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चार हजार साल पहले भी थी इंदौर में बसाहट

चार हजार साल पहले इंदौर में बसाहट थी। हड़प्पा कालीन सभ्यता का इंदौर से वास्ता रहा है। 1973-74 में आजाद नगर किए गए उत्खनन...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 02:40 AM IST
चार हजार साल पहले इंदौर में बसाहट थी। हड़प्पा कालीन सभ्यता का इंदौर से वास्ता रहा है। 1973-74 में आजाद नगर किए गए उत्खनन में मिले अवशेषों में इंदौर में हड़प्पा संस्कृति और समकालीन कायथा सभ्यता के प्रमाण मिले थे।

केंद्रीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं अवशेष।

डीबी स्टार. इंदौर

इंदौर की स्थापना को लेकर 47 साल पहले तक यही माना जाता था, शहर 1716 के आसपास बसाया गया था। 1971 में आजाद नगर में मिले अवशेषों से पता चला है कि इंदौर में चार हजार साल पहले भी बसाहट थी।

पुरातत्व विभाग को शहर के इस पूर्वी भाग में मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, हाथी दांत की बनी चूड़ियां, ताम्र मुद्राएं मिली थीं। इसके बाद प्रदेश शासन के निर्देश पर पुरातत्व विभाग ने आजादनगर टीले के संरक्षित स्थल बना दिया।

1972 में पुरातत्व विभाग और विक्रम विवि उज्जैन के इतिहास विभाग ने खुदाई शुरू की। इसमें डॉ. वाकणकर भी शामिल थे। उन्होंने अवशेषों का अध्ययन कर पता लगाया कि ये कायथा सभ्यता और महेश्वर में उत्खनन से प्राप्त धनबेड़ी टेकरी के अवशेषों के समान हैं। पात्रों के अवशेषों के आकार में हड़प्पा सभ्यता की झलक है। इन पर बने चित्र प्राग हड़प्पा सभ्यता के हैं। पात्रों पर अंकित लिपि मोहन जोदड़ो लिपि जैसी है। लहरदार काले रंग के पात्रों पर बने चित्र लोथल और ईरान में भी मिले हैं।

अन्य संस्कृतियों के अवशेष

आजाद नगर में हड़प्पा के समान लिपि वाले पात्र भी मिले हैं। कुछ मौर्यकालीन सिक्के और एक बड़े बौद्ध स्तूप के अवशेष भी मिले हैं। माना जाता है कि उस समय उज्जैन, महेश्वर और भीकनगांव बौद्ध गतिविधियों के प्रमुख केंद्र थे। इंदौर इन शहरों के बीच में पड़ता था, इसलिए यहां भी बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार हुआ।

हजारों साल पहले भी इंदौर में थी बसाहट

आरसी यादव, ऑफिसर इंचार्ज लालबाग

इंदौर में चार हजार साल पहले भी बसाहट थी। आजाद नगर खुदाई में मिले अवशेष इसकी पुष्टि करते हैं। यहां हड़प्पा और प्राग हड़प्पा सभ्यता के अवशेष मिले हैं। आहाड़ संस्कृति और बौद्ध स्तूप के अवशेष भी मिले हैं। यह अवशेष केंद्रीय संग्रहालय में सुरक्षित हैं।