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50 साल तक स्कूल में पढ़ाया, अब 90 की उम्र में लिख रहे 2 हजार पेज का ग्रंथ

पांच दशक स्कूल में पढ़ाया, 14 किताबें लिखीं जो एमए में पढ़ाई जाती हैं, अब 90 साल की उम्र में लिख रहे हैं 2000 पृष्ठ का ग्

Dainik Bhaskar

Jan 15, 2018, 12:42 AM IST
writing a book of two thousand page at age of ninty

उज्जैन (इंदौर). शहर के 90 साल के डॉ केशवराव सदाशिवशास्त्री मुसलगांवकर कई वैदिक साहित्य की व्याख्या कर चुके हैं। अब तक वे 14 ग्रंथो पर भाष्य लिख चुके हैं। वे टीचर के रूप में पचास सालों तक गांव में 10वीं 12वीं, के बच्चों को संस्कृत पढाते रहे। उन्होंने रिटायर्मेंट के बाद कई यूनिवर्सिटी में बुक लिखीं जो आज भी एमए में पढ़ाई जाती हैं। वे अपनी पहली बुक "संस्कृत महाकाव्य की परंपरा" के छ वोल्यूम पब्लिश कर चुके हैं। उनके इन कामों के लिए राष्ट्रपति सम्मान से नवाजा जा चुका है। मॉर्डन रिफ्रेंस में ग्रंथो को लिख रहे हैं...

- डॉ. मुसलगांवकर कहते हैं, ‘पुरानी पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह मॉर्डन रिफ्रेंस में ग्रंथों की व्याख्या कर नई पीढ़ी को देना चाहते हैं। वे वही काम कर रहे हैं।’ वे मोटी-मोटी किताबों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं कि, ये ग्रंथ मैंने लिखे हैं, पर इनके पीछे बहुत लोगों की तपस्या है। पत्नी प्रमिला मुसलगांवकर और आगरा के दोस्त प्रतापचंद बेनारा की भी। वे किस्सा सुनाते हैं, ‘पिता पंडित महामहोपाध्याय सदाशिवशास्त्री सिंधिया स्टेट के प्रधान पंडित थे। 1944 में राजतंत्र खत्म हो गया। आर्थिक स्थिति बिगड़ गई।

- इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ना पड़ रही थी। प्रतापचंद मिलने आए। उदासी का कारण पूछा। वजह सुनते ही प्रतापचंद ने 2 रुपए दिए और कहा, मैं व्यापारी का बेटा हूं, व्यापार कर लूंगा लेकिन आप ब्राह्मण हो, आपके लिए शिक्षा जरूरी है।

- इसके बाद प्रतापचंद ने पढ़ाई छोड़ दी और मुझे सात साल तक रुपए देते रहे। आगरा में रहकर एमए संस्कृत, एमए हिंदी और इलाहाबाद विवि से डीफिल (पीएचडी) की उपाधि हासिल की।’

- टीचर के तौर पर पचास साल तक गांवों में 10वीं-12वीं के स्टूडेंट को संस्कृत पढ़ाई । उनकी लिखी किताबें आज कई यूनिवर्सिटी में एमए के सिलेबस का हिस्सा हैं। 1963 में पब्लिश पहली बुक ‘संस्कृत महाकाव्य की परंपरा’ के तो छह वोल्यूम भी पब्लिश हो चुके हैं।

अब लिख रहे हैं 2000 पेज का ग्रंथ

- 90 साल के डॉ. केशवराव सदाशिवशास्त्री मुसलगांवकर महर्षि पतंजलि कृत योगसूत्र की व्याख्या कर रहे हैं। अभी तक 2000 पेज लिख चुके हैं, अब भूमिका लिख रहे हैं।

- संस्कृत नाट्यमीमांसा, नाट्यशास्त्र पर्यालोचन, भवभूति, हर्षचरितम्, दशरूपकम्, श्रीमद्भगवतगीता समेत 14 ग्रंथों पर भाष्य लिख चुके हैं।

इस उम्र में भी रोज 6 घंटे लेखन करते हैं डॉ. मुसलगांवकर

- डॉ. मुसलगांवकर रोज सुबह 4.30 बजे उठते हैं, दोपहर 2 से शाम 6 और शाम 7.30 से रात 9.30 बजे तक लिखते हैं। फिर सोने चले जाते हैं।

- पुत्र डॉ. राजेश्वर शास्त्री बताते हैं कि विक्रम विवि उज्जैन, रविवि रायपुर, बस्तर विवि जगदलपुर सहित अन्य विश्वविद्यालयों में उनकी किताबें पढ़ाई जाती हैं।

- उन्हें एमपी गवर्नमेंट का महाकवि कालिदास और राजशेखर सम्मान, राष्ट्रपति सम्मान समेत कई सम्मान मिल चुके हैं।

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