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घोटाले के पैसों से भरे राजस्थान की शराब दुकानों के लिए टेंडर, ऐसे किया घोटाला

इंदौर पुलिस ने उदयपुर स्थित उसके घर पर की दो घंटे सर्चिंग, पासपोर्ट भी किया जब्त।

Dainik Bhaskar

Dec 17, 2017, 07:47 AM IST
यह है उदयपुर में अंश की आलीशान हवेली यह है उदयपुर में अंश की आलीशान हवेली

इंदौर। 41 करोड़ से ज्यादा के एक्साइज घोटाले में गिरफ्तार एटीएम ग्रुप के डायरेक्टर अंश त्रिवेदी के उदयपुर में प्रियदर्शिनी नगर स्थित मकान नंबर 110 और नवरत्न काॅम्प्लेक्स के ऑफिस में इंदौर पुलिस ने करीब दो घंटे सर्चिंग की। उसके घर से राजस्थान में नए वित्तीय वर्ष (2018-19) के लिए शराब दुकानों के कई टेंडर फाॅर्म एग्रीमेंट मिले हैं। मप्र की भी कई दुकानों के एग्रीमेंट मिले हैं।

घोटाले के पैसों को ऐसे लगाया ठिकाने

- जानकारी के मुताबिक इंदौर में किए घोटाले के रुपयों से राजस्थान की प्रमुख दुकानों के ठेके के लिए टेंंडर फाॅर्म भरे हैं। इसमें आरोपी राजू दशवंत को भी कुछ दुकानों में पार्टनर बनाया है। पुलिस ने अंश का पासपोर्ट भी जब्त किया है। उसका आईसीआईसीआई बैंक उदयपुर का एक और खाता मिला है।

- रावजी बाजार थाने के इंचार्ज एसआई प्रतीक शर्मा ने बताया कि अंश के घर से जो दस्तावेज मिले हैं, उसमें बीते वित्तीय वर्ष में अधिकांश में अंश ने अपने नौकरों के नाम पर ही ठेके ले रखे हैं। वहीं जिन लोगों ने टेंडर में लॉटरी सिस्टम से ठेके हासिल किए हैं।

- एटीएम ग्रुप ने अपने रसूख का इस्तेमाल दिखाकर ठेकेदारों के साथ पार्टनशिप कर रखी है। लगभग पूरे राजस्थान की हर प्रमुख दुकान में एटीएम ग्रुप की पार्टनरशिप है। इधर इंदौर की एक्सिस बैंक में मिले खाते की जानकारी पुलिस को सोमवार को मिलेगी।

दस्तावेजों में नौकरों के नाम से ठेके की पुष्टि
- रावजी बाजार पुलिस को यह भी पता चला है कि घोटाला उजागर होने के बाद आबकारी अधिकारियों ने राजू दशवंत को हिरासत में लिया था। जब उसका वीडियो वायरल हुआ तो घबराकर आबकारी विभाग के एसआई उमेश स्वर्णकार हेड कांस्टेबल बालमुकुंद गौड़ उसे कोर्ट के बाहर छोड़ भागे थे।

- वे पुलिस को सूचना देते तो पुलिस कोर्ट के बाहर से तीन माह पहले ही राजू को गिरफ्तार कर लेती। यह भी पता चला है एसआई स्वर्णकार ने कुछ दिन पूर्व टारगेट पूरा करने और अफसरों को अपनी कार्रवाई दिखाने के लिए दोस्त की शादी में आए एक युवक को छह बॉटल शराब के साथ पकड़ा था और बाद में उस पर 60 लीटर का केस लगाकर उसे जेल भेज दिया था।

- बड़वाह में भी स्वर्णकार पर कई संगीन आरोप लग चुके हैं तो गौतम का भी रिकॉर्ड अच्छा नहीं है। पूर्व आबकारी कमिश्नर ने नोटिस देकर ट्रांसफर के आदेश दिए थे, लेकिन जोड़तोड़ कर उन्हें रिलीव ही नहीं किया गया। ये घोटाले में फरार आरोपी कन्हैयालाल दांगी के भी संपर्क में रहे हैं।



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