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खजराना गणेश, महाकाल, मैहर मंदिर RTI के दायरे में, भक्त जान सकेंगे जानकारी

मंदिर में दान में मिलने वाली राशि का क्या उपयोग हो रहा है, अब यह भक्त जान सकेंगे।

Dainik Bhaskar

Dec 13, 2017, 06:42 AM IST
the realm of RTI, devotees will be able to know

इंदौर . खजराना गणेश, महाकाल और मैहर वाली माताजी के मंदिर में दान में मिलने वाली राशि का क्या उपयोग हो रहा है, अब यह भक्त जान सकेंगे। दरअसल, राज्य सूचना आयोग ने खजराना गणेश मंदिर के संबंध में लगी याचिका पर सुनवाई करते हुए आदेश दिया है कि जिस मंदिर में भी शासन के आदेश या नियम से समिति बनाई जाती है और जिसे शासन द्वारा नियुक्त अधिकारी, कर्मचारी या सदस्य नियंत्रित करते हैं, वह सभी लोक प्राधिकारी की श्रेणी में आते हैं। इस कारण ये सभी मंदिर सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई एक्ट) के दायरे में आते हैं। राज्य सूचना आयुक्त हीरालाल त्रिवेदी ने आदेश में यह भी लिखा है कि मप्र सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर मंदिर व्यवस्थापक व देखभाल का काम संबंधित संभागायुक्त होते हैं। इसलिए वह अपने जिले में आने वाले ऐसे मंदिरों में लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति करें।

खजराना गणेश मंदिर पर लगी याचिका से आया आदेश
- इंदौर निवासी विनय सैनी ने खजराना गणेश मंदिर में दान में आई राशि, आभूषण, खर्च, मंदिर के पुजारियों को दिए जाने वाले दान आदि की जानकारी आरटीआई एक्ट के तहत मांगी थी, लेकिन मंदिर प्रशासन ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया था कि वह शासन से कोई वित्त, अनुदान नहीं लेते हैं। इसलिए आरटीआई के दायरे में नहीं आते हैं। तत्कालीन कलेक्टर पी. नरहरि ने भी यही तर्क देते हुए अपील खारिज कर दी थी। इंदौर के ही अभिषेक सिंह सिसौदिया ने इस मामले में राज्य सूचना आयोग में अपील की थी। आयोग ने मंदिर प्रबंधन को आवेदक को सभी जानकारी देने का आदेश दिया।

खजराना मंदिर में ढाई करोड़ रुपए दान आता है हर साल
- खजराना गणेश मंदिर में हर साल ढाई करोड़ की दान राशि आती है। इसी दान राशि से यहां 19 करोड़ रुपए के विकास काम हो चुके हैं। अब भी 15 करोड़ के विकास कार्य जिसमें वृद्धाश्रम, संस्कृत पाठशाला, यज्ञशाला का निर्माण आदि चल रहे हैं। सर्वाधिक गणेश भक्त आने वाले मंदिर के रूप में इसे हाल ही में वर्ल्ड बुक ऑफ रिकाॅर्ड में शामिल किया गया है।

मंदिर समितियों की जानकारी कलेक्टर से मांगी है
- सूचना आयोग का आदेश आया है और संभाग के सभी कलेक्टरों से जानकारी मांगी है कि कहां पर समितियां गठित है। उन जगहों पर लोक सूचना अधिकारी नियुक्त करेंगे।- संजय दुबे, कमिश्नर इंदौर

18 हजार मंदिरों में से एक्ट के हिसाब से सिर्फ तीन होते हैं संचालित

- एक्ट के हिसाब से प्रदेश में सिर्फ तीन मंदिर संचालित होते हैं। 1982 के एक्ट से महाकालेश्वर मंदिर, 2002 के एक्ट से मैहर मंदिर और 2005 के एक्ट से खजराना गणेश मंदिर संचालित होता है। हालांकि प्रदेश में 18 हजार से ज्यादा मंदिर हैं, जिनमें राजस्व रिकाॅर्ड में कलेक्टर को व्यवस्थापक नियुक्त किया गया है।

- ओंकारेश्वर, चित्रकूट और पांच अन्य प्रमुख मंदिरों के एक्ट का ड्राफ्ट तैयार है। साथ ही कई प्रमुख मंदिर हैं , जहां व्यवस्थित संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर समितियां गठित हैं और इनमें सरकारी अधिकारी नियुक्त है। इस आदेश से वह भी दायरे में आएंगे या नहीं, इसे लेकर अभी असमंजस है। धर्मस्व विभाग के अधिकारी इसका अध्ययन कर रहे हैं।

- कमिश्नर और कलेक्टर ने जिन मंदिरों में प्रबंधन समितियां बनाई हैं, वे भी दायरे में आएंगे। पशुपतिनाथ मंदिर, बगलामुखी मंदिर सहित उज्जैन के कुछ मंदिर इसमें आते हैं।
हीरालाल त्रिवेदी, सूचना आयुक्त

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