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उधार लेकर पढ़ाई जारी मुंहबोले मामा ने खर्च उठाकर मुंबई में टीवी शाे तक पहुंचाया

30 लोगों के भरे-पूरे परिवार में बचपन से ही सबको गाते-गुनगुनाते सुना। चाचा के सुर और रागों से लगाव हुआ।

Dainik Bhaskar

Dec 04, 2017, 07:10 AM IST
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खंडवा (इंदौर). 30 लोगों के भरे-पूरे परिवार में बचपन से ही सबको गाते-गुनगुनाते सुना। चाचा के सुर और रागों से लगाव हुआ। तो पापा की ढोलक की थाप ने संगीत से और गहराई तक जोड़ दिया।
चाचा से सुरों की बारीकियां सीख और घर में ही रियाज कर 10 साल का अायुष इस अंदाज में गाने लगा कि घर की चारदीवारी और गांव की सीमा लांघ कर वह किशोर दा की याद में होने वाले वाइस ऑफ खंडवा में विजेता रहा। यही नहीं वह टीवी शो वाइस इंडिया किड्स के दूसरे राउंड में भी कदम रख चुका है। यहां तक का सफर भी आसान नहीं रहा। परिवार की गरीबी आड़े आई।

- आयुष ने गणगौर उत्सव, रामायण मंडल और जागरण सहित अन्य कार्यक्रमों में गाया। इससे जो भी मिला उसे खुशी से स्वीकारा। उधार लेकर पढ़ाई जारी है। यही नहीं टीवी शो के लिए मुंबई तक के सफर और वहां की व्यवस्थाओं का खर्च भी मुंह बोले मामा विपिन राठौर ने उठाया।

- आयुष कहता है यह परेशानियां मुझे डिगा नहीं रही, बल्कि मेरे सुरों भरे हौसलों को और बुलंदियां दे रही हैं। मूंदी से पांच किमी दूर धारकवाड़ी के रहने वाले आयुष कलम राजपूत की आज गांव से मुंबई और टीवी शो के सहारे देश-विदेश में भी सुरीली पहचान है।

- 13 साल के आयुष ने तीन साल पहले ही चाचा मानसिंह कलम से संगीत की बारीकियां सीखना शुरू किया। फिलहाल वह मूंदी के स्कूल में कक्षा 8वीं का छात्र है। पिता अशोक सिंह कलम ने तंगहाली को कभी भी बेटे के सुरों भरे सफर के आड़े नहीं आने दिया। आयुष बताता है-पापा हमेशा कहते हैं तू आगे बढ़ता जा। चाहे जो परिस्थितियां बने, हम तेरे साथ हैं।

शो में मंच पर जय भानुशाली ने कहा- किशोर दा की नगरी से आए हैं
- आयुष ने बताया मैंने टीवी शो के मंच पर गाया तो हिमेश रेशमिया शान सहित सभी गुरुओं से सराहना मिली। मंच पर आते ही जय भानुशाली ने कहा- ये किशोर दा की नगरी से आए हैं। पलक मुछाल ने तो यहां तक कह दिया मेरा इंदौर और तुम्हारा खंडवा पास-पास है। तुम मेरी टीम में आ जाओ।

आसपास के गांवों से भी बधाई देने पहुंच रहे लोग
- टीवी शो के दूसरे राउंड में चयन और संगीत गुरु हिमेश रेशमिया की टीम में शामिल होने पर आयुष के गांव, स्कूल से लेकर आसपास के गांवों में भी खुशी का माहौल है। लोग उसको बधाई देने घर पहुंच रहे हैं। फोन पर भी शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है।

- मां चिंताबाई, छोटा भाई अमन सहित पूरा परिवार भी खुश है। आयुष ने बताया स्कूल के दोस्तों ने ही घर पहुंचकर मम्मी-पापा से कहा इसे आगे बढ़ने दो। मुंबई जाने के लिए झिरन्या निवासी मुंहबोले मामा विपिन राठौर को फोन किया। वे इसके लिए सहर्ष तैयार हो गए।

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