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महात्मा गांधी ने आम आदमी को दी बोलने की ताकत

जो बातें हम बचपन में सीखते हैं, महात्मा गांधी ने जीवनभर उनका पालन कठोरता से किया। सच कहना, समय का पाबंद रहना, अहिंसा...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:35 AM IST
महात्मा गांधी ने आम आदमी को दी बोलने की ताकत
जो बातें हम बचपन में सीखते हैं, महात्मा गांधी ने जीवनभर उनका पालन कठोरता से किया। सच कहना, समय का पाबंद रहना, अहिंसा और किसान-गरीबों काे हमेशा साथ रखना यह उनकी ऐसी खूबियां थीं, जिन्होंने उन्हें करमचंद से राष्ट्रपिता गांधी बनाया। यह बात प्रीतमलाल दुआ सभागृह में रंगकर्मी, समाजसेवी और गांधी विचारधारा वाले अरुण डी.के. ने कही। संस्था सेवा सुरभि के मंच से उन्होंने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उनके सिद्धांतों को स्कूल स्टूडेंट्स से साझा किया और कुछ किस्से भी सुनाए। शहीद दिवस पर हो रहे झंडा ऊंचा रहे हमारा अभियान के तहत यहां राष्ट्रगीत समूहगान प्रतियोगिता भी हुई।

जब तक मातृभाषा नहीं सीखेंगे, तक तक कुछ नहीं सीख पाएंगे

अरुण डीके ने कहा वाराणसी यूनिवर्सिटी के स्थापना समारोह में अंग्रेज वायसराय, एनी बेसेंट, सभी अंग्रेज अधिकारी शामिल हुए। तब मोहनदास करमचंद गांधी भी वहां थे। जब सभी का संबोधन हो गया तब युवा मोहनदास को भी संबोधन के लिए कहा गया। उन्होंने समारोह में कहा कि यह विश्वविद्यालय स्थापित कर कोई बड़ा काम यहां नहीं किया जा रहा, क्योंकि यहां जो शिक्षा दी जाएगी वह अंग्रेजी में होगी, लेकिन जब तक आप अपनी मातृभाषा नहीं सीखेंगे तब तक आप कुछ नहीं सीख पाएंगे। यह उनका साहस था, जो उन्होंने समारोह में सभी के सामने सच कहा। उन्होंने वहां उपस्थित राजा-महाराजाओं से कहा आपके शरीर की शोभा बढ़ा रहे यह आभूषण गरीब जनता के हैं, और यदि यह उन्हें दे दिए जाएं तो देश से गरीबी खत्म हो सकती है। इस दौरान उन्होंने वायसराय पर निशाना साधते हुए कहा कि समारोह में वायसराय सुरक्षा प्रबंधनों की कमी के कारण 20 मिनिट देर से आए, यदि राजा को प्रजा के बीच आने में इतना डर लगता है तो इस डर में जीने से अच्छा तो मरना है। अधिकारियों ने मोहनदास करमचंद को चुप होकर बैठने को कहा, लेकिन जनता ने न सिर्फ उनका समर्थन किया बल्कि उन्हें आगे भी सुना। अरुण डीके ने बताया कि महात्मा गांधी हमेशा अहिंसा और किसानों के साथ रहे। उनकी सबसे बड़ी देन है कि उन्होंने सामान्य आदमी को बोलने की ताकत दी।

15 स्कूलों के बच्चों ने दी राष्ट्रभक्ति गीतों की प्रस्तुति

राष्ट्रभक्ति समूहगान प्रतियोगिता में शहर के 15 स्कूलों के बच्चों ने परफॉर्मेंस दी। इसमें चमेलीदेवी पब्लिक स्कूल, गुरुनानक हरिकिशन पब्लिक स्कूल, क्रिश्चियन एमिनेंट, सिका स्कूल सहित करीब 15 निजी व सरकारी स्कूल के 100 से भी ज्यादा स्टूडेंट शामिल थे।

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