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मुंगेरीलाल को अफसोस रहा उसके सपने पूरे नहीं हो सके

इ सी बीच हड़बडाकर मुंगेरीलाल की नींद खुल जाती है। वह बिना मुंह धोए शहर में निकलता है तो देखता है कि वाहन गुत्मगुत्था...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:25 AM IST

इ सी बीच हड़बडाकर मुंगेरीलाल की नींद खुल जाती है। वह बिना मुंह धोए शहर में निकलता है तो देखता है कि वाहन गुत्मगुत्था हैं। लाल, हरी बत्ती का कोई असर नहीं है। जिसकी जहां इच्छा है वह वाहन ले जा रहा है। यातायात पुलिस के जवान नदारद हैं।

इंदौर गुंडे भजन गा रहे हैं वे समाजसेवी हो गए हैं

मंुगेरीलाल कहीं भी जाता है तो हफ्ते दस दिन के अखबार जरूर पलटता है। वह अपडेट रहना चाहता है। उसे पता चला है कि इंदौर में गुंडे पकड़ो अभियान चला है। यही समाचार उसके मानस पटल पर अंकित हो जाता है। चिमनबाग चौराहे पर कढ़ी-फाफड़े का आनंद लेने के बाद वह अपनी लॉज में जाकर सो जाता है। खर्राटे भरता है और सपना शुरू हो जाता है। वह देख रहा है कि शहर गुंडों से मुक्त हो गया है। छावनी, सियागंज, खजराना, जवाहर मार्ग सहित की इलाकों में हफ्ता वसूली बंद हो गई है। गुंडे समाजसेवी हो गए हैं। गरीब, अनाथ, विकलांग बच्चों की मदद कर रहे हैं। कोई भंडारे में व्यस्त है तो कोई भजन संध्या में तल्लीन है। शहर के लोग राहत की सांस ले रहे हैं। महिलाओं को अब रात 11 बजे बाद भी शहर में भ्रमण करने से डर नहीं लगता। मंगलसूत्र और चैन खींचने की वारदातें बंद हो गई हैं। रोजनामचे खाली पड़े हैं। आज मुंगेरीलाल कुछ ज्यादा ही सो लिया। सुबह के दस बज रहे हैं। पकड़ो-पकड़ो-पकड़ो की आवाज आती है। मुंगेरीलाल की नींद खुलती है। वह बाहर जाकर देखता है तब पता चलता है कोई बदमाश एक महिला के गले से सोने की चार तौले की चैन खींचकर भाग गया है।

एमवाय में डॉक्टर

समय पर आ रहे हैं

मुंगेरीलाल को यह पता चला कि मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल इंदौर में ही है। उसे जिज्ञासा हुई। एमवाय पहुंचा। वहां की व्यवस्थाओं को देखा। आज मुंगेरीलाल ने ऊसल पोहे का लुत्फ उठाया। पैदल घूमता-घूमता वह अपनी लॉज पहुंचा और सो गया। उसने सपने में देखा। एमवाय को पूरे देश में नंबर वन का दर्जा मिला है। डॉक्टर घड़ी देखकर समय पर आते हैं। ओपीडी में जब तक मरीज रहते हैं तब तक डॉक्टर भी वहां से हिलते तक नहीं। मरीजों को समय पर सही दवाई मिल रही है। नर्सों का स्वभाव बदल गया है। वे बेहद नरमी से पेश आती हैं। भ्रष्टाचार की यहां गुंजाइश नहीं है। दवाइयों की खरीदी में पारदर्शिता आ गई है। सफाई व्यवस्था लाजवाब हो गई है। चादर रोज बदले जा रहे हैं। मरीजों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार आ गया है। सुबह के छह बज रहे हैं। कोई दरवाजा खटखटाता है और मुंगेरीलाल की नींद खुल जाती है। वह सोचता है.. काश ऐसा हो जाए जैसा सपने में देखा था।

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Web Title: मुंगेरीलाल को अफसोस रहा उसके सपने पूरे नहीं हो सके
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