Home | Madhya Pradesh | Indore | News | this community call child to women witch

यहां बेटी पैदा हो तो कहते हैं- डायन आ गई, शादी की बात पर तुड़वा देते हैं रिश्ता

कभी डायन घोषित किया था, कई पीढ़ियों बाद भी खत्म नहीं हुआ दंश, ये कलंक किसने और क्यों लगाया.... कोई नहीं जानता।

कपिल भटनागर/बहादुरसिंह चौहान| Last Modified - Dec 14, 2017, 01:50 AM IST

1 of
this community call child to women witch
50 वर्षीय मनोरमा पाटीदार।

इंदौर/भोपाल. मध्यप्रदेश के शाजापुर और राजगढ़ जिले के 12 गांव। यहां का एक कम्युनिटी और उनमें दो सौ से ज्यादा  महिलाएं-बच्चियां डायन है। ये लांछन चार पीढ़ियों से लगाया जा रहा है। बात अब इसलिए उठी, क्योंकि पढ़ी-लिखी बेटियां इस धब्बे को स्वीकार नहीं कर रही हैं। उनकी शिकायत के बाद डिप्टी कलेक्टर भी पहुंची। पर बात नहीं बनी। ये लांछन क्यों? ऐसा क्या हुआ? कैसा दंश झेल रही हैं ये महिलाएं और बच्चियां।

 

 

(ऐसे कई सवालों के जवाब तलाशने के लिए भास्कर की टीम शाजापुर से 40 किमी दूर कढ़वाला गांव पहुंची। गांव वालों से पूछा तो कुछ लोग घूरने लगे, समझाने के बाद कुछ ने पता बताया। जब उन फैमिली से मिले तो महिलाओं की पीड़ा फूट पड़ी। )

 

 

गांव वाले बोले- हमने तो उनमें कभी डायन नहीं देखी...

 

- गांव के चौराहे पर बैठे कुछ लोगों ने गांव में डायन होने की बात पूछी तो उन्होंने अनमने मन से बताया कि ये तो गांव में रहने वाले पाटीदार कम्युनिटी का आपसी मामला है। हमें तो इस तरह से अब तक किसी भी महिला में इस तरह के हावभाव देखने को नहीं मिले। पता नहीं उस कम्युनिटी में ऐसी परम्परा कहां से शुरू हुई। भला उनकी कम्युनिटी के मामले में हम उन्हें क्या समझाइश दें। 

 


12 गांव के 150 फैमिली की महिलाओं पर ऐसा अत्याचार
- पाटीदार खड़ग कम्युनिटी शाजापुर और राजगढ़ जिले के 12 गांवाें में बसा है। सब मिलाकर करीब 400 फैमिली हैं।

- शाजापुर के कढ़वाला, उचोद और लाहरखेड़ा सहित राजगढ़ जिले के 9 गांवों में 150 फैमिली की महिलाओं को डायन घोषित कर दिया गया है।

- कढ़वाला  गांव में ही 70 से ज्यादा फैमिली इसी कम्युनिटी के हैं जिसमें से 20-25 फैमिली की महिलाओं के साथ ऐसा अत्याचार हो रहा है। 

 

कल पाटीदार कम्युनिटी के पदाधिकारी पहुंचेंगे...

 

- महिलाआें को डायन बताते हुए कम्युनिटी में उन्हें अपमानित करने का मामला प्रदेशभर में फैल गया। महिलाओं पर अनावश्यक तरीके से लगाए जा रहे कलंक को मिटाने के लिए पाटीदार कम्युनिटी के पदाधिकारी आखिरी बार समझाइश देंगे।

- 15 दिसंबर को सभी पाटीदार कम्युनिटी के प्रदेश लेवल  के पदाधिकारी शाजापुर के कढ़वाला आएंगे। यहां महिलाओं पर डायन का कलंक लगाने वाले लोगों को समझाइश देंगे। इसके बाद भी यदि बात नहीं बनी तो सीधे कानूनी लेवल से मामले का निपटारा होगा।

- इधर, कई पीड़ित महिलाओं में से कुछ ने न्यायालय तो कुछ ने महिला आयोग में गुहार लगाने का मन बनाया है। शाजापुर व राजगढ़ जिले के 12 गांवों में पाटीदार खडग  कम्युनिटी में चली आ रही इस मनगढ़ंत अंधविश्वास के मामले को लेकर भास्कर से प्रमुखता से मुद्दा उठाया और पूरे प्रदेश में महिलाओं की पीड़ा को लेकर प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं।

- लोग महिलाओं को सम्मान दिलाने के लिए आगे आने लगे हैं। सकल पाटीदार कम्युनिटी भी इस बुराई को मिटाने के लिए प्लानिंग करने में जुटे हैं। सकल पाटीदार कम्युनिटी के प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों ने ग्राम कढ़वाला आकर मामला सुलझाने की योजना बनाई है।

- 15 दिसंबर को कम्युनिटी के प्रदेश स्तर के पदाधिकारी एक बार फिर कढ़वाला आकर ऐसा कलंक लगाने वालों को समझाइश देंगे।

 

 

कानूनी पहलू- इसमें महिलाओं का अपमान हो रहा है

- गवर्नमेंट एडवोकेट और पब्लिक प्रोसेक्यूटर के मुताबिक, यदि किसी महिला, युवती या बालिकाओं को डायन बताया जा रहा है, उनके हाथ का छुआ खाना फेंक दिया जाता है, तो यह उनका अपमान है। ऐसे मामले में आईपीसी की धारा 499, 500 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

 

प्रशासनिक पहलू- दूसरे राज्यों से ले रहे जानकारी
- जिला कलेक्टर के मुताबिक,  अंधविश्वास के कारण जिले के कुछ गांवों में ऐसा हो रहा है। उन्हें सामाजिक स्तर से लेकर अन्य तरीके से समझाने का प्रयास करेंगे। दूसरे प्रदेशों में जहां ऐसी स्थिति बनी थी, वहां से भी जानकारी ली जा रही है।

 

 

डायन नहीं है वो! बेटी है मेरी

(-जैसा 50 वर्षीय मनोरमा पाटीदार ने बताया)

 

मेरे घर उत्सव होता था, आवाज उठाई तो अकेली रह गई

- हम गांव के पटेल हैं। पहले पचासों लोग हमारे यहां खाना खाते थे। उत्सव सा माहौल रहता था। जब गांव की इन बच्चियों की पीड़ा समझ आई, तो इस डायन के कलंक को खत्म करने के लिए आवाज उठाई। समाज वालों को समझाया। वो हमारी बेटियां हैं। पढ़-लिख रही हैं। हमारे समाज का नाम रोशन होगा, लेकिन कोई नहीं माना। हुआ उलटा। अब हम भी बहिष्कृत हो गए। कोई हमारे घर खाना नहीं खाता। हमारा नाम भी डायन में जोड़ दिया गया। यहां सिर्फ बेटी होना पाप है। बेटों के साथ ऐसा कोई भेदभाव नहीं होता। पीढ़ियों से ये कलंक सहा जा रहा है। पहले सास। फिर बहू, उसकी बेटी, उसकी बहू। 

 

 

 

आगे की स्लाइड्स में पढ़ें....

this community call child to women witch
महेंद्रसिंह पाटीदार, प्रदेश अध्यक्ष, सकल पाटीदार समाज

उन्हें... कानूनी भाषा में समझाने की जरूरत

 

- मैं 4 साल से खड़ग पाटीदार कम्युनिटी में फैली इस बुराई को खत्म करने में लगा हूं। शाजापुर और राजगढ़ जिले के इन 12 गांव में कुछ लाेग ही ऐसे हैं, जो माहौल को सुधारना नहीं चाहते।

- अब तो कम्युनिटी का माहौल बिगाड़ने वाले इन 4-6 लोगों को लेकर पुलिस और प्रशासनिक स्तर से ही सख्ती दिखाने की जरूरत है। 

 

-महेंद्रसिंह पाटीदार, प्रदेश अध्यक्ष, सकल पाटीदार समाज 

 

this community call child to women witch
जिस लड़के को कोई लड़की नहीं मिलती, उससे हो जाती है हमारी शादी

जिस लड़के को कोई लड़की नहीं मिलती, उससे हो जाती है हमारी शादी
- कलंक लगने वाले परिवार की बेटी का रिश्ता करने में भी उपेक्षित लोगों को परेशानी झेलना पड़ती है। किसी कमी के कारण जिसे अच्छे परिवार की लड़की नहीं मिलती, मजबूरन ऐसे युवक से लांछन लगाई लड़कियों को शादी करना पड़ती है।

- इसके बाद वहां का परिवार भी बहू की लगातार उपेक्षा करता है। सुषमा पाटीदार बताती हैं गांव के हमारे जैसे लांछन लगने वाले परिवार में ही मेरे माता-पिता ने शादी की है। मेरा ससुराल और मायका दोनों कढ़वाला है। मेरी तीन बहनें है, वे मेरा छुआ नहीं खातीं। 

 

this community call child to women witch
60 साल की गीताबाई पाटीदार ।

दो साल से मां को नहीं देखा, बोलती हैं... डायन हो गई है तू

 

- मेरे घरवालों को पता था कि यहां डायन का कलंक थोंपा गया है। फिर भी शादी कर दी। शुरुआत में तो मैं अलग खाना बनाती थी। तब घरवाले बुला लेते थे। जबसे मेरी सास के साथ खाना बनाने-खाने लगी, तो मुझे भी डायन बताकर बहिष्कार कर दिया गया।

- अब मेरे घरवाले भी डायन ही समझते हैं। दो साल हो गए, मैंने अपनी मां को नहीं देखा। कहती हैं तू डायन हो गई है। मेरे चार भाई हैं, लेकिन एक भी मिलने नहीं आता। न मुझसे राखी बंधवाते।

 

(जैसा 60 साल की गीताबाई पाटीदार ने बताया)

this community call child to women witch
कढ़वाला निवासी रचना पाटीदार ।

मैं मेडिकल की पढ़ाई कर रही हूं, कोई ऐब नहीं तो क्यों सहूं

 

- हममें कोई ऐब नहीं है, फिर इस कलंक को क्यों झेलें हम। मैं शुजालपुर में रहकर बीएससी कर रही हूं। दो साल पहले मुझे कन्याभोज में बुलाया। गलती से पूड़ी पर हाथ लग गया तो सभी के सामने जलील करते हुए पूड़ी बाहर फेंक दी। मैं रोती हुई घर आई। दो दिन तक रोती रही। खाना भी नहीं खाया।

- घरवालों को पता चला तो सभी ने समाज में बात की। मेरी मां मनोरमाबाई ने उनकी मां पर लगे लांछन को पूरी जिंदगी सहा, लेकिन परिवार नहीं चाहता था कि मैं भी यह सब सहूं। समाज के जो लोग हमारे साथ आए, इन लोगों ने उनका भी बहिष्कार कर दिया। अब हमें पुलिस का सहारा लेना पड़ा।

- सीहोर से बीएससी नर्सिंग कर रही गायत्री पाटीदार, रेखा पाटीदार, सुरक्षा पाटीदार और गांव की कई महिलाओं के साथ मिलकर हमने राष्ट्रीय महिला आयोग से लेकर राज्य महिला आयोग सहित 13 जगह शिकायत भेजी है।

 

( जैसा कढ़वाला निवासी रचना पाटीदार ने बताया)

 

this community call child to women witch
बेटी का छुआ खाना फेंक दिया... तब बहुत रोए थे हम

बेटी का छुआ खाना फेंक दिया... तब बहुत रोए थे हम
आपको और आपकी बेटी को डायन किसने घोषित किया... इस एक सवाल पर चीख उठी वो महिला। बोलीं, डायन नहीं है वो। बेटी है मेरी। मैंने वो सब सहा, जो समाज ने थोंपा। मेरी बेटी नहीं सहेगी। मेरे हाथ का छुआ कोई खाता नहीं था। रिश्तेदार घर नहीं आते। मायके जाती थी, तो वहां भी मुझे रसोई में नहीं जाने देते। फिर मेरे यहां बेटी हुई। मैं फूट-फूटकर रोई। ये पैदा ही क्यों हुई? पहले मैं डायन कहलाती थी। अब ये कलंक मेरी बेटी को भी सहना था। यहां बेटी होना ही पाप है। मेरी बेटी को एक कार्यक्रम में बुलाया। उसने गलती से पूड़ी को छू लिया, तो खाना बाहर फेंक दिया। बहुत रोए थे हम।

 

prev
next
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

Trending Now