Hindi News »Madhya Pradesh »Indore »News» गोद में बच्चे को बैठा सिर पर डंडे बजा मांगेंगे लंबी उम्र

गोद में बच्चे को बैठा सिर पर डंडे बजा मांगेंगे लंबी उम्र

घर में जब बच्चे का जन्म होता है, तब मां-पिता और परिवार के अन्य सदस्य तो उसकी सुरक्षा को लेकर कदम उठाते ही हैं, लेकिन...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 04:25 AM IST

घर में जब बच्चे का जन्म होता है, तब मां-पिता और परिवार के अन्य सदस्य तो उसकी सुरक्षा को लेकर कदम उठाते ही हैं, लेकिन एक समाज ऐसा भी है जो अपनी तरफ से बच्चे की सुरक्षा और संस्कारों के लिए पहल करता है। पालीवाल समाज सालों से यह अनूठी परंपरा धुलेंडी पर निभाता आ रहा है। समाज के उद्योगपति, डॉक्टर, वकील से लेकर विभिन्न पदों पर अहम जिम्मेदारी निभा रहे लोग भी इसमें शामिल होते हैं।

समाजजन इस गीत के साथ शुरू करते हैं यह परंपरा

हरिये..हरिये... हरिया देवी, जीमने हाथ फूला री माला, दावो हाथ लडुआ ले... गौर चढ़ियो गोविंदो बलियो, बालकिया की डूंड कराई, बालक बोले अमृत वाणी... बालकिया री डूंड कराई

इस गीत के साथ इस अनूठी परंपरा की शुरुआत होती है। जिस भी घर में बच्चे का जन्म होता है, वहां समाजजन पहुंचते हैं। घर पहुंचने के बाद मुख्य द्वार पर उस परिवार का दूसरा बच्चा (5 से 15 वर्ष तक का) छोटे बच्चे को गोद में बैठाता है। अगर कन्या होती है तो उसे घर की दूसरी बच्ची अपनी गोद में बैठाती है। इसके बाद समाज के पंडित द्वार पर डंडा लहराते हैं और गीत गाते हैं। इसके बाद समाजजन डंडे पर डंडा मारते हैं और गीत को दोहराते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान परिवार के अन्य सदस्य वहीं मौजूद रहते हैं। लगभग पांच से सात मिनट तक गीत पूरा होता है।

बालकिया री डूंड कराई... गीत के साथ आज पालीवाल समाज लेगा जन्म लेने वाले हर बच्चे की सुरक्षा का संकल्प

यह है मान्यता

मान्यता है कि सदियों पहले एक गांव में राक्षस बच्चों को परेशान करता था। उसके डर से वहां बच्चे चैन की नींद नहीं सो पाते थे। जब उसका अंत हुआ तो पालीवाल समाज के लोगों ने बच्चों को उसके खौफ (आज के जमाने में अपराधियों और बुरे लोगों से बचाने के लिए) से बचाने के लिए यह परंपरा शुरू की थी। इसकी शुरुआत राजस्थान के साकरोदा गांव से हुई थी।

जिन घरों पर जाते हैं, उसकी बनाते हैं सूची

धुलेंडी की शाम करीब छह बजे समाज के लोग एक स्थान पर एकत्रित होते हैं। सूची में दिए नाम और पते पर जाने का सिलसिला शुरू होता है। कोई कार से तो कोई दोपहिया वाहन पर सवार होता है और निकल पड़ते हैं बारी-बारी एक घर पर दस्तक देने। हर घर पर 10 मिनट तक परंपरा निभाई जाती है। फिर गुड़ का प्रसाद बंटता है। जब तक सारे घरों में नहीं पहुंचते सिलसिला निरंतर देर रात तक चलता रहता है।

35 साल से बन रहे हिस्सा

परंपरा पूरी करवाने वाले समाज के भानु पंडित और हेमू पुरोहित कहते हैं समाज के कई लोग सालों से इसका हिस्सा बन रहे हैं। समाज के 24 श्रेणी के अध्यक्ष मुकेश जोशी कहते हैं राजबाड़ा पर सामूहिक आयोजन होता है। साकरोदा के मांगीलाल जोशी, लक्ष्मण जोशी, मनोज जोशी, श्रवण डी जोशी कहते हैं इससे समाज में एकता बढ़ती है और बच्चों को आशीर्वाद भी मिल जाता है। समाज के आसाराम जोशी, ललित पुरोहित और टीकम जोशी कहते हैं चाहे जितनी व्यस्तता हो इस आयोजन में जरूर जाते हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Indore News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: गोद में बच्चे को बैठा सिर पर डंडे बजा मांगेंगे लंबी उम्र
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×