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महिलाओं ने शीतला माता को लगाया ठंडे खाने का भोग, शहर के मंदिरों में रात तीन बजे से ही महिलाओं की लग गई थी भीड़

मंदिरों के बाहर महिलाओं की लंबी-लंबी कतारे देखी गई। शीतला माता को भोग लगाने के बाद घरों पर हल्दी के छापे लगाए गए।

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 12:10 PM IST

इंदौर। गुरुवार को शहर मेें महिलाओं द्वारा शीतला सप्तमी मनाई गई। बुधवार की रात को बनाए गए ठंडे खाने का भोग लगाने के लिए महिलाएं अलसुबह से ही शहर के शीतला माता मंदिर में पहुंचने लगी थी। माता को भोग लगाने के लिए मंदिरों के बाहर महिलाओं की लंबी-लंबी कतारे देखी गई। शीतला माता को भोग लगाने के बाद घरों पर हल्दी के छापे लगाए गए।

- शीतला माता पूजन के लिए प्राचीन सीतलामाता मंदिर, बड़ा गणपति स्थित शीतलामाता मंदिर सहित शहर के लगभग सभी मंदिरों में विशेष तैयारियां की गईं थी। एलआईजी स्थित सार्वजनिक पंचदेव मंदिर में गणगौर पूजन का आयोजन चल रहा है। यहां गुरुवार को सप्तमी का पूजन किया गया वहीं 9 मार्च को अष्टमी का पूजन होगा।

- ग्राम कैलोद करताल खंडवा रोड में सीतला सप्तमी के उपलक्ष्य में गांव गेर माता का पूजन किया गया। गणपतसिंह गौड़ ने बताया गुरुवार को सुबह 8 बजे पूजन के लिए सिगड़ी यात्रा निकाली गई। इसमें गांव के समस्त ग्रामीणों द्वारा माता पूजन किया गया।

ऐसे हुई पूजा
- सुबह उठकर ठंडे पानी से स्नान किया गया।
- स्नान के बाद महिलाओं ने व्रत का संकल्प लिया और शीतला माता की पूजा अर्चना करी।
- पूजा और स्नान के वक्त कई महिलाओं द्वारा 'हृं श्रीं शीतलायै नमः' मंत्र का मन में उच्चारण किया गया। शहर में बहुत से स्थानों पर पूजा के बाद कथा का आयोजन भी हो रहा है।
- पूजा में महिलाओं ने माता को भोग के तौर पर रात को बनाए मीठे चावल चढ़ाएं।

यह है प्रचलित कथा

एक प्रचलित कथा के अनुसार एक बार शीतला सप्तमी के दिन एक परिवार में बूढ़ी औरत और उनकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा। मान्यता के अनुसार इस दिन सिर्फ बासी भोजन ही खाया जाता है, इसी वजह से रात को ही माता का भोग सहित अपने लिए भी भोजन बना लिया। लेकिन बूढ़ी औरत की दोनों बहुओं ने ताज़ा खाना बनाकर खा लिया। क्योंकि हाल ही में उन दोनों को संतान हुई थीं, इस वजह से दोनों को डर था कि बासी खाना उन्हें नुकसान ना करे।

यह बात उनकी सास को मालूम चली कि दोनों ने ताज़ा खाना खा लिया, इस बात को जान वह नाराज हुई। थोड़ी देर बाद पता चला कि उन दोनों बहुओं के नवजात शिशुओं की अचानक मृत्यु हो गई। अपने परिवार में बच्चों की मौत के बाद गुस्साई सास ने दोनों बहुओं को घर से बाहर निकाल दिया। दोनों अपने बच्चों के शवों के लेकर जाने लगी कि बीच रास्ते कुछ देर विश्राम के लिए रूकीं। वहां उन दोनों को दो बहनें ओरी और शीतला मिली। दोनों ही अपने सिर में जूंओं से परेशान थी।

उन बहुओं को दोनों बहनों को ऐसे देख दया आई और वो दोनों के सिर को साफ करने लगीं, कुछ देर बाद दोनों बहनों को आराम मिला, आराम मिलते ही दोनों ने उन्हें आशार्वाद दिया और कहा कि तुम्हारी गोद हरी हो जाए। इस बात को सुन दोनों बहुएं रोने लगी और अपने बच्चों के शव दिखाए। ये सब देख शीतला ने दोनों से कहा कि कर्मों का फल इसी जीवन में मिलता है, ये बात सुनकर वो दोनों समझ गई कि ये कोई और नहीं बल्कि स्वंय शीतला माता हैं।

ये सब जान दोनों ने माता से माफी मांगी और कहा कि आगे से शीतला सप्तमी के दौरान वो कभी भी ताज़ा खाना नहीं खाएंगी। इसके बाद माता ने दोनों बच्चों को फिर से जीवित कर दिया। इस दिन के बाद शीतला माता का व्रत धूमधाम से मनाए जाने लगा।