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धमाकों की आवाज से सहम गए थे मासूम, पार्क में खेलते वक्त हुआ था ये हादसा

पुलिस की डीआरपी लाइन में कुछ दिनों पहले पार्क में खेल रहे बच्चों के बीच पुलिस का आंसू गैस का गोला आ गिरा और फट गया।

Dainik Bhaskar

Feb 28, 2018, 11:52 PM IST
दोनों बच्चे घर के पास बने गार्डन में खेल रहे थे। दोनों बच्चे घर के पास बने गार्डन में खेल रहे थे।

इंदौर(मध्यप्रदेश). इंदौर पुलिस की डीआरपी लाइन में कुछ दिनों पहले पार्क में खेल रहे बच्चों के बीच पुलिस का आंसू गैस का गोला आ गिरा और फट गया। इसकी चपेट में 5 और 10 साल के भाई बहन आ गए। आंसू गैस की तीखी जलन की वजह से बच्चों की हालत बहुत बिगड़ गई। वे रोते-बिलखते रहे और उन्हें परिवार के लोग हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। दोनों की एमएलसी भी हुई लेकिन गोला पुलिस का था तो कार्रवाई नहीं हुई। बच्चों के पैरेंट्स भी पुलिस में हैं, उन्होंने आला अफसरों को भी शिकायत की लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। क्या है मामला..

- घटना 23 फरवरी की सुबह 10 से 11 बजे के बीच की हैै लेकिन इसे कही उजागर नहीं होने दिया गया। भास्कर ने पड़ताल की तो खुलासा हुआ 5 वर्षीय गतिक 10 साल बड़ी बहन त्रिषा के साथ डीआरपी लाइन्स में बने क्वार्टस के पास गार्डन में खेल रहा था।

- उनके साथ अन्य बच्चे भी थे। इसी बीच गतिक और त्रिषा के बीच अश्रु गैस का गोला आ गिरा। गोला फटा और गैस त्रिषा के पैर में लगी। दोनों भाई-बहन गैस में घिर गए। दूसरेे बच्चे थोड़ी दूर थे तो वे दौड़कर भागे। घटना देख पास में ही खड़े बच्चों के मामा सौरव दौड़कर पहुंचे। इस दौरान शोर-शराबा मचने पर बच्चों के मां-पिता भी आ गए।

दोनों को छह घंटे रखा आॅर्ब्जवेशन में
- बच्चों को एमवाय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी एमएलसी भी की और मामला जांच के िलए एमजी रोड पुलिस को सौंपा गया। बच्चों के पैरेंट्स पुलिस में है, जिन्होंने गैस के प्रभाव को कम करने के लिए बच्चों के चेहरे पर और घाव पर पानी डाल दिया था। डॉक्टरों ने बच्चों को छह घंटे ऑब्जर्वेशन में रखा।

धमाकों की आवाज से सहम गए थे बच्चे
- मामा सौरव ने बताया डीआरपी लाइन के ग्राउंड में पुलिस बलवा ड्रिल कर रही थी, वहीं से लापरवाही से फेंका गया गोला बच्चों के पार्क में आ गिरा। पुलिस ने इतने सारे गोलों का उपयोग किया कि धमाकों की आवाज से बच्चे सहम गए। रोते-रोते बच्चे कह रहे थे कि यहां उन्हें अब नहीं रहना।

कहीं नहीं हो पा रही है परिजनों की सुनवाई
- इस प्रकार की लापरवाही की घटना भारतीय दंड विद्यान की धारा 285 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है। यदि उक्त स्मोक सेल बच्चों के समीप न गिरते हुए सीधे उनके ऊपर आकर लगता तो अधिक बड़ा हादसा हो सकता था। रहवासी क्षेत्र में इस प्रकार से घटना घटित होना अत्यंत संवेदनशील है। बच्चों के परिजन ने इसकी शिकायत आला अधिकारियों को की लेकिन जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कॉर्निया क्षतिग्रस्त हो सकता था बच्चों का
- भास्कर ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय गोकुलदास से बात की। उन्होंने बताया अश्रु गैस में इतने घातक कैमिकल होते हैं कि एक व्यस्क व्यक्ति भी जब इसके प्रभाव में आता है तो तेज असहनीय जलन होती है। पुलिस इसे दंगाइयों पर ही इस्तेमाल करती है।

- 5 साल के मासूम बच्चे की नाजुक कोशिकाओं को ज्यादा गहरा असर पड़ सकता था। इस कैमिकल से कॉर्निया भी डेमेज हो सकता था। गैस में मौजूद कैमिकल आंखों के संपर्क में आते ही अंदर के हिस्स में छाले बना देते हैं, जिसके कारण ही तेज दर्द और आंसू निकलते हैं।


गतिक और त्रिषा के बीच अश्रु गैस का गोला आ गिरा। गतिक और त्रिषा के बीच अश्रु गैस का गोला आ गिरा।
पार्क यहां हुआ था हादसा। पार्क यहां हुआ था हादसा।
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दोनों बच्चे घर के पास बने गार्डन में खेल रहे थे।दोनों बच्चे घर के पास बने गार्डन में खेल रहे थे।
गतिक और त्रिषा के बीच अश्रु गैस का गोला आ गिरा।गतिक और त्रिषा के बीच अश्रु गैस का गोला आ गिरा।
पार्क यहां हुआ था हादसा।पार्क यहां हुआ था हादसा।
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