--Advertisement--

बायपास पर स्पीड लिमिट ही 100, स्कूल बसों की रफ्तार को कैसेे चेक करे राडार

एक साल से खराब पड़े 8 लाख के स्पीड राडार को ट्रैफिक पुलिस ने भास्कर की खबर के बाद ही ठीक करवा लिया।

Danik Bhaskar | Jan 30, 2018, 06:28 AM IST

इंदौर. एक साल से खराब पड़े 8 लाख के स्पीड राडार को ट्रैफिक पुलिस ने भास्कर की खबर के बाद ही ठीक करवा लिया। जल्द ही इससे ओवरस्पीडिंग के चालान बनना शुरू होंगे लेकिन बायपास पर स्कूल बसों पर पुलिस कार्रवाई नहीं कर सकेगी। इसके पीछे अधिकारियों का कहना है कि बायपास पर स्पीड लिमिट पर 100 किमी प्रति घंटे के बोर्ड लगे हैं। नियमानुसार इस पर चलने वाले वाहन इस गति तक चल सकते हैं। पुलिस भले ही स्कूल बसों को टारगेट करे लेकिन इतनी गति से निकल रहे वाहनों के बीच स्कूल बसों को रोकना जोखिमभरा हो सकता है। मुमकिन है कि बसों को रोका जाए और पीछे से दूसरा वाहन तेज रफ्तार से बस से टकरा जाए। ऐसे में कार्रवाई ही विवादित हो जाएगी। ऐसे में पुलिस सिर्फ स्पीड गर्वनर के भरोसे है। राडार से दूसरे वाहनों पर कार्रवाई होगी लेकिन शहर में ज्यादातर प्रमुख मार्गों पर स्पीड लिमिट के बोर्ड हैं ही नहीं।


पालक ही रोक रहे हैं तेज रफ्तार बसें
- डीपीएस हादसे के बाद पूरे शहर में अंधगति से दौड़ती स्कूल बसों पर अंकुश लगाने के लिए पालक एकजुट हो गए। स्कूल बसों की गति 40 किमी प्रति घंटे से ज्यादा नहीं होनी चाहिए लेकिन फिर भी कई स्कूलों की बसें अभी भी 50 से ज्यादा की गति से दौड़ती पाईं जा रही हैं। कई पालकों ने ऐसी बसों का
- पीछा कर ड्राइवरों के सड़क पर ही लताड़ लगाई और इसका वीडियो वाइरल भी किए। सबसे ज्यादा खतरा उन स्कूलों के बच्चों को है, जिनकी बसें बायपास पर दौड़ रही हैं। इसे रोकने के लिए पुलिस प्रशासन के पास कोई पुख्ता प्लान नहीं है। अधिकारी इसका विकल्प तलाश रहे हैं।

किस सड़क पर वाहनों की क्या स्पीड लिमिट, किसी को नहीं है पता

- ट्रैफिक पुलिस ओवरस्पीडिंग की कार्रवाई करने जा रही है लेकिन शहर की सड़कों पर क्या स्पीड लिमिट है, यह ट्रैफिक के ही कई अधिकारियों को पता ही नहीं। शहर में प्रमुख सड़कों पर तो दूर रिंग रोड और एबी रोड पर भी स्पीड लिमिट के बोर्ड स्पष्ट रूप से नहीं लगे हैं।

- जहां बोर्ड लगे हैं वहां इसका पालन ही नहीं होता। उदाहरण बतौर व्हाइट चर्च से पीपल्याहाना के बीच स्पीड लिमिट 20 किमी प्रतिघंटे के बोर्ड लगे हैं लेकिन इस रूट पर आमतौर पर दोपहिया वाहन भी 40-50 की गति से चलते हैं।

बोर्ड लगाने के लिए निगम को चिट्‌ठी
- एबी रोड और रिंग रोड पर वाहनों की स्पीड लिमिट पूर्व के मान से चल रही है। जब इन सड़कों को हाईवे के रूप में लिया जाता था तब की 50-60 किमी प्रतिघंटे की स्पीड लिमिट तय थी।

- ट्रैफिक के अधिकारियों द्वारा नगर निगम को लगातार पत्राचार किया गया ताकि प्रमुख सड़कों पर स्पीड लिमिट तय कर उनके बोर्ड सड़कों पर लगाए जाएं।इससे कार्रवाई के लिए पुलिस के पास भी आधार होगा।

एक राडार और स्पीड गन की जरूरत
- ट्रैफिक पुलिस ने ओवरस्पीडिंग से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक और स्पीड राडार तथा एक स्पीड गन की मांग शासन से की है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। स्पीड राडार 8-9 लाख का होती है जबकि स्पीड गन 3 लाख में ही आ जाती है। दोनों में फर्क यह है कि राडार में प्रिंटेड रिसिप्ट मिलती है लेकिन स्पीड गन से रिसिप्ट नहीं मिलती।

अभी तो स्पीड गर्वनर से ही कर सकते हैं कंट्रोल

बायपास पर कार्रवाई के लिए क्या प्लान है?
-हम बायपास पर स्पीड राडार से कार्रवाई नहीं कर सकते, दुर्घटना का खतरा है।
तो स्कूल बसों को कैसे चेक करेंगे?
- अभी तो स्पीड गवर्नर से ही कंट्रोल किया जा सकता है, सभी स्कूलों में चेक कर रहे हैं।
बसें का बिना चेकिंग बायपास पर चलती रहेंगी?
- स्कूल बसों को बायपास की बजाए सर्विस रोड से भेजना ही विकल्प हो सकता है। स्कूल प्रबंधन से चर्चा की जा रही है।