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भवन नहीं होने से विद्यार्थियों को नहीं दिया प्रवेश

इंदौर

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 02:30 AM IST
इंदौर
पांच हजार की आबादी वाले जम्बूड़ी हप्सी में दो साल से हाई स्कूल है। इससे आसपास के आठ गांव लगे हैं। यदि अलग बिल्डिंग बने तो इन गांवों के बच्चे भी यहां पढ़ सकेंगे, जिन्हें फिलहाल गांधीनगर जाना पड़ता है। प्राचार्य ने बताया कम कमरे होने से इस साल 15-20 बच्चों को प्रवेश नहीं दे पाए।

इन स्कूलों के पास अपना भवन नहीं

हायर सेकंडरी कन्या राजेंद्र नगर, कन्या गौतमपुरा, कन्या क्षिप्रा, गांधीनगर, धन्नड़, बिचौली मर्दाना, भगोरा और भागीरथपुरा। हाई स्कूलों में झलारिया, सिमरोड, सिरपुर, रूणजी, नया पीठा (उर्दू), नांदेड़, मूसाखेड़ी, मेंढ, माचल, कराड़िया, हातोद, चितावद, बिचौली हप्सी, चितावद, बरलई, बनेड़िया और बालूदा टाकून शामिल हैं। इनके पास अपनी अलग बिल्डिंग नहीं है।

इसलिए जरूरी है अलग भवन

गांधीनगर हायर सेकंडरी स्कूल से दो किमी दूर सुपर कॉरिडोर है। यहां इंफोसिस और टीसीएस के कैंपस बन रहे हैं। दूसरी तरफ बड़ा बांगड़दा में सिम्बायोसिस का इंस्टिट्यूट खुल चुका है। इलाके में गांधीनगर ही प्रमुख सरकारी स्कूल है। यदि यहां भवन बने तो बच्चों को अच्छी सुविधा मिल सकेगी।

बजट मंजूर, जमीन का टोटा

जम्बूड़ी हप्सी में एक करोड़ की लागत से हाई स्कूल बनना है। भगौरा, डकाच्या, पिगडंबर, महूगांव और गांधीनगर में भी एक-एक करोड़ की पांच बिल्डिंग बनना है। इनके साथ कन्या हायर सेकंडरी स्कूल गौतमपुरा, आगरा, गुरान और धन्नड़ में 1.75 करोड़ के चार भवन की योजना है। इस तरह नौ भवनों की मंजूरी है, लेकिन प्रशासन ने जमीन नहीं दी है। यही वजह है कि बजट होने के बावजूद स्कूल नहीं बन पा रहे हैं। इससे विद्यार्थियों को कम सुविधाओं के बीच पढ़ाई करना पड़ रही है।

इस तरह जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करते हैं विद्यार्थी।

छात्रों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं मिलती।

इस तरह चल रहे हैं हायर सेकंडरी स्कूल


स्कूल के नाम पर ऑफिस और लैब

गांधीनगर में 1990 से हाई स्कूल है, लेकिन बिल्डिंग अब तक नहीं बनी है। यहां मिडिल स्कूल में 14 कमरे हैं। इनमें बालक और बालिकाओं की एक से आठ तक की कक्षाएं लगती हैं। स्कूल के 14 कमरे मिडिल 325 विद्यार्थियों के लिए हैं, लेकिन इन्हीं कमरों 9वीं से 12वीं तक के 325 विद्यार्थी भी पढ़ते हैं। हायर सेकंडरी स्कूल भवन के नाम पर यहां सिर्फ कार्यालय और लैब है। कक्षाएं प्राइमरी-मिडिल स्कूल के कक्षों में लगती हैं।

यह है दो कमरों का हायर सेकंडरी स्कूल।


प्राइमरी के बच्चे बरामदे में

जम्बूड़ी हप्सी हाई स्कूल में व्यवस्था मिडिल स्कूल के हिसाब से ही हैं। यहां एक से आठ तक के 108 बच्चों के लिए 6 रूम हैं। इनमें से दो रूम नौवीं-दसवीं कक्षाओं के लिए दे दिए गए हैं। इन दो कमरों में हाई स्कूल के 54 विद्यार्थी पढ़ते हैं। उधर, प्राइमरी के विद्यार्थी बरामदे में बैठ रहे हैं। इसके एक हिस्से को प्राचार्य ने बैठने लायक बना लिया है।


478 बच्चों के लिए 7 कमरे

हातोद हायर सेकंडरी स्कूल में 478 विद्यार्थियों के लिए कुल सात रूम हैं। स्टाफ का कहना है कि स्कूल को चार रूम और चाहिए। इन्हीं सात रूम में से दो में लैब है। पर्याप्त कक्ष नहीं होने से लैब के बीच ही विद्यार्थी भी पढ़ते हैं।

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