इंदौर

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दो माह से एनजीटी में पक्षकारों को मिल रही हैै तारीख पर तारीख

भास्कर संवाददाता | इंदौर/भोपाल नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में कामकाज बंद हुए दो माह...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 03:25 AM IST
भास्कर संवाददाता | इंदौर/भोपाल

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की भोपाल स्थित सेंट्रल जोन बेंच में कामकाज बंद हुए दो माह बीत चुके हैं। भले ही यहां सुनवाई बंद हो, पर हर दिन केसों की सुनवाई के लिए कॉज लिस्ट जारी होती है। हर शाम अगले दिन के लिए लिस्टेड केसों की सूची तैयार होती है, लेकिन अगले दिन बिना सुनवाई के ही एक माह बाद की कोई भी तारीख तय कर दी जाती है। जूरी के अभाव में 1 फरवरी से एनजीटी में न तो किसी केस की सुनवाई हुई, न ही कोई आदेश जारी हुआ है।

अमूमन रोजाना औसतन 10 से 15 केसों की सुनवाई एनजीटी में होती थी। अब यहां लंबित केसों की संख्या एक हजार के नजदीक पहुंच गई है। इसमें सर्वाधिक 450 केस मध्यप्रदेश के हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ के 550 केस लंबित हैं। भोपाल एनजीटी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन वर्मा का कहना है जब तक स्थाई रूप से जूरी मेंबर की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक अस्थाई तौर पर सर्किट बेंच बुलाकर सुनवाई का कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए।

लंबित केसों की स्थिति

1000 के करीब केस लंबित हो गए हैं

550 केस (लगभग) राजस्थान और छत्तीसगढ़ राज्यों के लंबित हो चुके हैं एनजीटी भोपाल बेंच में अब तक

लिस्टेड केस | भानपुरखंती में आग से फैले प्रदूषण, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में नियमों का उल्लंघन, कलियासोत के ग्रीनबेल्ट का विवाद, बड़ा तालाब के संरक्षण और वेटलैंड का विवाद, मंडीदीप में प्रदूषण संबंधी प्रोक्टर एंड गैंबल का विवाद, रातापानी वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी में अवैध उत्खनन संबंधी विवाद।


नोट लगाया कि सुनवाई नहीं टलेगी

एनजीटी ने गुरुवार को रूटीन कॉज लिस्ट के साथ ही वीकली कॉज लिस्ट जारी की है। इन केसों की सुनवाई के लिए 2 अप्रैल से 6 अप्रैल तक की तारीख तय की गई है। 35 केसों की इस सूची में एक नोट लगाया गया है, जिसमें लिखा है कि ऐसे केस जो वर्ष 2013-2014 में फाइल किए गए थे, उनकी अंतिम सुनवाई की जाएगी। इन केसों की तारीख अब आगे नहीं बढ़ाई जाएगी, लेकिन बिना जज के इन केसों को कौन सुनेगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है। रजिस्ट्रार संजय शुक्ला का कहना है कि एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार तीन साल से अधिक पुराने केसों को एडजोर्न (तारीख आगे बढ़ाना) नहीं किया जाना चाहिए। पक्षकार और वकील अनावश्यक तारीख आगे बढ़ाने की मांग न करें, इसलिए कॉज लिस्ट में यह नोट लिखना जरूरी किया गया है।

450 केस मध्यप्रदेश के लंबित हैं लगभग

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