--Advertisement--

22 राज्यों में ई-वॉलेट से पैसा चुरा रहे 11 हजार लोग, ऐसे देते हैं वारदात को अंजाम

गिरोह देश के 22 राज्यों के 53 बड़े वाट्सएप ग्रुप में सक्रिय है, जिनमें 11 हजार से ज्यादा सदस्य जुड़े हैं।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 05:56 AM IST

इंदौर. यदि आप मोबाइल पर ई-वॉलेट का उपयोग करते हैं तो सावधान! देशभर में ऐसे हजारों हैकर्स सक्रिय हो गए हैं जो फर्जी तरीके से आधार से लिंक्ड सिम का उपयोग कर आपके ई वॉलेट की क्लोनिंग कर रुपया उड़ा रहे हैं। ऐसे ही एक राष्ट्रीय स्तर के गिरोह के तीन सदस्यों को जिला सायबर सेल ने गिरफ्तार किया है। तीनों मिलकर 150 से ज्यादा ई-वाॅलेट हैक कर चुके हैं। गिरोह देश के 22 राज्यों के 53 बड़े वाट्सएप ग्रुप में सक्रिय है, जिनमें 11 हजार से ज्यादा सदस्य जुड़े हैं।

- जिला सायबर सेल एसपी जितेंद्र सिंह ने बताया 29 नवंबर 2017 को अमन पिता ओमप्रकाश अग्रवाल निवासी टेलीफोन नगर ने शिकायत की थी कि उनको फोन कर किसी ने उनके वॉलेट को हैक कर 2 हजार रुपए के बदले 2300 रुपए देने का लालच देकर 2 हजार रुपए निकाल लिए। जांच में पता चला कि पैसा दो अलग-अलग वॉलेट से होकर एक खाते तक पहुंचा था।

- उक्त वॉलेट फर्जी सिम से तैयार किए गए थे। उक्त वॉलेट से पहले रकम एक क्लोन्ड वॉलेट में ट्रांसफर की गई थी, जहां से वह एक अन्य वाॅलेट में ट्रांसफर होने के बाद बैंक खाते तक पहुंची। यह खाता सोहेल पिता गफूर पटेल (19) निवासी ग्राम पलवाड़ा (धार) का है।

- 14 साल का नाबालिग युवक निवासी कुरावर (राजगढ़) के पास ग्राम छापरी का रहने वाला है। एक अन्य आरोपी संदीप पिता जगदीश राठौर है। तीनों को कोर्ट में पेश कर आईटी एक्ट, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धारा में केस दर्ज किया है।

- आरोपी ई-वॉलेट्स की क्लोनिंग कर आम लोगों के आधार से लिंक्ड सिम पर क्लोन्ड पेमेंट वॉलेट बनाते हैं। ये गिरोह ‘खुद आराम करो पर अपने डेबिट कार्ड को काम पर लगाओ’ जैसे स्लोगन भेजकर लोगों को आकर्षित करता है।

तीन आरोपी, तीनों के अलग-अलग किरदार

संदीप पिता जगदीश राठौर :

- 20 साल का संदीप ग्राम खलेली, कुरावर जिला धार में रहता है। इसने सीहोर के इंस्टिट्यूट से डिप्लोमा इन कम्प्यूटर का कोर्स किया है। इसकी देवकृपा मोबाइल शॉप है। ये अपने यहां सिम खरीदने आने वाले ग्राहकों के फिंगर प्रिंट्स स्कैनर से अंगूठे के निशान लेकर एक सिम ग्राहक को चाही गई मोबाइल कंपनी की दे देता था।

- इसी दौरान यह अपनी कम्प्यूटर स्क्रीन पर अन्य कंपनियों के पोर्टल भी खोल लेता था, जो डेस्कटॉप पर मिनीमाइज रहते थे। ग्राहक को सिम देने के साथ ही उसके फिंगर प्रिंट का इस्तेमाल कर अन्य कंपनियों की सिम अपने लिए ग्राहक के आधार कार्ड व अंगूठे के निशन पर एक्टिवेट कर लेता था। यही सिम वह गिरोह के सदस्यों को 100 से 200 रुपए में बेच देता था।

नाबालिग आरोपी :

- आधार से लिंक्ड सिम 100 से 200 रुपए में खरीद कर प्ले स्टोर पर ‘फोन-पे’ के वॉलेट को हैक कर लोगों का पैसा अपनी फर्जी सिम से खोले गए वॉलेट में ट्रांसफर करवाता था। अब तक ‘फोन पे’ के 25-30 वाॅलेट हैक कर लोगों के हजारों रुपए ट्रांसफर कर चुका है।

सोहेल पिता गफूर पटेल :

- इसके पिता किसान हैं। इसका मुख्य काम दिनभर खेतों में बैठकर एप्पल और लेनोवो के महंगे मोबाइल से वॉलेट हैक करना था। अब तक 70 से ज्यादा वॉलेट हैक कर चुका है। हाइक मैसेंजर एप के प्रमोशन कोड को लेकर कई लोगों से 80 हजार से ज्यादा रुपया कमा चुका है।

सबसे ज्यादा क्लोनिंग ‘फोन-पे’ के वॉलेट्स की
- सर्वाधिक क्लोनिंग ‘फोन-पे’ के वॉलेट्स की ही करते हैं और क्लोन्ड पेमेंट वॉलेट बनाते हैं, क्योंकि इसी एप के वॉलेट में किसी का भी मोबाइल नंबर डाल दें तो रजिस्टर्ड होने के लिए उन्हें एक पिन नंबर की जरूरत पड़ती है जो 0 से 9 के बीच के अंक का होता है।

- ये अंक पाने के लिए ये आरोपी कुछ ऐसे भी एप्स का उपयोग करते हैं जिससे क्लोन्ड पेमेंट वॉलेट बनाए जाते हैं और फिर हिट एंड ट्रायल और अन्य तरीके से पिन का कॉम्बिनेशन बनाकर तत्काल किसी भी दूसरे व्यक्ति का वॉलेट क्लोन या हैक कर लेते हैं। ये फोन पे, पे टीएम, प्याजेप, अमेजॉन, फ्लिप कार्ट, स्वीगी आदि के ओटीपी उपलब्ध कराने व बेचने का भी दावा करते हैं।

- ये उबर-ओला कैब के डिस्काउंट के भी ओटीपी उपलब्ध करवाकर लाभ कमाने में लगे थे। पुलिस को फिलहाल ओटीपी लूट, ओटीपी की दुकान, अभा ओटीपी विक्रेता संघ, ओटीपी सेल 24 घंटे जैसे कुछ वाट्सएप ग्रुप के नाम पता चले हैं। 7 ग्रुप के एडमिन मध्यप्रदेश के हैं।