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बेटे की मौत के बाद ससुराल वालों ने बहू को पढ़ाया, अब देवर से होगी शादी

ससुर बोले, परंपरा के नाम पर बहू की जिंदगी दांव पर लगाना मंजूर नहीं।

Danik Bhaskar | Dec 11, 2017, 01:06 AM IST
बहू गायत्री के हसबैंड की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। बहू गायत्री के हसबैंड की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी।

नागदा (इंदौर). नागदा में एक जाट फैमिली ऐसी भी है जिसने बेटे की एक्सीडेंट में मौत के बाद बहू को घरने में ही रखने की बजाए उसे पढ़ने भेज दिया। अब बहू ग्रैजुएट हो गई है। ससुर ने अपने छोटे बेटे से बहू की शादी कराने का फैसला किया। यह परंपराओं को तोड़ने की ओर एक बड़ा फैसला था। हादसे में हो गई थी बड़े बेटे की मौत...

- जाट कम्युनिटी के राजेंद्र चौधरी ट्रांसपोर्ट बिजनेसमैन हैं। लगभग साढ़े पांच साल पहले 17 फरवरी 2012 को तीन बेटे में सबसे बड़े आईटी इंजीनियर सुमित का विवाह बखतगढ़ के जाट परिवार की गायत्री से किया था।

- 2 जून 2014 को सुमित की हादसे में मौत हो गई। पिता के सपने तो टूटे ही बहू और 7 माह की पोती धनवी के भविष्य पर भविष्य भी खो गया।

- बेटे को खोने के बाद भी राजेंद्र ने हिम्मत नहीं छोड़ी। बहू को गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन दिलाया।

- वह ग्रेजुएट बनकर कम्युनिटी के लिए प्रेरणा बनकर उभरी। अब छोटे बेटे हितेश से शादी करवाई।

रुढ़ियों में उलझता तो जिंदगी तबाह हो जाती
- गायत्री के ससुर राजेंद्र चौधरी ने बताया कि जाट कम्युनिटी में पति की मौत के 6 माह बाद तक बहू को परदे में रखने की प्रथा है। विधवा बहू को खाना-पीना भी अछूत समझकर दूर से परोसा जाता है, लेकिन मैं ऐसा कैसे होने देता। रुढ़ियों में उलझता तो बहू की जिंदगी तबाह हो जाती। परंपरा के नाम पर उसकी जिंदगी दांव पर लगााना मंजूर नहीं।

7 माह की पोती धनवी के फ्यूचर को देखते हुए अब बहू की शादी देवर से होगी। 7 माह की पोती धनवी के फ्यूचर को देखते हुए अब बहू की शादी देवर से होगी।
राजेंद्र चौधरी ट्रांसपोर्ट बिजनेसमैन हैं। राजेंद्र चौधरी ट्रांसपोर्ट बिजनेसमैन हैं।
पोती धनवी। पोती धनवी।