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छह किमी पैदल जाते थे स्कूल, अब देंगे मुफ्त शिक्षा

गांव के पहले ग्रेजुएट युवा ने नायब तहसीलदार बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के लिए तैयार किए ग्रुप

Dainik Bhaskar

Jan 01, 2018, 06:53 AM IST
Six km walk to school

उज्जैन. माता-पिता निरक्षर, गांव में कोई भी ग्रेजुएट नहीं, ही आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत की उच्च शिक्षा हासिल कर सके लेकिन पढ़ाई के लिए लगन ऐसी कि मुश्किलों ने भी आखिरकार हार मान ली। लगातार प्रयासों से चयनित होकर अब यह युवा नायब तहसीलदार बन चुके हैं लेकिन मकसद है ग्रामीण प्रतिभाओं को शिक्षा का निखार देना।

यह कहानी है तराना क्षेत्र के छोटे से गांव साकरी के रहने वाले कमल सिंह सोलंकी की। हाल ही में एमपीपीएससी में कमल का चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ है लेकिन इस पद तक आने में उन्हें परेशानियों से गुजरना पड़ा। कमल के पिता मादुलाल सिंह आैर माता रेशमदेवी दोनों ही निरक्षर हैं। बड़े भाई होकम सिंह भी पांचवीं तक ही पढ़ सके। गांव में साढ़े तीन बीघा की छोटी सी जमीन पर खेती करके किसी तरह यह परिवार गुजारा करता है। कमल की शिक्षा के प्रति यह लगन ही रही कि गांव में पांचवीं के बाद स्कूली शिक्षा नहीं होने के बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। बकौल कमल छठवीं से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए उन्हें 6 किलोमीटर दूर दूसरे गांव दोन्ता में जाना पड़ता था। 8वीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद किसी तरह कायथा से 10वीं एवं उज्जैन से 12वीं की पढ़ाई पूरी की। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए भी ट्यूशन पढ़ाकर रुपयों की व्यवस्था करते हुए बीए आैर फिर राजनीति विज्ञान में एमए तक की पढ़ाई पूरी की। सरपंच पति सोदान चौहान ने बताया कमल डिग्री पूरी करके गांव के पहले ग्रेजुएट बने। कमल ने एमपीपीएससी में लगातार प्रयास जारी रखा आैर हाल ही में आए परिणाम में उनका चयन नायब तहसीलदार के पद पर हुआ। कमल ने बताया ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा देना ही अब उनका मुख्य मकसद है। इसके लिए वह पढ़े-लिखे युवाओं का ग्रुप तैयार कर रहे हैं।

माता-पिता के साथ कमल सिंह सोलंकी।
घट्टिया तहसील के ग्राम चकरावदा की रहने वाली रीना पटेल आंजना ने 10वीं तक की शिक्षा नवोदय विद्यालय में हासिल की। इसके बाद आगे की पढ़ाई करने का मन बनाया तो रिश्तेदारों ने कहा- बेटी आगे पढ़कर क्या करेगी। रीना ने इन शब्दों को चुनौती के रूप में लिया। ताऊ किशोरीलाल एवं माता-पिता चंदरबाई बालूसिंह ने भी बेटी को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। रीना ने 12वीं आैर बीए प्राइवेट किया। 2013 से लेकर 2017 तक पांच बार एमपीपीएससी में प्रयास किया आैर उसे सफलता मिल गई। रीना का चयन डिप्टी जेलर के रूप में हुआ है। रीना का कहना है अधिकारी बनकर अब वह ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों को शिक्षित करेंगी।

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