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गुमास्ता लाइसेंस बनवाना मुश्किल

News - इंदौर/भोपाल

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2018, 02:05 AM IST
गुमास्ता लाइसेंस बनवाना मुश्किल
इंदौर/भोपाल
सरला सिंह ने तीन साल पहले बुटिक शुरू किया। इसके लिए उन्होंने श्रम विभाग की वेबसाइट पर जाकर गुमास्ता बनवाने का आवेदन किया, लेकिन अब तक उनका लाइसेंस नहीं बना। उन्होंने दलाल से बनवाने के बजाय खुद दफ्तर के कई चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें हर बार जवाब मिला कि उन्हें ई-मेल कर बताया जाएगा कि उनके आवेदन में क्या कमी है? तीन साल में एक भी ई-मेल उन्हें नहीं मिला।

जब उन्होंने अपने डॉकेट नंबर से सर्च किया तो पता चला कि उनका आवेदन श्रम विभाग के पास पहुंचा ही नहीं। यह स्थिति तब है, जब आवेदन के तीस दिन बाद ही लाइसेंस बन जाना चाहिए। नियमानुसार आवेदन निरस्त होने, आपत्ति होने पर मोबाइल पर एसएमएस आना चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। यह अकेले सरला की कहानी नहीं है, बल्कि उन जैसे छोटे उद्यमियों का हाल भी ऐसा ही है, जो कुछ नया करना चाहते हैं। डीबी स्टार ने इस मामले में उन लोगों से बात की जो गुमास्ता बनवाने का काम करते हैं और लोगों को तकनीकी रूप से सहयोग भी देते हैं। इस बातचीत में कई गड़बड़ियां सामने आईं। कई कंसल्टेंट ने बताया कि असली दिक्कत वेबसाइट की है। इसमें आवेदन के बाद भी जब लाइसेंस बनकर आता है, तो उसमें प्रोपराइटर का फोटो गायब रहता है, जबकि बिना पूरे दस्तावेज सबमिट किए लाइसेंस का आवेदन स्वीकार ही नहीं होता है। किसी एक के डॉकेट नंबर पर दूसरे के दस्तावेज दिखाई देते हैं। ऐसे में आवेदकों का गोपनीय डाटा, जिसमें आधार कार्ड, लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, बिजली बिल से लेकर रजिस्ट्री आदि की जानकारी भी लीक हो रही है।

सामने आ रही हैं गड़बड़ियां

Âआवेदन में सुधार या बदलाव के लिए पहली बार में प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, तो पोर्टल 10 के बजाय 100 रुपए मांग लेता है।

Âकोई गुमास्ता यदि एक्सपायर हो गया और कुछ साल बाद नवीनीकरण कराना चाहता है, तो पोर्टल फाइन जोड़कर नहीं बताएगा। यानी केवल नए आवेदन की फीस बताता है और समझौता शुल्क भी नहीं बताता है।

Âपोर्टल अपने आप‌ किसी अन्य का पासवर्ड और डाटा तक जाहिर कर देता है। जिसको‌ आसानी से डाउनलोड करके दुरुपयोग किया जा सकता है।‌ डिलीट कर सकते हैं।

Âआवेदन के दौरान ई-मेल‌ तो‌ मांगा जाता है, लेकिन उस पर‌ कभी कोई रिप्लाई नहीं आता। इसका कोई उपयोग नहीं है।

तकनीकी खामियों को ठीक किया जाएगा

 गुमास्ता बनाने की प्रक्रिया को बेहद आसान किया गया है। ऑनलाइन व्यवस्था ही इसलिए शुरू कराई गई, ताकि नए व्यवसायियों को लाभ मिल सके। मैं पता करता हूं कि क्यों गड़बड़ी हो रही है? जल्दी से जल्दी तकनीकी खामियों को ठीक करा दिया जाएगा। ओमप्रकाश धुर्वे, श्रम मंत्री, मप्र

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सरला सिंह ने तीन साल पहले बुटिक शुरू किया। इसके लिए उन्होंने श्रम विभाग की वेबसाइट पर जाकर गुमास्ता बनवाने का आवेदन किया, लेकिन अब तक उनका लाइसेंस नहीं बना। उन्होंने दलाल से बनवाने के बजाय खुद दफ्तर के कई चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें हर बार जवाब मिला कि उन्हें ई-मेल कर बताया जाएगा कि उनके आवेदन में क्या कमी है? तीन साल में एक भी ई-मेल उन्हें नहीं मिला।

जब उन्होंने अपने डॉकेट नंबर से सर्च किया तो पता चला कि उनका आवेदन श्रम विभाग के पास पहुंचा ही नहीं। यह स्थिति तब है, जब आवेदन के तीस दिन बाद ही लाइसेंस बन जाना चाहिए। नियमानुसार आवेदन निरस्त होने, आपत्ति होने पर मोबाइल पर एसएमएस आना चाहिए, लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। यह अकेले सरला की कहानी नहीं है, बल्कि उन जैसे छोटे उद्यमियों का हाल भी ऐसा ही है, जो कुछ नया करना चाहते हैं। डीबी स्टार ने इस मामले में उन लोगों से बात की जो गुमास्ता बनवाने का काम करते हैं और लोगों को तकनीकी रूप से सहयोग भी देते हैं। इस बातचीत में कई गड़बड़ियां सामने आईं। कई कंसल्टेंट ने बताया कि असली दिक्कत वेबसाइट की है। इसमें आवेदन के बाद भी जब लाइसेंस बनकर आता है, तो उसमें प्रोपराइटर का फोटो गायब रहता है, जबकि बिना पूरे दस्तावेज सबमिट किए लाइसेंस का आवेदन स्वीकार ही नहीं होता है। किसी एक के डॉकेट नंबर पर दूसरे के दस्तावेज दिखाई देते हैं। ऐसे में आवेदकों का गोपनीय डाटा, जिसमें आधार कार्ड, लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, बिजली बिल से लेकर रजिस्ट्री आदि की जानकारी भी लीक हो रही है।

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