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भू-राजस्व संहिता की धारा 60 में प्रावधान, प्रदेश में पहली बार यहां होगा उपयोग

इंदौर में ब्रिज से सिंधी कॉलोनी वाला एरिया, पीपल्याहाना तालाब के सामने की पट्टी सहित कई एरिया आबादी वाले चिन्हित हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 30, 2017, 06:49 AM IST
The provisions of section 60 of the Land Revenue Code

इंदौर . इंदौर नगरीय क्षेत्र और देपालपुर, राऊ, सांवेर, महू व हातोद नगरीय निकाय एरिया में यदि किसी आबादी उपयोग के लिए चिन्हित जमीन का व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग किया जा रहा है, तो जिला प्रशासन अब इन सभी के लिए सालाना लीज दर वसूलेगा। शहर की बात करें तो एमजी रोड, कोठारी मार्केट, रेसकोर्स रोड, जूनी इंदौर में ब्रिज से सिंधी कॉलोनी वाला एरिया, पीपल्याहाना तालाब के सामने की पट्टी सहित कई एरिया आबादी वाले चिन्हित हैं, जो इस दायरे में आएंगे।

- दरअसल इसके लिए भू राजस्व संहिता की धारा 60 के तहत कलेक्टर को अधिकार हैं, जिसका पहली बार उपयोग किया जा रहा है। कलेक्टर निशांत वरवड़े ने इस संबंध में अपर कलेक्टर कैलाश वानखेड़े को नोडल अधिकारी बनाकर उन्हें अधिकार दे दिए हैं। सभी एसडीएम को आदेश जारी कर दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र में उन सभी सर्वे नंबरों की जांच करें, जिनका कॉलम तीन में आबादी उपयोग चिन्हित है और वह उसका व्यावसायिक उपयोग भी कर रहे हैं।

- यदि किसी सर्वे नंबर का आबादी एरिया उपयोग चिन्हित होता है तो उसका डायवर्शन नहीं होता है, जिसके चलते प्रशासन को जमीन का आबादी के अलावा उपयोग होने पर भी राजस्व नहीं मिलता है। यदि भू-स्वामी ने किसी तरह व्यावसायिक डायवर्शन करा लिया है, तो उन्हें अलग से लीज दर नहीं देना होगी, क्योंकि वह डायवर्शन टैक्स दे रहे हैं।

जमीन की कीमत की 0.4% होगी लीज दर

- प्रशासन आबादी से भिन्न व्यावसायिक उपयोग पर वनटाइम लीज प्रीमियम जमीन की कीमत का दो फीसदी ले सकता है। सालाना लीज दर जमीन की कीमत का 0.4 फीसदी तय हो जाएगा। प्रशासन चाहे तो अलग उपयोग करने पर भू-स्वामी पर जमीन की कीमत की अधिकतम 20 फीसदी पेनल्टी भी लगा सकता है।

- हालांकि प्रशासन का उद्देश्य पेनल्टी का नहीं है, वह चाहता है कि सलाना लीज दर तय होकर राजस्व का स्रोत तय हो जाए। जैसे कि जमीन की कीमत एक करोड़ रुपए है तो दो फीसदी के हिसाब से दो लाख रुपए वनटाइम प्रीमियम देय होगी और 40 हजार रुपए सालाना लीज दर हो जाएगी।

आबादी जमीन पर होटल, मॉल, अस्पताल, स्कूल वालों से लेंगे राजस्व
- इस संबंध में कलेक्टर निशांत वरवड़े का कहना है राजस्व संहिता में ही यह नियम है, यह राजस्व बढ़ाने के लिए ब्रह्मास्त्र है। संभवत: प्रदेश में पहली बार इसका उपयोग हो रहा है। इसमें छोटी दुकान, पार्लर आदि चलाने वालों को नहीं पूछेंगे लेकिन जिनकी आबादी जमीन पर मॉल्स, अस्पताल, स्कूल, होटल, रेस्टाेरेंट, पब जैसी गतिविधियां संचालित हैं, उनसे राजस्व लिया जाएगा।

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The provisions of section 60 of the Land Revenue Code
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