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इन्सॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड बिल से डिफॉल्टर कंपनियों पर लगेगी रोक

बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा है। कई बड़ी कंपनियां अपने क्रेडिटर्स को भुगतान नहीं कर पा रही हैं। बाजार की ऐसी विषम...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:40 AM IST
बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा है। कई बड़ी कंपनियां अपने क्रेडिटर्स को भुगतान नहीं कर पा रही हैं। बाजार की ऐसी विषम परिस्थिति में इन्सॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड बिल क्रेडिटर्स के लिए वरदान साबित हो रहा है। यह कानून व्यापार को और मजबूती प्रदान करेगा और डिफॉल्टर कंपनियों पर मजबूती से रोकथाम लगेगी। इंदौर सीए शाखा द्वारा इन्सॉलवेंसी एंड बैंकरप्सी कोड 2016 और डीफंक्ट कम्पनीज (रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज द्वारा बंद की गई कंपनियां) विषय पर शनिवार को सीए भवन में आयोजित सेमिनार में यह बात इंदौर ब्रांच के चेयरमैन सीए अभय शर्मा ने कही।

30 हजार का चालान भर पा सकते हैं राहत

त्रिपाठी ने कहा पूरे देश के रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज द्वारा ऐसी कंपनी, जिन्होंने तीन वर्षों के रिटर्न रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज के समक्ष दाखिल नहीं किए हैं, उन्हें रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज ने डीफंक्ट कर दिया है। इन कंपनी के डायरेक्टर्स भी डिसक्वालिफाई कर दिए गए हैं। सरकार ने इन कंपनियों के लिए 31 मार्च तक एक स्कीम की घोषणा की है जिसमें 31 मार्च तक सारे पुराने रिटर्न फाइल करके तीस हजार का चालान भरकर राहत पा सकते हैं। एसो. के सचिव सीए हर्ष फिरौदा, कोषाध्यक्ष सीए कीर्ति जोशी, पूर्व चेयरमैन सीए मनोज गुप्ता, सीए मृणालिनी बियानी, सीए सुमित सोडानी उपस्थित थे।

70% एप्लीकेशन ऑपरेशनल क्रेडिटर्स ने किए फाइल

सेशन चेयरमैन सीए महेश सोलंकी ने बताया इस नए कोड के अंतर्गत 70 प्रतिशत से ज्यादा एप्लीकेशन ऑपरेशनल क्रेडिटर्स द्वारा फाइल की गई हैं। इससे बाजार में विश्वास का माहौल बढ़ेगा।

क्रेडिटर कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में पिटीशन कर सकेंगे फाइल

सीए प्रतीक त्रिपाठी ने कहा कंपनी पर यदि क्रेडिटर का एक लाख या ज्यादा का बकाया है और कंपनी बगैर भुगतान नहीं कर पा रही है तो क्रेडिटर्स कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में पिटीशन फाइल कर सकते हैं।