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बायपास पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए एमआर 10, 11, 12 पर फ्लायओवर जरूरी : रिपोर्ट

डीपीएस बस हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम ने ट्रैफिक विभाग के साथ बायपास पर होने वाली दुर्घटना को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 02:40 AM IST

बायपास पर दुर्घटनाएं रोकने के लिए एमआर 10, 11, 12 पर फ्लायओवर जरूरी : रिपोर्ट
डीपीएस बस हादसे के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम ने ट्रैफिक विभाग के साथ बायपास पर होने वाली दुर्घटना को रोकने के लिए जो रिपोर्ट बनाई है, वह प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग को भेज दी गई है। विभाग के प्रमुख सचिव विवेक अग्रवाल को भेजी गई रिपोर्ट में तीन प्रमुख सुझाव दिए गए हैं।

3 बदलाव : दुर्घटनाएं रोकने के लिए जरूरी

1. अभी सर्विस रोड 9 मीटर है। उसमें कंट्रोल एरिया की आरक्षित जमीन से 12 मीटर जमीन और लेकर कुल 21 मीटर पर फोर लेन सर्विस रोड बनाई जाए। इससे बायपास के समानांतर सड़क बन जाएगी। इससे शहरी ट्रैफिक दोनों ओर से आसानी से निकल सकेगा। सर्विस रोड चौड़ी होने से अभी जो बसें बायपास पर चलती हैं, वह नीचे चलेंगी। इससे हादसों पर रोक लगेगी। भविष्य में यदि बायपास के समानांतर लोक परिवहन संचालित किया तो एक वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध रहेगा।

अंडरपास : सर्विस रोड का ट्रैफिक दिखता नहीं

अंडरपास में यातायात के आगम और निर्गम के दौरान सर्विस रोड का ट्रैफिक दिखता नहीं है। ऐसे में दुर्घटना की आशंका सबसे ज्यादा रहती है।

सभी अंडरपास के सर्विस रोड से 90 डिग्री पर होने से बायपास को क्रॉस करते समय वाहन दिखते नहीं, जिससे दुर्घटना और यातायात जाम होता है।

अंडरपास से लगकर सर्विस रोड की चौड़ाई अत्यधिक कम होने व बायपास के पूर्वी भाग में शैक्षणिक संस्थानों और आवासीय कॉलोनियों के यातायात के कारण भी अंडरपास से क्रॉसिंग में समय लगता है। वाहनों की कतार लग जाती है।

ऐसे बढ़ता गया बायपास और उस पर ट्रैफिक :

18 साल पहले बनाया, फोर लेन से सिक्स लेन किया, फिर भी ट्रैफिक दबाव कम नहीं हुआ

राऊ से मांगलिया तक 35 किमी लंबे बायपास के लिए 1995 में कवायद शुरू हुई। 1995 में 60 मीटर चौड़े मार्ग के लिए जमीन अधिग्रहण शुरू हुआ। साल 2000 में फोर लेन का निर्माण पूरा हुआ। 2008 में मास्टर प्लान 2021 के मुताबिक कहा गया कि एक नया बायपास बनना चाहिए। फिर तय हुआ कि नए बायपास के बजाय इसी बायपास को सिक्स लेन किया जाए। 2010 में यह काम भी शुरू हुआ। साल 2010 से 2015 के बीच जमीन की उपलब्धता बढ़ी तो स्कूल, कॉलेज और टाउनशिप बनी। इसी से ट्रैफिक भी बढ़ा। ग्रामीण आबादी का ट्रैफिक भी इसी से गुजरने लगा। 2012-13 में बायपास की समस्याओं को देखते हुए बैठक हुई। इसमें फ्लायओवर और अंडरपास बनाने का निर्णय हुआ।

2. बायपास के एमआर-10 जंक्शन के अलावा एमआर-11 और एमआर-12 पर भी फ्लाय ओवर बनाया जाए। खुली नालियों को भी बंद करना होगा।

3. जहां-जहां जंक्शन, अंडरपास या फ्लायओवर हैं, उनका विकास करना होगा। मुहाने चौड़े करना होंगे और साइन बोर्ड भी लगाने होंगे। अंदर लाइटिंग करना होगी।

सुधार और उम्मीद : अंडरपास के मुहाने सुधारने होंगे, सर्विस रोड चौड़ी हुई तो भविष्य में चल सकेगा सिटी ट्रांसपोर्ट

रिपोर्ट में यहां प्रस्तावित किए हैं

फ्लायओवर

यहां बन चुके हैं

फ्लायओवर

तेजाजीनगर चौराहा

मांगलिया बायपास

MR-12

MR-11

MR-10

नेमावर रोड

प्रयास, जो नाकाफी रहे :

दो फ्लायओवर, पांच अंडरपास बने फिर भी तकलीफ कम नहीं हुई

2012-13 के पहले चरण में खंडवा रोड पर तेजाजी नगर और नेमावर रोड पर फ्लायओवर का काम शुरू हुआ। इसी तरह निपानिया और अरंडिया में अंडरपास। बाद में कनाड़िया रोड, बिचौली, मुंडला नायता में तीन अंडरपास बनाए गए। अभी एमआर-3 जंक्शन ट्रूबा कॉलेज (सेज यूनिवर्सिटी) और राऊ बायपास पर फ्लायओवर बनना प्रस्तावित हैं। बावजूद 2017 में इस मार्ग पर 30 दुर्घटनाएं हुईं। 5 जनवरी 2018 को बायपास पर डीपीएस बस हादसा हुआ।

बसाहट की ऐसी होड़ :

35 किमी के जंक्शन में दोनों ओर 34 स्कूल-कॉलेज, 60 टाउनशिप बन गईं।

250 से ज्यादा स्कूल बसें चलती हैं।

12 होटल, 10 मैरिज गार्डन भी इसके दोनों ओर बन गए। सर्विस रोड पर जाम लगने का एक कारण यह भी है।

शहर के हजार से ज्यादा चार पहिया वाहन और 2 हजार से ज्यादा दो पहिया वाहन भी प्रतिदिन इसी से गुजरते हैं।

इंदौर के मास्टर प्लान की 36 सड़कें भी इसी बायपास पर मिलती हैं।

36 स्थानों पर 18 मीटर के 14 मार्ग, 25 मीटर चौड़े 2 मार्ग, 30 मीटर चौड़ाई के 14 मार्ग, 45 मीटर चौड़ाई के 5, 60 व 75 मीटर चौड़ाई के 5 मार्ग जुड़ते हैं।

हमने विकल्प भेज दिए हैं

निगमायुक्त मनीष सिंह ने बताया हमसे जो विकल्प मांगे गए थे, वे नगरीय विकास एवं आवास विभाग को भेज दिए हैं। अंतिम निर्णय शासन और एनएचएआई करेंगे।

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