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अजीब होते हैं ये रिश्ते भी, जहां आदत लग गई वहीं बदल जाते हैं

\"शुक्रिया आप सबका आप यहां आए! कविता आपके सीने भी धड़कती है तो लगता है कि कविता कहीं नहीं जा रही। वो बदलती रहेगी, लेकिन...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 03:15 AM IST
"शुक्रिया आप सबका आप यहां आए! कविता आपके सीने भी धड़कती है तो लगता है कि कविता कहीं नहीं जा रही। वो बदलती रहेगी, लेकिन रहेगी...हमेशा। पिछले साल तक मुंबई के कैफेज़ में 30 लोग जमा होते थे और वो भी सब कवि होते थे। आज एक साल बाद आप सब हमें सुनने आए, हमारी इज्ज़त बढ़ गई।' इस तरह रूबरू हुए याहया बूटवाला सुननेवालों से। याहया लिखते हैं। किस्सागो हैं। सोशल प्लेटफॉर्म्स पर उनकी जबर्दस्त फैन फॉलोइंग है। सुनिए क्या कहते हैं याहया :

"सायकल की कहानी जब मैंने लिखी थी, उनको सुनाने जा रहा था। मैं रिक्शा मे जा रहा था। पूछा कितना टाइम लगेगा । 20-25 मिनट लगेंगे। मैंने बोला चलो तब तक कविता सुनो। मैंने पूरे जज़्बात के साथ सुनाई। पूछा कैसी लगी, तो बोला अच्छा है बेटा। मैंने सोचा कुछ ओर बोल सकता था। रिक्शा का भाड़ा 40 रुपए बना। मैंने उसे 50 दिए, उसने मुझे 20 लौटा दिए। मैंने उससे कहा 10 ज्यादा दे दिए। तो बोला नहीं 10 आपकी कविता के।'

एक सुबह बाबा आए, और मुझे उठाकर बोले चलो यार आज मैं तुम्हे साइकिल चलाना सिखाता हूं। यार अब तक आफताब ने भी आंखें खोली नहीं थी, और मैं खुद रात को देरी से सोया था तो मैंने वही कहा जो हर बच्चा कहता है ठीक है बाबा। बाबा मुझे बाहर ले गए। बाहर एक चमचमाती साइकिल मेरा इंतज़ार कर रही थी।

प्यार मिल गया : मेरी नजरों का तेरी नजरों पर ठहर जाना, ठहरा देता था पूरी दुनिया को मेरे लिए/ ये तेरी उंगलियो का मेरी उंगलियों से उलझना, सुलझा देता था जिंदगी के लिए

अजीब होते हैं ये रिश्ते, जहां आदत लग गई वहीं बदल जाते हैं

ब्रेकअप : जाते-जाते कुछ इस तरह तोड़ जा शीशे की तरह, कि बिखर जाऊं उस रास्ते पर जो चुभता रहे हर उस राही को जो चलता है प्यार की राह पर

बस रिश्ता उतना ही था : हम इस बात पर इतराते रहे कि तू मेरी किताब थी और मैं तेरा पन्ना/

ये तो अरसे बाद समझ आया कि किताबों को रखा जाता है अलमारी में और पन्नों को रखा जाता है जेब में।

इंदौर ने देखे किस्सागो याहया के मिज़ाज