भी विकल्प
    - जिन लोगों काे हटाया गया है, उन्हें एक से डेढ़ साल तक अस्थायी रूप से बड़वाली चौकी के पास पुराने एसपी ऑफिस की खाली पड़ी जमीन पर निगम दुकान बनाकर देगा, ताकि उनका व्यापार चलता रहे।

    - निगमायुक्त मनीष सिंह ने बताया कि स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत गोपाल मंदिर के पीछे कमर्शियल मार्केट 5 करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। महापौर मालिनी गौड़ के निर्देश पर इन दुकानदारों को न लाभ, न हानि पर इसी मार्केट में दुकानेंं आवंटित होंगी।

    - महज 5 से 10 प्रतिशत कीमत ही व्यापारियों को देना होगी। आयुक्त सिंह ने कहा जो व्यापारी एसपी ऑफिस के पास नहीं जाना चाहते हैं, उन्हें किराए पर निगम मार्केट में खाली पड़ी दुकानें भी दी जाएंगी।

    इसके लिए टेंडर निकालने के निर्देश मार्केट विभाग को दिए हैं। इसमें शामिल होने के लिए प्राथमिकता गोपाल मंदिर रोड के व्यापारियों की रहेगी। दुकानदार चाहें, तो यहां पर भी अस्थायी रूप से दुकान ले सकते हैं।

    पुराने वैभव को बचाने में रुचि नहीं दिखाने से यह हाल हुआ राजबाड़ा का
    - 1952 से महाराजा यशवंत राव के साथ रहा, तब से अब तक राजबाड़ा को देख रहा हूं। अब सुधार हो तो इससे अच्छा क्या हो सकता है? पहले राजबाड़ा के पास कोई गुमटी नहीं थी। देश आजाद हुआ, दोनों वर्ग के लोग आए-गए। पहले यहां दुकानें नहीं थीं।

    - आजादी के बाद कुछ लोग यहां आए, दुकानें निकालीं और छत्रियों पर भी। बाद में छत्रियों की दुकानें तो हटा दीं और उन्हें प्रकाश टॉकीज के पास जमीनें दी गईं। लेकिन राजबाड़ा से दुकानें नहीं हटीं, लोग दुकान बेचते गए और संख्या बढ़ती गई। समय के साथ पुराने वैभव को बचाने में रुचि न लेने से आज यह हालात हो गए।
    -जैसा महाराजा यशवंत राव होलकर के ओएसडी रहे मधुसूदन होलकर ने बताया

    ‘भगवान ने नहीं कहा मंदिर के लिए उजाड़ो दुकानें’

    - बच्चे की स्कूल की फीस, गृहस्थी का राशन, दिवाली की रौनक जिस तीन बाय दो फीट की दुकान से आती थी वह भगवान का भव्य मंदिर बनाने के लिए भेंट चढ़ गई। पांच-छह दशक से जिस दुकान ने गृहस्थी को खड़ा किया, वह दुकान एक ही झटके में बुलडोजर के छूते ही जमींदोज हो गई।

    - जिनके घर इस दुकान से चल रहे थे, उनके यहां आज ऐसा सन्नाटा था मानो किसी की गमी हो गई हो...। घर चलाने वाली महिलाएं, स्कूल जाने वाले बच्चे भी पापा के साथ रविवार सुबह दुकान के बाहर आकर बैठ गए थे। आस थी कि महिला, बच्चे देखकर अफसरों का कलेजा पसीज जाएगा।

    - उम्मीद थी कि परिवार को देखकर आज दुकान टूटने से बच जाएगी। कोई जतन काम नहीं आया, कोई फरियाद सुनी नहीं गई। जेसीबी गर्जी, उसका पंजा जैसे ही दुकान के शटर और बोर्ड पर पड़ा, परिवार रो दिया। बच्चे पूछते ही रह गए...पापा दुकान क्यों टूट रही है, बच्चे को रोता देख पिता भी रुआंसे हो गए।

    - पांच दशक से ज्यादा पुराना बाजार, 45 मिनट में मिट गया। दुकानें भले ही एक आदमी के खड़े रहने लायक थीं, लेकिन इन दुकानों में इतना दम था कि पांच से सात लोगों का परिवार पाल रही थीं। व्यापारी बोल रहे हैं कि क्या गोपाल ने नगर निगम को आकर बोला कि मेरा भव्य मंदिर बनाने के लिए इन दुकानदारों को उजाड़ दो।

    3 पीढ़ी से थी दुकान
    - बकौल दीपक खत्री हमारी तीसरी पीढ़ी का पेट इस दुकान से पल रहा था। बेटी की शादी की तैयारी इसी के बूते कर ली थी। सोमवार से क्या करूंगा, कहां दुकान लगाऊंगा कुछ समझ नहीं आ रहा। मेरा पिता ने चंद रुपयों से यहां व्यापार शुरू किया था। उनके बाद मैं और अब बेटे ने भी आना शुरू कर दिया था। शनिवार को ढिंढोरा पीटा और रविवार को आकर दुकान हटा गए।

    हमें मुआवजे में मिली धारा 151
    - मनोज हिरानी कहते हैं कि यह कहां का न्याय है। छोटे-छोटे दुकानदारों की गृहस्थी रोड पर आ गई। विरोध करने गए, थोड़ा चिल्ला दिए तो व्यापारियों पर धारा 151 लगाकर केस दर्ज कर दिया। नए सिरे से रोजीरोटी की व्यवस्था करने का संकट है, ऊपर से केस और लगा दिया। ये कैसी स्मार्ट सिटी बनाई जा रही है।

    50 साल की साख मिनटों में खत्म हुई
    व्यापारी सुनील तलरेजा कहते हैं कि हमको छत्री के सामने से हटाया तो गोपाल मंदिर के सामने पक्की, दुकान 2044 तक की लीज के साथ दी थी। अफसरों को बताया तो बोले इतिहास मत बताओ। 50 साल की साख पिता और चाचा ने मिलकर तैयार की थी, वह भगवान के मंदिर के लिए तोड़ दी ।

    जमीन पुलिस की पर लिखित अनुमति ली

    व्यापारियों का आरोप - हमें सुना नहीं गया?
    जवाब- 26 दुकानें जो अधिकृत थीं, उनकी पूरी सुनवाई हुई। कोर्ट से भी आदेश हुए। विधिक प्रक्रिया का पालन करते हुए बेदखली का नोटिस जारी हुआ और बहस-सुनवाई के बाद हटाने के नोटिस जारी हुए। जो दूसरी दुकानें थीं, उन्हें 3 दिन पहले नोटिस जारी किया। जहां तक गुमटियों के आवंटन की बात है, उनकी शर्त में लिखा था कि 24 घंटे के नोटिस पर आपको खाली करना होगा।
    जो जमीन दी है, वह भी निगम की नहीं है?
    जवाब- जमीन पुलिस विभाग की है और वहां पुलिस हाउसिंग की प्लानिंग है। डीआईजी से लिखित में अनुमति ली है। स्मार्ट सिटी कंपनी ने भी इस पर निर्णय लिया। हमारा काम्पलेक्स बनते ही जमीन खाली कर लौटाई जाएगी।
    दुकानदारों का कहना है नई जगह उन्हें सुविधाएं नहीं दी जा रहीं?
    जवाब- निगम सभी सुविधाएं देगा। उन्हें रास्ता चाहिए था, वह खुलवा दिया है। बिजली भी निगम लगवाकर देगा। इसके अलावा भी निगम से जुड़ी जो सुविधाएं व्यापारी चाहेंगे वह देंगे। -मनीष सिंह, निगमायुक्त

    िवरोध किया तो 3 महिलाओं सहित 13 को किया गिरफ्तार

    शनिवार की शाम निगम ने नोटिस देने के बाद यहां मुनादी करवाई थी। रात में व्यापारियों ने सामान हटाना शुरू कर दिया था। सुबह तक सभी दुकानें खाली हो गईं गई थी। व्यापारियों के परिवार बांके बिहारी मंदिर के पास सड़क पर सुबह साढ़े 9 बजे से धरने पर बैठ गए। इधर, निगम का बड़ा अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी ने विरोध का मोर्चा संभाला। इधर, एडीएम अजयदेव शर्मा, एसडीएम संदीप सोनी, अपर आयुक्त देवेंद्र सिंह, एएसपी धनंजय शाह सहित पुलिस अधिकारी लोगों को समझाने पहुंचे। रहवािसयों ने नारेबाजी की। रहवासियों की मांग थी पहले लिखकर दिजिए कि विस्थापन करेंगे। व्यापारी नहीं माने और 5 लोगों की टीम वहां देखने गई। कुछ लोग और विरोध करने लगे तो पुलिस ने गिरफ्तारी शुरू कर दी। वृद्ध महिलाओं और बच्चों को अलग किया गया अौर करीब 10 लोगों को गिरफ्तार कर गाड़ी में बैठा लिया गया। 3 महिलाएं भी विरोध के बीच गिरफ्तार की गईं। सभी को सेंट्रल जेल के बाहर ही बैठाए रखा गया। इधर ताबड़तोड़ जेसीबी, पोकलेन से कार्रवाई शुरू हुई आैर एक घंटे में राजबाड़ा की दीवार गुमटी मुक्त करवा दी गई। सरकारी प्रिंटिंग प्रेस से लगी 26 पक्की दुकानों को भी तोड़ दिया गया। दो घंटे तक यहां जेसीबी, बुलडोजर चलता रहा। अपर आयुक्त सिंह ने बताया कि दीवार से लगी 58 गुमटियां थीं जिसमें 34 निगम द्वारा आवंटित, 17 उषा राजे ट्रस्ट द्वारा और 7 इमामबाड़ा ट्रस्ट ने दी थीं। यहां से हटाए गए दुकानदारों को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगभग डेढ़ साल बाद गोपाल मंदिर के पीछे बनाए जा रहे कॉम्पलेक्स में बगैर लाभ लिए दुकानें दी जाएंगी।

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