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80 जानें गईं, 5 महकमों ने फिर भी नहीं ली सुध तो... हादसे में भाई को खोने वाले डीआईजी के परिवार ने तैनात किए चोरल में गार्ड

News - चोरल नदी पर बने पिकनिक स्पॉट पर हर साल 7-10 लोग जान गंवाते हैं। दस सालों में 80 से ज्यादा जानें गईं हैं। हर बार कारण...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:30 AM IST
80 जानें गईं, 5 महकमों ने फिर भी नहीं ली सुध तो... 
 हादसे में भाई को खोने वाले डीआईजी के परिवार ने तैनात
चोरल नदी पर बने पिकनिक स्पॉट पर हर साल 7-10 लोग जान गंवाते हैं। दस सालों में 80 से ज्यादा जानें गईं हैं। हर बार कारण सिर्फ एक ही रहता है कि चोरल डेम से बिना सूचना के कभी भी पानी छोड़ दिया जाता है। नदी का स्तर अचानक पांच फीट कर बढ़ जाता है और लोग बह जाते हैं। इतने खतरे के बावजूद स्पॉट पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। यहां दो साल पहले डीआईजी के परिवार ने एक मंदिर का बनाया और दो लोगों की तैनाती की ताकि वे लोगों को खतरे से आगाह कर सकें। मंदार एंड नो मोर मिशन की टीम ने पिछले दिनों चोरल पिकनिक स्पॉट पर जाकर ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। टीम के इंदौर संयोजक अमित पांडे ने बताया चोरल नदी पर पर्यटन विभाग ने पिकनिक स्पॉट तो घोषित कर रखा है लेकिन वहां सुरक्षा के इंतजाम कुछ नहीं मिले।

डेम का पानी कभी भी छोड़ देने से जान का खतरा

ग्रामीणों ने बताया बारिश के दिनों में चोरल नदी में अचानक पानी का लेवल बढ़ जाता है, जिससे यह स्पॉट बहुत ही खतरनाक हो जाता है। अन्य दिनों में चोरल डेम से कभी भी पानी छोड़ दिया जाता है, जिससे भी पानी का लेवल तेजी से बढ़ जाता है। बीते माह भी एक युवक की यहीं जान जा चुकी है।



पिकनिक मनाते लोग, पलभर में बनता डेथ स्पॉट

यहीं दोस्त को बचा, अपनी जान गंवा दी थी भाई ने

पुलिस मुख्यालय में पदस्थ डीआईजी महेंद्र सिंह सिकरवार के छोटे भाई योगेंद्र सिंह 1996 में इसी पिकनिक स्पॉट पर हादसे का शिकार हो गए थे। परिवार से भास्कर ने बात की तो पता चला योगेेंद्र आईआईएम में पढ़ रहे थे। दोस्तों के साथ वे चोरल नदी पर गए थे। वहीं अचानक पानी का लेवल बढ़ा और योगेंद्र का एक दोस्त फंस गया। योगेंद्र ने दोस्त को तो बचा लिया लेकिन खुद डूब गए। इस नदी पर आए दिन होते हादसे देख परिवार ने दो साल पहले उसी स्थान पर एक मंदिर का निर्माण करवाया और दो स्थानीय लोगों को तैनात किया। मंदिर के पुजारी के साथ यह लोग यहां आने वाले लोगों को खतरे से आगाह करते रहते हैं। जैसे ही पानी का लेवल बढ़ता है वे सीटी बजाकर लोगों को नदी के रास्ते से अलग करते हैं।

यहां आने वाले ज्यादातर लोग बीच नदी में पत्थरों पर बैठकर सेल्फी लेने लगते हैं। अच्छे से अच्छा फोटो की चाह में वे खतरे मेें चले जाते हैं। चेतावनी बोर्ड की इबारतें भी मिटने लगी है। यहां रैलिंग तो लगी है लेकिन उसे भी पार कर लोग चले जाते हैं।

थाने से सिर्फ एक प्रधान आरक्षक की ड्यूटी | सिमरोल थाने से इस स्पाॅट पर सिर्फ एक प्रधान आरक्षक तेजराम चौहान की ड्यूटी है। वे भी कई बार मौके पर नहीं आ पाते। टीम ने बात की तो उन्होंने बताया यहां शनिवार व रविवार के अलावा पब्लिक हॉलिडे पर सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। कई लोग शराबखोरी करते हैं, रोकने की कोशिश करो तो विवाद करते हैं।

22 साल पहले इसी जगह दोस्त को बचाने के दौरान योगेंद्र की जान चली गई थी।

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