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ये हैं शहर के असली हीरो, जिन्होंने बच्चों समय पर हॉस्पिटल बचाई बच्चों की जान

इन्हीं के साथ अस्पताल का वह स्टाफ भी सराहनीय है जिसने रातभर जी-जान लगाकर मदद की।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 08, 2018, 05:02 AM IST

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    इंदौर.ये हैं शहर के असली हीरो, जिन्होंने डीपीएस बस हादसे में लहूलुहान बच्चों को देख पलभर की देर भी नहीं की और एम्बुलेंस किसी मदद के इंतजार के बजाय खुद ही तत्काल घायल बच्चों को अस्पताल पहुंचाया। इन्हीं के साथ अस्पताल का वह स्टाफ भी सराहनीय है जिसने रातभर जी-जान लगाकर मदद की। नहीं किया एम्बुलेंस का इंतजार, खुद ही ले गए...

    - हादसा हुआ तब अहिल्यापुरी के रहने वाले आलोक मूंदड़ा देवास की ओर जा रहे थे।

    - उनकी बच्ची भी डीपीएस में ही पढ़ती है। जाम लगा देख वे रांग साइड से पहुंचे।

    - उन्होंने आसपास के लोगों की मदद से पांच बच्चों को अपनी गाड़ी में बैठाया अौर तुरंत बॉम्बे हॉस्पिटल लेकर पहुंचे।

    - वे तब तक अस्पताल में ही रुके रहे जब तक कि बच्चों के माता-पिता नहीं पहुंच गए।

    सरिये और पतरों में फंसे बच्चों को निकाला, भेजा अस्पताल

    - ब्रिज के पास ही पंक्चर बनाने वाले गोवर्धन सोनारे हादसा होते ही दोस्त पप्पू और इंदर के साथ ब्रिज की ओर दौड़े। बच्चे रो रहे थे।

    - मम्मी-पापा की आवाजें आ रही थीं। तीनों तुरंत बस के अंदर गए तो देखा कि बच्चे फंसे हुए हैं। लोहे के सरिए मुड़ गए थे।

    - पतरों के बीच बच्चे फंसे थे। जैसे-तैसे बच्चों को निकाला और दूसरी बस से अस्पताल रवाना किया।

    रातभर अस्पताल में रुके ताकि सभी को मिले मदद

    - बॉम्बे अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल पाराशर ने सूचना मिलते ही तीन एम्बुलेंस रवाना की।

    - हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष लडानिया, डॉ. राशिद हसन को आईसीयू में बुलवाया।

    - सभी डॉक्टरों को अलर्ट किया कि वे रात को भी घर नहीं जाएं।

    - एसपी ने पूरे अस्पताल में स्टाफ को अलर्ट किया। टीम केे साथ दोनों रात को भी जुटे रहे।

    हादसे की सूचना मिलते ही आईसीयू में तैयार किए बेड

    - आईसीयू इंचार्ज डॉ. संतोष आहूजा आईसीयू में बेड की व्यवस्था में जुट गए। तुरंत आसपास के वार्डों से स्टाफ को बुलवाया। व्यवस्था देख ही रहे थे कि पांच मिनट में घायल बच्चे पहुंच गए।

    - एसपी डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने नर्सिंग कॉलेज की कक्षाएं रद्द कर स्टाफ को आईसीयू में बुलवाया। 5 बजे खत्म होने वाली कक्षा 4 बजे ही खत्म की गई। सारा नर्सिंग स्टाफ आईसीयू में पहुंचा।

    बच्चों को ध्यान से उतारा ताकि फ्रैक्चर न बढ़े

    - मार्केटिंग ऑफिसर सलीम खान तुरंत हाउस कीपिंग के पंकज और परमानंद के साथ बाहर खड़े हो गए।

    - बच्चों को गोद में लेकर स्ट्रेचर तक ले गए। हाथ और कपड़े खून से लथपथ हो गए। बस में अंदर जाने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा था।

    - सलीम बस में गए और बच्चों को सावधानीपूर्वक कमर से घसीटते हुए स्ट्रैचर तक लाए ताकि हड्डी को नुकसान नहीं हो।

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    सरिये और पतरों में फंसे बच्चों को निकाला, भेजा अस्पताल

    सरिये और पतरों में फंसे बच्चों को निकाला, भेजा अस्पताल

    ब्रिज के पास ही पंक्चर बनाने वाले गोवर्धन सोनारे हादसा होते ही दोस्त पप्पू और इंदर के साथ ब्रिज की ओर दौड़े। बच्चे रो रहे थे। मम्मी-पापा की आवाजें आ रही थीं। तीनों तुरंत बस के अंदर गए तो देखा कि बच्चे फंसे हुए हैं। लोहे के सरिए मुड़ गए थे। पतरों के बीच बच्चे फंसे थे। जैसे-तैसे बच्चों को निकाला और दूसरी बस से अस्पताल रवाना किया।

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    रातभर अस्पताल में रुके ताकि सभी को मिले मदद

    रातभर अस्पताल में रुके ताकि सभी को मिले मदद

    बॉम्बे अस्पताल के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल पाराशर ने सूचना मिलते ही तीन एम्बुलेंस रवाना की। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीष लडानिया, डॉ. राशिद हसन को आईसीयू में बुलवाया। सभी डॉक्टरों को अलर्ट किया कि वे रात को भी घर नहीं जाएं। अधीक्षक डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने पूरे अस्पताल में स्टाफ को अलर्ट किया। टीम केे साथ दोनों रात को भी जुटे रहे।

  • ये हैं शहर के असली हीरो, जिन्होंने बच्चों समय पर हॉस्पिटल बचाई बच्चों की जान
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    आईसीयू इंचार्ज डॉ. संतोष आहूजा आईसीयू में बेड की व्यवस्था में जुट गए। तुरंत आसपास के वार्डों से स्टाफ को बुलवाया। व्यवस्था देख ही रहे थे कि पांच मिनट में घायल बच्चे पहुंच गए। अधीक्षक डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने नर्सिंग कॉलेज की कक्षाएं रद्द कर स्टाफ को आईसीयू में बुलवाया। 5 बजे खत्म होने वाली कक्षा 4 बजे ही खत्म की गई। सारा नर्सिंग स्टाफ आईसीयू में पहुंचा।

    हादसे की सूचना मिलते ही आईसीयू में तैयार किए बेड

    आईसीयू इंचार्ज डॉ. संतोष आहूजा आईसीयू में बेड की व्यवस्था में जुट गए। तुरंत आसपास के वार्डों से स्टाफ को बुलवाया। व्यवस्था देख ही रहे थे कि पांच मिनट में घायल बच्चे पहुंच गए। अधीक्षक डॉ. दिलीप सिंह चौहान ने नर्सिंग कॉलेज की कक्षाएं रद्द कर स्टाफ को आईसीयू में बुलवाया। 5 बजे खत्म होने वाली कक्षा 4 बजे ही खत्म की गई। सारा नर्सिंग स्टाफ आईसीयू में पहुंचा।

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    बच्चों को ध्यान से उतारा ताकि फ्रैक्चर न बढ़े।

    बच्चों को ध्यान से उतारा ताकि फ्रैक्चर न बढ़े

    मार्केटिंग ऑफिसर सलीम खान तुरंत हाउस कीपिंग के पंकज और परमानंद के साथ बाहर खड़े हो गए। बच्चों को गोद में लेकर स्ट्रेचर तक ले गए। हाथ और कपड़े खून से लथपथ हो गए। बस में अंदर जाने की हिम्मत कोई नहीं कर पा रहा था। सलीम बस में गए और बच्चों को सावधानीपूर्वक कमर से घसीटते हुए स्ट्रैचर तक लाए ताकि हड्डी को नुकसान नहीं हो।

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Web Title: The Real Heroes Of The City, Who Save The Life Of Innocent Child
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