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दो बहनें हैं विदेश में, मदद करती हैं अपने शहर के लोगों की

अनविता और आशिता जैन इंदौर की कालिंदी कुंज कॉलोनी की हैं। दोनों बहनें कैलिफोर्निया में ईबे कंपनी से जुड़ी हुई हैं।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 02:45 AM IST

दो बहनें हैं विदेश में, मदद करती हैं अपने शहर के लोगों की
अनविता और आशिता जैन इंदौर की कालिंदी कुंज कॉलोनी की हैं। दोनों बहनें कैलिफोर्निया में ईबे कंपनी से जुड़ी हुई हैं। बड़ी डाटा साइंटिस्ट है और छोटी फ्रॉड डिटेक्शन डिवीजन में मैनेजर है। दोनों बहनें अपने शहर इंदौर से जुड़े युवाओं और विद्यार्थियों की हर स्तर पर मदद कर रही हैं।

डीबी स्टार. इंदौर

अनविता ने बताया उन्होंने चमेलीदेवी इंस्टीट्यूट से बीई की डिग्री ली। सपना देखा था कि विदेश में काम करना है। 2011 में कड़ी मेहनत के बाद विश्व की टॉप 10 यूनिवर्सिटी में शुमार नार्थ कैरोलिना यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल गया।

यहां से कम्प्यूटर में मास्टर्स की पढ़ाई कर एप्पल में इंटर्नशिप के लिए चयन हुआ। 2013 में जब बैंक ऑफ अमेरिका के वर्ल्ड हेडक्वार्टर में नौकरी मिली, तब अमेरिका की कई कंपनियों से ऑफर आए। 2015 में विश्व की बड़ी कंपनियों में शुमार गोल्डमैन सॉक्स कंपनी में आ गईं। यह वही कंपनी है, जिसने मंदी के दौर में बैंक ऑफ अमेरिका को फाइनेंस किया था। शुरुआती दौर में बड़ी दिक्कतें थीं। विदेश में कोई मार्गदर्शक नहीं था। सबकुछ अपने ही दम पर करना था। इसी अनुभव ने यह सिखाया कि हमें अपने शहर के लोगों की मदद करना है। कारण यह है कि इंदौर में काउंसलर एक बार की सिटिंग के लिए 15 से 20 हजार रुपए फीस लेते हैं।

हमने अब तक अपने शहर के 80 से ज्यादा युवाओं और युवतियों की काउंसलिंग की है। उन्हें बताया है कि विदेश में अपने आप को कैसे सेट किया जाता है। आशिता ने भी बड़ी बहन की तरह इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वह कहती हैं कि मेरा विदेश जाने का कोई इरादा नहीं था। जब अनविता की सोशल मीडिया पर फोटो देखी और उसकी सफलता को दूसरे लोगों के मुंह से सुना, तो मुझे भी लगा कि विदेश जाना चाहिए। अनविता ने मुझे गाइड किया।

शहर के आठ लोगों को नौकरी दिलाई

अनविता और आशिता के अनुसार अमेरिका में रेफरेंस का बड़ा महत्व है। दोनों बहनों ने न सिर्फ रेफरेंस दिया बल्कि मानसी त्रिपाठी, आयुष जैन, मानस राठौर, सुरभि मित्तल, विकास जैन, सौरभ राजपूत, अनुमित कौर की काउंसलिंग की। उन्हें अमेरिका बुलाया और विभिन्न कंपनियों में नौकरी दिलवाई। भारत में रहने वाले विद्यार्थियों को यह नहीं पता होता है कि आप अमेरिका में पढ़ाई कर रहे हैं तो अपना खर्चा कैसे निकलेगा। इंदौर शहर के 25 से ज्यादा विद्यार्थियों की पढ़ाई में मदद की और पार्ट टाइम जॉब लगाने में भी सहयोग दिया।

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Web Title: दो बहनें हैं विदेश में, मदद करती हैं अपने शहर के लोगों की
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