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स्त्री की ख्वाहिशों और दु:खों की दास्तां कहते दो एकल नाट्य

कम से कम मंच सामग्री, सादी वेशभूूषा और संवेदनशील प्रकाश योजना के साथ ही सिर्फ और सिर्फ अभिनय के बूते किसी नाटक को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:15 AM IST

स्त्री की ख्वाहिशों और दु:खों की दास्तां कहते दो एकल नाट्य
कम से कम मंच सामग्री, सादी वेशभूूषा और संवेदनशील प्रकाश योजना के साथ ही सिर्फ और सिर्फ अभिनय के बूते किसी नाटक को कैसे प्रभावी बनाया जा सकता है कि इसका एक विनम्र उदाहरण है वीकेंड और पुकार एकल नाट्य प्रस्तुतियां। ये दोनों एकल नाट्य अनंत थिएटर में रविवार को मंचित किए गए। ये दोनों नाटक स्त्री की ख्वाहिशों और उसके दु:ख-दर्द और संघर्षों की दुनिया को बखूबी अभिव्यक्त कर गए।

कल्पनाशील निर्देशन, संवेदनशील अभिनय

सबरंग और रंगरुपिया थिएटर के इन दोनोंं एकल नाट्यों को युवा रंगकर्मी जय पंजवानी ने कल्पनाशीलता से निर्देशित किया। पहली प्रस्तुति निर्मल वर्मा की कहानी पर आधारित वीकेंड थी। इसमें भारती पेरवानी ने एक ऐसी लड़की की कहानी कही जो शादीशुदा पुरुष से प्रेम करती है और वे हर वीकेंड मिलते हैं। लड़की तमाम सामाजिक दबावों, द्व्ंद्वों के बीच अंतत: यह महसूस करती है कि उसकी ख्वाहिश और प्रेम ही सर्वोपरि है और उसकी ये खुशियां कोई नहीं छीन सकता। इसमें भारती पेरवानी ने सांगोपांग अभिनय से एक से ज्यादा किरदारों को संवेदशीलता से अभिनीत किया। निवेदिता जेना के लिखे नाटक पुकार में सुरभि बोरदिया ने मंच का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अपने भावाभिनय से स्त्री के उस दु:ख को व्यक्त किया कि उसे देवी और भोग्या के बीच कब एक इंसान समझा जाएगा।

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