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नाॅर्थ ईस्ट के 3 राज्यों के चुनाव नतीजे

कहां से: महाराष्ट्र ‘सुप्रभात! आज सुबह मां त्रिपुरा सुंदरी के मंदिर में पूजा की और राज्य के 37 लाख लोगों के लिए...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:45 AM IST

कहां से: महाराष्ट्र

‘सुप्रभात! आज सुबह मां त्रिपुरा सुंदरी के मंदिर में पूजा की और राज्य के 37 लाख लोगों के लिए दुष्ट शक्तियों से मुक्ति मांगी। भरोसा है भाजपा को दो तिहाई बहुमत मिलेगा।’ - सुनील देवधर भाजपा नेता

पूर्वोत्तर चुनाव की कमान सुनील देवधर के पास थी और उन्हीं की रणनीति के दम पर भाजपा ने त्रिपुरा का लाल किला ढहाया। पढ़ाई के बाद वे 1991 में संघ प्रचारक के तौर पर निकले। 8 साल मेघालय में रहे। यहां स्थानीय खासी और अन्य भाषाएं सीखी। 2012 गुजरात चुनाव में दाहोद का प्रभार मिला। कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई। 2014 में मोदी की संसदीय सीट बनारस का जिम्मा मिला। महाराष्ट्र चुनाव के बाद नवंबर 2014 में उन्हें त्रिपुरा का प्रभारी बनाकर कम्युनिस्ट मुक्त भारत की जिम्मेदारी दी गई।

जीत के 4 बड़े किरदार: भाजपा का त्रिपुरा में 35 साल से खाता नहीं खुला था; इन्होंने सिफर से शिखर पर पहुंचाया

बिप्लव देब| बेहतरीन जिम ट्रेनर भी रहे, पीएम मोदी ने दो साल पहले त्रिपुरा भेजा

उम्र: 48

पढ़ाई : एमए

कहां से: त्रिपुरा

त्रिपुरा की एेतिहासिक जीत का श्रेय राज्य में पार्टी के युवा अध्यक्ष बिप्लव देब को दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि बिप्लव ही सीएम बनेंगे। दक्षिण त्रिपुरा के बिप्लव की पढ़ाई दिल्ली में हुई। वे बेहतरीन जिम ट्रेनर भी हैं। बाद वो संघ से जुड़े। भाजपा सांसद गणेश सिंह के पीए भी रहे। 2016 में पार्टी ने उन्हें राज्य का अध्यक्ष बनाकर त्रिपुरा भेज दिया। पूरे राज्य को दौरा कर युवाओं को पार्टी से जोड़ा। माणिक सरकार के खिलाफ कई आंदोलन खड़े किए और अपनी रणनीति के दम पर उन्होंने कमल खिला दिया।

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इंदौर , रविवार, 04 मार्च, 2018

राम माधव| भाजपा ने संघ से बुलाया; जम्मू-कश्मीर, असम के बाद त्रिपुरा जीता

उम्र: 53 साल

पढ़ाई : एमए

कहां: आंध्र से

भाजपा महासचिव राम माधव पार्टी के पूर्वोत्तर प्रभारी हैं। इन्होंने ही जम्मू-कश्मीर में पीडीपी से गठबंधन कराने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा में आने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में थे। पार्टी ने इन्हें असम की जिम्मेदारी दी थी, वहां भी वो कांग्रेस की तरुण गोगोई सरकार को हटाने में कामयाब रहे थे। इन तीन राज्यों में भी उन्होंने बेहतर संगठनात्मक रणनीति का परिचय दिया। वो कहते हैं कि ‘चुनाव लड़ने से पहले उस राज्य को समझना पड़ता है। आज की तारीख़ में चुनाव कोई पारंपरिक प्रक्रिया नहीं रही।’

मोदी को जीत का भरोसा था। उन्होंने बुधवार को भाजपा शासित राज्यों के सीएम से त्रिपुरा की जीत का जश्न यूपी से भी बड़े पैमाने पर मनाने को कहा था। - अखिलेश शर्मा, पत्रकार

हेमंत सरमा: नार्थ ईस्ट के चाणक्य; राहुल के समय न देने पर कांग्रेस से भाजपा में गए

उम्र: 49 साल

पढ़ाई : पीएचडी

कहां से: असम

भाजपा ने चुनाव में पीएम समेत 52 कैबिनेट मंत्री और 200 सांसद उतारे

नार्थ ईस्ट में कमल खिलाने का श्रेय हेमंत विश्वा सरमा को जाता है। उनकी रणनीति के दम पर भाजपा ने पहले असम, मणिपुर और अरुणाचल में सरकार बनाई। 2015 से पहले वे कांग्रेस के कद्दावर नेता थे। असम में नंबर दो की हैसियत थी। सीएम गोगोई से अनबन हो गई और भाजपा में चले गए। नार्थ ईस्ट में पार्टी का प्रमुख चेहरा बन गए। कांग्रेस पार्टी छोड़ने पर उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि 8 से 9 बार राहुल से मिलने का समय मांगा। पर उन्होंने मुझसे मिलने की जगह पालतू से खेलना बेहतर समझा।

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