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मप्र रणजी टीम के कप्तान देवेंद्र बुंदेला ने लिया संन्यास, 22 साल के क्रिकेट सफर को कहा अलविदा

देवेंद्र बुंदेला ने विदाई समारोह में कहा कि यही सबसे सही समय है मेरे क्रिकेट से रिटायर होने का।

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 06:08 AM IST
देवेंद्र बुंदेला अपने रिटायर देवेंद्र बुंदेला अपने रिटायर

इंदौर. 22 साल के क्रिकेट सफर को पूरा करने के बाद क्रिकेट को अलविदा कहने वाले मध्यप्रदेश के रणजी कप्तान देवेंद्र बुंदेला अपने रिटायरमेंट जलसे में अत्यंत भावुक हो गए। होलकर स्टेडियम में आयोजित एक सादे समारोह में बुंदेला ने अपने साथियों, एमपीसीए के ऑफिशियल्स और मीडिया से बड़े बेबाक लहजे में बातचीत की और कहा कि यही सबसे सही समय है मेरे क्रिकेट से रिटायर होने का। इन 22 सालों में मुझे सभी का सहयोग मिला। मैंने अपने क्रिकेट जीवन को बड़े मजे के साथ जिया और खूब लुत्फ उठाया।

कहा- नॉटआउट लौटता था तो मुझे रातभर नींद नहीं आती थी

उन्होंने कहा कि मैच के दौरान जब में शाम को स्टंप्स पर 60-70 रन बनाकर नॉटआउट लौटता था तो मुझे रातभर नींद नहीं आती थी। पूरी रात मैं करवटे बदलता रहता और यही सोचता रहता कि कल मुझे 100 रन पूरे करना है। करियर के यादगार पलों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जब हम रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचे थे तो यह मेरे क्रिकेट जीवन का सबसे रोमांचक क्षण था, पर जैसे ही हम फाइनल में हार गए तो मुझे बहुत बुरा लगा था।

13-14 की उम्र में शुरू किया था क्रिकेट की बारिकियों काे समझना

बकौल देवेंद्र, "मैं उज्जैन में रहता था। मेरे पिताजी बैंक में थे। बचपन से ही मुझ में क्रिकेट का जुनून सवार हो गया था। फिर में इंदौर खेलने आ गया। जगदाले सर से मिला। वे मेरे खेल से प्रभावित हुए। उस समय वे सीसीआई को देखते थे लेकिन सीसीआई में मेरी जगह बन नहीं रही थी और मुझे सर ने स्टार क्रिकेट क्लब भेज दिया। वहां पर मैने सुशील भाई और मनोज माहेश्वरी के साथ क्रिकेट में अपने पैर जमाए।"


सभी का मुझे भरपूर साथ मिला

देवेंद्र के मुताबिक, "मेरे क्रिकेट करियर में मुझे सभी तरह को लोगों का भरपूर साथ मिला। जगदाले सर की देखरेख में मैंने क्रिकेट की पाठशाला शुरू की। अंडर-16, 17, फिर अंडर-19 क्रिकेट खेलकर मेरा रणजी टीम में पदार्पण हुआ। 22 साल का रणजी करियर कैसे शुरू हुआ और कैसे खत्म हुआ इसका पता ही नहीं चला। सीढ़ी-दर-सीढ़ी खेल आगे बढ़ता गया। मुझे चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में भी रणजी मैच खेलने का मौका मिला। वे बड़े ही अनुशासनबद्ध व्यक्ति थे। मुझे उनसे डर भी लगता था। लेकिन उनके साथ खेल कर मुझे आगे बढ़ने का मौका मिला। मुझे हीरू भाई, अमय भाई, हरविंदर सोढी, ईश्वर पांडे, नमन, टीम के साथियों और सिंधियाजी, भार्गव सा. मुकेश, नितिन, समंदर भाई, नाईकजी, और होलकर स्टेडियम ग्राउंड्समैन का भी भरपूर सहयोग मिला।"


परिवार से भी पूरी मदद मिली

क्रिकेट के कारण कई महीनों तक घर से दूर रहने और मैदान पर आठ-दस घंटे बिताने की वजह से मैं अपने परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाता था। इसके बावजूद मेरे परिवार को लोग मुझे हमेशा सपोर्ट करते थे। कभी कभार पत्नी से नोंकझोंक हो जाती थी, लेकिन बाद में वे भी समझने लगी और उन्होंने भी मुझे सहयोग करने की आदत डाल ली। इस दौरान बुंदेला भावुक हो बैठे, उनकी अांखें डबडबा गई, लेकिन आंसुओं को उन्होंने रोक लिया।

बुंदेला के फस्ट क्लास क्रिकेट करियर :

- 164 मैच, 10004 रन, 26 शतक, 54 अर्धशतक, 104 कैच ।
- पहला रणजी मैच तमिलनाडु (1995-96), आखिरी रणजी मैच दिल्ली (2017-18)
- 9201 सर्वाधिक रन रणजी बनाने वाले देश के तीसरे क्रिकेटर, पहले वसीम जाफर (10738), दूसरे अमोल मजुमदार (9202)।
- 145 रणजी मैच खेलने वाले देश के पहले क्रिकेटर, दूसरे वसीम जाफर (138), तीसरे अमोल मजुमदार (136)।