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बंजर पहाड़ी पर 10 साल पहले लगाए थे दस हजार पौधे, अब बन चुके हैं पेड़

नगर के पास स्थित छोटी खरगोन के रहने वाले एक बुजुर्ग ने वह काम कर दिखाया, जो प्रशासन नहीं कर सका।

Dainik Bhaskar

Dec 27, 2017, 06:27 AM IST
खरगोन के रहने वाले बद्री केशाजी बर्फा की दिनचर्या में पेड़ों की सुरक्षा और सेवा करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। खरगोन के रहने वाले बद्री केशाजी बर्फा की दिनचर्या में पेड़ों की सुरक्षा और सेवा करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।

बड़वानी (इंदौर). नगर के पास स्थित छोटी खरगोन के रहने वाले एक बुजुर्ग ने वह काम कर दिखाया, जो प्रशासन नहीं कर सका। इस बुजुर्ग ने गांव के पास स्थित बंजर पहाड़ी पर 10 साल पहले 10 हजार पौधे लगाए थे, जो अब पेड़ बन चुके हैं। पौधों को सींचने के लिए स्वयं के खर्चे पर तालाब बनवाया, कुआं खुदवाया लेकिन दोनों में पानी की कमी रही। फिर बुजुर्ग ने पानी की टंकी बनवाई और इसके माध्यम से पौधों की सिंचाई कर उन्हें पेड़ का रूप दिया। हम बात कर रहे हैं गांव के बुजुर्ग बद्री बर्फा की। जिन्हें लोग अब ग्रीनमैन के नाम से जानते हैं।

- छोटी खरगोन के रहने वाले बद्री केशाजी बर्फा की दिनचर्या में पेड़ों की सुरक्षा और सेवा करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। बद्री बर्फा ने बताया 10 साल पहले गायत्री परिवार के मेवालाल पाटीदार ने गो ग्राम तीर्थ यात्रा के दौरान पेड़ लगाने का संदेश दिया था। इससे मन प्रभावित हो गया।

- उनकी प्रेरणा के बाद 10 एकड़ की बंजर पहाड़ी पर 10 हजार से अधिक नीम, आंवला, बोर, सागौन व त्रिवेणी के पौधे लगाए। गर्मी के दिनों में पौधों को सुखता देख स्वयं के खर्च पर छोटी सी तलाई का निर्माण भी किया लेकिन पानी ज्यादा समय नहीं रहा।

- इसके बाद एक कुआं खोदा पानी निकलने के बाद यहां पर बिजली के पोल 1 हजार फीट से अधिक दूरी पर होने के कारण बिजली नहीं आ पाई। अपने दूसरे खेत से करीब 500 फीट तार बिछाकर पानी की मोटर कुएं में डाली लेकिन 500 मीटर ऊंची पहाड़ी होने के कारण पानी ऊपर तक नहीं पहुंचा।

- फिर 2 लाख रुपए खर्च कर सीमेंट की टंकी बनवाई और पौधों को पानी दिया। बुजुर्ग का पर्यावरण के प्रति प्रेम देखकर तत्कालीन एसडीएम नीलकंठ टिकाम ने निरीक्षण कर इन्हें पौधों की सुरक्षा का अधिकार पत्र दिया।

विपरीत परिस्थितियों में भी नहीं मानी हार
- बद्री पहले पौधों तक पानी पहुंचाने के लिए परेशान हुए और विपरीत परिस्थितियों को मात देते हुए पौधों तक पानी पहुंचाया। इस परेशानी के कुछ दिन बाद पत्नी का निधन उसी पहाड़ी पर हो गया। इसके बाद से बद्री ने संकल्प लिया की अब पौधों को पेड़ बनाकर ही दम लेंगे और इनका ये संकल्प पूरा हो गया। बद्री का हौंसला बढ़ाने के लिए बेटों ने भी सहयोग दिया।

इसी पहाड़ी पर शासन ने 40 हेक्टेयर में लगाए थे पौधे, 70 फीसदी सूख चुके
- गांव के प्रेमलाल पंवार नेे बताया शासन ने इसी पहाड़ी पर 40 हेक्टेयर में पौधे लगाए थे, जो देखरेख के अभाव में सूख चुके हैं। उन्होंने बताया 70 फीसदी से ज्यादा पौधे सूख चुके हैं। बद्री ने इसी पहाड़ी पर लगाए पौधों को पेड़ बना दिया है।

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खरगोन के रहने वाले बद्री केशाजी बर्फा की दिनचर्या में पेड़ों की सुरक्षा और सेवा करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।खरगोन के रहने वाले बद्री केशाजी बर्फा की दिनचर्या में पेड़ों की सुरक्षा और सेवा करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है।
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