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बिना नौकरी पीईबी ने वसूले Rs. 2.89 करोड़

इंदौर/ ग्वालियर

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 02:45 AM IST
इंदौर/ ग्वालियर
राज्य शिक्षा केंद्र ने वर्ष 2015 में लेखापाल की भर्ती के लिए परीक्षा कराई थी। परीक्षा 2208 पदों के लिए थी, लेकिन मेरिट में आए 2208 सफल आवेदकों को अवसर नहीं दिया गया। परीक्षा के दो साल बाद मेरिट के आधार पर शुरूआती 690 आवेदकों को ज्वॉइनिंग दे दी गई, लेकिन बचे हुए 1518 सफल आवेदक आज भी बेरोजगार हैं।

सर्व शिक्षा अभियान के तहत राज्य शिक्षा केंद्र ने लेखापाल की नियुक्ति शुरू की थी। लेखापाल के पद के लिए केंद्र सरकार से अनुमति लिए बगैर राज्य सरकार ने पीईबी से परीक्षा करा ली। जब केंद्र सरकार से बजट मांगा गया, तो वह नहीं मिला इस कारण यह पद भरे नहीं जा सके। इस पद के लिए अधिकतम आयु सीमा जनरल कैटेगरी के लिए 40 साल व रिजर्व कैटेगरी के लिए 45 साल है। अब सफल कैंडीडेट नियुक्ति के चक्कर में दो साल से परेशान हैं। भोपाल के चक्कर लगाने के बाद भी अफसर उन्हें सही जबाव नहीं दे रहे हैं।

फैक्ट फाइल



निकल गई उम्र

परीक्षा में सेलेक्ट होकर मेरिट में स्थान पाने वाले सैकड़ों आवेदक अब ओवरएज हो गए हैं। इनको अब न तो लेखापाल पद पर नियुक्ति की उम्मीद है और न ही परीक्षा फीस वापसी की।



कैबिनेट को भेजा है प्रस्ताव

 केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद ही राज्य शिक्षा केंद्र ने 2208 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा कराई थी, लेकिन बाद में केंद्र सरकार ने सिर्फ 690 पदों के लिए ही स्वीकृति प्रदान की थी। हमने मेरिट में आए आवेदकों को राहत देने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा है। हम कोशिश कर रहे हैं कि इनकी वेटिंग लिस्ट को आगामी दो साल के लिए बढ़ा दिया जाए। दीपक जोशी, राज्यमंत्री स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश