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सब्सिडी खत्म होने से इंदौर के हज यात्रियों को हवाई किराए के देने होंगे 30 हजार रु.ज्यादा

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हज यात्रियों को हवाई टिकट में दी जा रही सब्सिडी को बंद करने का फैसला लिया है।

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2018, 07:21 AM IST

इंदौर . सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हज यात्रियों को हवाई टिकट में दी जा रही सब्सिडी को बंद करने का फैसला लिया है। भास्कर ने पड़ताल की तो यह सामने आया कि यह सब्सिडी हाजियों की बजाय इसकी आड़ में एयरलाइन को मदद करने का जरिया ज्यादा थी। वैसे भी अब तक सब्सिडी सिर्फ हवाई किराए पर ही दी जाती थी और हज कमेटी द्वारा तय किराया,सामान्य किराए से 2 से 3 गुना तक होता है। यूं तो जद्दाह के लिए इंदौर से आने-जाने का किराया सीधे टिकट लेने पर 40 हजार के आसपास है। लेकिन हज कमेटी इस साल हाजियों से इसका लगभग 3 गुना यानी 97 हजार वसूल रही है। वहीं दूसरी ओर हज के लिए मुंबई से जद्दाह जाने का विकल्प चुनने पर हवाई किराए के 58 हजार लिए जा रहे हैं। यहां भी किराए में गड़बड़ी साफ नजर आती है। इंदौर के बजाय मुंबई से जाने वाले हाजियों का किराया इंदौर से जाने वालों के मुकाबले 40 हजार रु. कम है। जबकि आम दिनों में मुंबई से आने-जाने का किराया 7-8 हजार के आसपास ही है। लेकिन हज कमेटी की हठधर्मिता से इंदौर से जाने वालों को बेवजह 40 हजार ज्यादा देने पड़ते हैं।

2017 में जद्दाह आने-जाने के वसूले 1.13 लाख रुपए
- एयर फेयर में सब्सिडी के दावे को परखने के लिए जब 2017 में हाजियों से की गई वसूली की पड़ताल की तो पता चला कि हज कमेटी ने इंदौर से जद्दाह तक हवाई किराए के 68 हजार 764 रु.लिए। इसमें सरकार ने 45 हजार की सब्सिडी का दावा किया।

- इस सब्सिडी को यात्रियों से वसूली राशि में जोड़ेंं तो कमेटी के मुताबिक इंदौर से जद्दाह आने-जाने का किराया 1.13 लाख है, जो सामान्य का 3-4 गुना तक है। इसी तरह मुंबई से जाने वालों से सब्सिडी जोड़कर 1.03 लाख वसूला, जो सामान्य से 4 गुना है। इन दिनों में भी 9 अगस्त के लिए मुंबई से जद्दाह आने-जाने का टिकट 30 हजार में मिल रहा है।

टेंडर करें तो किराया 30 हजार से भी कम रह जाए
- सालों से हज यात्रियों को ले जाने के लिए एयर इंडिया को प्राथमिकता दी जाती रही है। हर साल लगभग एक लाख 40 हजार लोग हज कमेटी के जरिए हज पर जाते हैं। महीनों पहले से कार्यक्रम तय रहता है। यदि किराए के लिए ग्लोबल टेंडर किए जाएं तो यह टिकट बड़ी आसानी से 20 से 30 हजार के स्तर पर आ सकता है।

टेंडर करें तो किराया 30 हजार से भी कम रह जाए
- सालों से हज यात्रियों को ले जाने के लिए एयर इंडिया को प्राथमिकता दी जाती रही है। हर साल लगभग एक लाख 40 हजार लोग हज कमेटी के जरिए हज पर जाते हैं। महीनों पहले से कार्यक्रम तय रहता है। यदि किराए के लिए ग्लोबल टेंडर किए जाएं तो यह टिकट बड़ी आसानी से 20 से 30 हजार के स्तर पर आ सकता है।

दो कैटेगरी बनाई जाती है हज यात्रियों के लिए
- हज यात्रियों की दो कैटेगरी बनाई जाती है। ग्रीन कैटेगरी में यात्रियों को काबा के 1000 मीटर के दायरे में ठहराया जाता है। इसके लिए हर यात्री को 2.38 लाख तक का( वर्ष 2016 की दर) भुगतान करना पड़ता है। दूसरी कैटेगरी अजीजिया में थोड़ी दूरी पर ठहराया जाता है, जिसके लिए गत वर्ष 204000 वसूले गए।

मुंबई से जाने का विकल्प चुन सकते हैं
- हज यात्रियों की मजबूरी है कि हज कमेटी द्वारा तय विमान से ही यात्रा कर सकते हैं। इसलिए इंदौर से हज यात्रियों को गत वर्ष के मुकाबले करीब 30 हजार ज्यादा खर्च करने होंगेे। यात्री चाहंे तो मुंबई से जाने का विकल्प चुन सकते हैं। वहां से 97 नहीं बल्कि 58 हजार ही देने होंगे।

सरकार का निर्णय कोई नया नहीं है
- शहर काजी इशरत अली का कहना है सरकार का निर्णय नया नहीं है। फॉर्म भरने वालों को 3 माह पूर्व बता दिया गया था। वैसे सब्सिडी का फायदा एयरलाइन को मिलता था। इंदौर, मुंबई से किराए में 40 हजार का अंतर है, जो इंदौर के हाजियों को मिली सुविधा पिछले दरवाजे से बंद करने की साजिश के तहत है।

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