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मकान तोड़ने में भी निगम ने किया भेदभाव

इंदौर

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:30 AM IST

मकान तोड़ने में भी निगम ने किया भेदभाव
इंदौर डीबी स्टार

रहवासियों का कहना है कि जब 26 फीट चौड़ी ही सड़क बनाना थी तो फिर 50 और 30 फीट तक मार्किंग क्यों की गई? क्यों लोगों पर दबाव बनाकर मकान तुड़वाए गए। उन्होंने डीबी स्टार को बताया कि दो महीने में सिर्फ यहां गिट्टी-चूरी ही बिछाई गई है। सड़क का काम निपटे तो लोग अपने टूटे मकान फिर बनवाएं। 100 साल पुराने कबीर मंदिर की दीवार और ओटला भी नगर निगम की लापरवाही की भेंट चढ़ गया हैै।

कब्जा हटाने में भेदभाव

खारोल मोहल्ला के लक्ष्मीनारायण पटेल ने बताया कि पार्षद समर्थकों के मकानों को बख्शा दिया गया जबकि अन्य लोगों के मकान जेसीबी से तोड़े गए। रसूखदारों के मकान पीले निशान के चार फीट तक बाहर हैं लेकिन मेरे मकान का पिलर 4 इंच बाहर था तो उसे पूरा तोड़ डाला।

नल कनेक्शन तोड़ दिए

पीड़ितों का कहना है कि निगम की जेसीबी ने तीन बार उनके नल कनेक्शन तोड़ दिए। कई लोगों के वॉशरूम टूट गए हैं। उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह सेफ्टी टैंक टूटने और नालियों में मलबा भर जाने से घरों के सामने गंदगी फैल रही है। चढ़ाव टूट जाने से कई लोग ऊपर के कमरों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। रहवासियों ने रिमूवल गैंग और पार्षद की मनमानी के खिलाफ महापौर और निगम आयुक्त को भी शिकायत की, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने ध्यान नहीं दिया।

निगम ने पहले 50 फीट (लाल रंग) फिर 30 फीट (पीला रंग) की मार्किंग की।

हमारे साथ भेदभाव और छल किया गया

 निगम ने गलत मार्किंग कर हमारे मकान तुड़वा दिए, जबकि पार्षद के लोगों के मकानों को छोड़ दिया गया। दिखावे के लिए उनके मकानों पर मार्किंग की लेकिन उन्हें नहीं तोड़ा। हमने शिकायत भी की लेकिन किसी ने हमारी सुध नहीं ली। मुकेश कटारिया, बंसीलाल कसनावल, राजकुमार खंडेलवाल, ओमप्रकाश सोनकर, अशोक सिलावट, रामप्रसाद, सभी पीड़ित रहवासी

क्या कहते हैं जिम्मेदार

बिल्डिंग अधिकारी के कहने पर तोड़े मकान

 रिमूवल टीम अपनी मर्जी से तोड़फोड़ नहीं करती है। खारोल मोहल्ला में हमने तत्कालीन बिल्डिंग अधिकारी देवकीनंदन वर्मा के कहने पर मकानों के हिस्से तोड़े। मार्किंग भी भवन अधिकारी ही बदलते हैं। महेंद्रसिंह चौहान, रिमूवल प्रभारी उपायुक्त, नगर निगम

बिल्डिंग अधिकारी को कुछ पता ही नहीं

 मैं अब छत्रपति शिवाजी जोन में नहीं हूं। उस वक्त मकानों की मार्किंग 50 से 30 फीट क्यों हुई और खारोल में मकानों के कितने हिस्से तोड़े गए, इस बारे में मुझे कुछ नहीं पता। (इतना कहकर फोन काट दिया) देवकीनंदन वर्मा, तत्कालीन भवन अधिकारी, जोन-18

आयुक्त ने करवाई थी 50 फीट तक मार्किंग

 निगम आयुक्त ने 50 फीट की मार्किंग करवाई थी। इतनी चौड़ी सड़क बनाने का बजट नहीं था, इसलिए 30 फीट की नई मार्किंग की गई। गरीबों के मकान ज्यादा नहीं टूटे इसलिए 26 फीट की सड़क बना रहे हैं। इसमें दोनों तरफ 3-3 फीट में पैवर ब्लॉक लगेंगे। जो लोग भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं उनके मकानों के ओटले अब भी नहीं टूटे हैं। हम तीन फीट तक और तोड़ेंगे। (हालांकि येलो मार्किंग के अन्य मकान नहीं तोड़ने पर कुछ नहीं कहा।) सुभाष चौधरी, पार्षद, वार्ड-52

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