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इंदौर

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 02:05 AM IST
इंदौर
स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों नवजात बच्चों के लिए खरीदे गए झबला, टोपी, मौजे और नेपकिन चर्चाओं में है। इनका निर्माण फलालेन के कपड़े से किया गया है। हंगामा उस समय हुआ जब किसी दंपति ने नवजातों को दी जाने वाली किट की धुलाई की।

पहली ही धुलाई मेंं कपड़ों ने जवाब दे दिया। रंग तो गया ही, कपड़ों की साइज भी बदल गई। डीबी स्टार ने जब इसकी पड़ताल की तब पता चला स्वास्थ्य विभाग को स्टेट पॉवर लूम कंपनी ने यह किट 216 रुपए में बेची है। कपड़ों की क्वालिटी बता रही थी कि इसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है।
स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार

90 रुपए की किट 216 में खरीदी

स्वास्थ्य विभाग नवजातों को झबला टोपी, मोजे और नेपकिन बांटता है

हम 90 रुपए में देने को तैयार हैं

सुरेश सिंह सिसौदिया सुभाष चौक में कपड़े का व्यावसाय करते हैं। जब उन्हें स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई किट दिखाई गई तब वे रेट सुनकर चौंक गए। उन्होंने कहा 90 रुपए में इस कपड़े से बेहतर क्वालिटी वाले झबला-टोपी आदि हम उपलब्ध करा सकते हैं। वैसे भी बाजार में वे इसे 110 रुपए प्रति किट के हिसाब से बेच रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने यह किट नवजातों को बांटी है। इसकी कीमत है 216 रुपए

पहली धुलाई ने ही भ्रष्टाचार की पोल खोल दी स्वास्थ्य विभाग की

सीएमएचओ ने पल्ला झाड़ा

नवजातों को दी जाने वाली घटिया किट का सीएमएचओ एचएन नायक के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं था। उनका कहना है कि हमें इतने अधिकार नहीं है कि यह किट बाजार से सीधे खरीद सकें। इस प्रकार की खरीदी हमें ऑनलाइन करना होती है। हो सकता है कि बाजार में इससे बेहतर क्वालिटी वाली कम कीमत में मिल रही हो। हम कुछ नहीं कर सकते हैं।

मंत्री ने कहा- हम जांच कराएंगे

स्वास्थ्य मंत्री रुस्तमसिंह का कहना है कि खरीदार और बेचवाल दोनों ही शासन की एजेंसी है। यह सच है कि स्वास्थ्य विभाग ऑनलाइन ही खरीदी कर सकता है। यदि घटिया क्वालिटी की किट ज्यादा दामों में दिए गए और बाजार में यदि कम कीमत में अच्छे कपड़े मिल रहे हैं तो हम इस मामले को दिखवाएंगे। संभव हुआ तो दोबारा टेंडर कराएंगे। हमारा मंत्रालय बच्चों के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेगा।