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आज हाेगा एमवाय अस्पताल में पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट

5 करोड़ रुपए की लागत से एमवाय अस्पताल में तैयार की गई है विशेष ऑपरेशन यूनिट।

Dainik Bhaskar

Mar 03, 2018, 10:45 AM IST
The first bone marrow transplant in today Haiga MAV hospital

इंदौर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदौर के एमवायएच में पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट ऑपरेशन शनिवार को किया गया। गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टर राहुल भार्गव की टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। गाैरतलब है कि लगभग 5 करोड़ के खर्च से तैयार इस बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट का शुभारंभ कुछ दिनों पहले ही प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया था।

- एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉक्टर शरद थोरा के अनुसार प्रदेश में किसी भी सरकारी अस्पताल में होने वाला यह पहला बोन मैरो ट्रांसप्लांट ऑपरेशन है। जिस मरीज को इस ऑपरेशन के लिए चुना गया है उसका उपचार पिछले कुछ दिनों से शासकीय कैंसर अस्पताल में किया जा रहा था।

- 35 साल के जिस मरीज का ऑपरेशन किया गया है वह पिछले तीन साल से मल्टीपल मायलोमा नामक बीमारी से पीड़ित है। इस मरीज को उसका ही बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया गया है। ऑपरेशन के बाद एक माह मरीज को बीएमटी यूनिट में ही डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा।

- एमवाय अस्पताल प्रबंधन के अनुसार बोन मैरो ट्रांसप्लांट का दूसरा ऑपरेशन 40 वर्षीय महिला का किया जाएगा। नीमच की रहने वाली यह माहिला पिछले 6 माह से कैंसर अस्पताल में उपचार करवा रही है।

25 लाख तक होता है खर्च

बोन मैरो ट्रांसप्लांट ऑपरेशन करवाने के लिए देश के प्रायवेट अस्पतालों में 20 से 25 लाख रुपए का खर्चा आता है। लेकिन एमवाय अस्पताल में यह ऑपरेशन 4 से 5 लाख रुपए में ही हो जाएगा। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों के लिए यह ऑपरेशन पूरी तरह से नि:शुल्क रहेगा।

150 बच्चों का रजिस्ट्रेशन

एमवाय अस्पताल प्रबंधन के अनुसार बीएमटी ऑपरेशन के लिए 150 बच्चों का रजिस्ट्रेशन किया जा चुका है। बीएमटी यूनिट में दो व्यस्कों का सफल ऑपरेशन होने के लगभग एक माह के बाद थेलैसीमिया पीड़ित बच्चों का ऑपरेशन प्रारंभ किया जाएगा।

क्या है बोन मैरो
बोन मैरो मनुष्य की हड्डियों के अंदर भरा हुआ एक मुलायम टिशू होता है। जहां से रक्त का उत्पादन होता है। एक व्यस्क के शरीर में बोन मैरो का भार लगभग 2.6 किलोग्राम होता है। बोन मैरो रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करने वाली स्टेम कोशिकाओं से भरी रहती है जो लाल, सफेद कोशिकाओं और प्लेटलेट्स को विकसित करती है।

ऐसे होता है ट्रांसप्लांट
बोन मैरो ट्रांस्प्लांट के लिए सबसे पहले डोनर के गाल के अदरुनी हिस्से से सॉफ्ट टिश्यू निकाला जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह का कोई दर्द नहीं होता है। स्टेम सेल्स का उचित मिलान होने पर डोनर का पूरा मेडिकल चेकअप किया जाता है और उस मेडिकल चेकअप के द्वारा उससे जुड़ी पूरी जानकारी दी जाती है। इसके बाद डोनर की हड्डी में बिना छेद किए परिधीय रक्त को स्टेम सेल्स की मदद से निकाला जाता है। डोनर को 4 से 5 दिन के लिए पीसीएस थैरेपी दी जाती है। ऐसा करने से बोन मेरो में जरूरत से अधिक स्टेम कोशिकाओं का उत्पादन होने लगता है। यह सारी थैरपी सुपरवाइजर की देखरेख में ही होती है। इस प्रक्रिया में लगभग 4 से 8 घंटे लगते हैं।

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The first bone marrow transplant in today Haiga MAV hospital
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