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रोड के लिए जमीन के बदले नकद मुआवजा देने से हाई कोर्ट का इनकार

हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में डिविजन बेंच ने नगर निगम से मुआवजे के रूप में नकद पैसा मांग रहे एक परिवार की याचिका पर...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 04:25 AM IST
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में डिविजन बेंच ने नगर निगम से मुआवजे के रूप में नकद पैसा मांग रहे एक परिवार की याचिका पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। नगर निगम ने रोड चौड़ीकरण में जमीन जाने पर मुआवजे के रूप में डबल एफएआर दिया है। एफएआर (फ्लोर एरिया रेशो) से असंतुष्ट परिवार ने हाई कोर्ट में याचिका लगाकर पैसा देने की मांग की थी। हाई कोर्ट ने नकद मुआवजा देने से इनकार करते हुए आदेश में कहा कि इसके लिए याचिकाकर्ता और नगर निगम मिलकर एक-एक पंच नियुक्त करें। दोनों पंच मिलकर एक तीसरा और तटस्थ पंच नियुक्त करें। वह पंच फिर मुआवजे के मामले में निर्णय लें। ऑर्बिट्रेशन की यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती तो फिर याचिकाकर्ता सिविल सूट लगा सकता है।

जस्टिस पीके जायसवाल और जस्टिस वीरेंदर सिंह की डिविजन बेंच के समक्ष रविकांत मिश्रा ने नकद मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। याचिका में उल्लेख किया था कि एफएआर को मुआवजे के रूप में स्वीकार करना अनिवार्य नहीं है। योजना के लिए जमीन ली जाती है तो उसका नकद मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।

निगम के नियम में मुआवजे का प्रावधान नहीं- इस पर नगर निगम के वकील ऋषि तिवारी ने जवाब पेश किया। इसमें लिखा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में निर्णय पारित कर चुकी है। एबी रोड स्थित रवि रामचंद्र वाघमारे के मामले में इसका उल्लेख है। नकद मुआवजे के लिए अलग से सिविल सूट लगाने का प्रावधान इस जजमेंट में किया गया है। वैसे भी नगर निगम के नियमों में भी नकद मुआवजा देने का प्रावधान ही नहीं है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद नकद भुगतान नहीं देने के आदेश दिए हैं। बताई गई प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करने के लिए कहा है।

निगम ने रोड चौड़ीकरण में जमीन जाने पर मुआवजे के रूप में डबल एफएआर दिया