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यशवंत क्लब में केवल एक सदस्य की सदस्यता दस साल से लगातार बन रही है विवाद की वजह

यशवंत क्लब के सदस्य की संतान के 45 साल उम्र पूरी करने के बाद भी सदस्य बनाने के लिए ईओजीएम (असाधारण सभा) में हुआ फैसला...

Dainik Bhaskar

Mar 02, 2018, 04:25 AM IST
यशवंत क्लब के सदस्य की संतान के 45 साल उम्र पूरी करने के बाद भी सदस्य बनाने के लिए ईओजीएम (असाधारण सभा) में हुआ फैसला विवादित हो गया है और कोर्ट ने इस पर स्टे दे दिया है। इस मुद्दे को लेकर क्लब में विवाद आज की बात नहीं है। बीते दस सालों से क्लब के गोरानी-संघवी और छाबड़ा गुट के बीच यह मुद्दा विवाद की वजह बना हुआ है और जून में होने वाले मैनेजिंग कमेटी चुनाव के पहले यह मुद्दा फिर तूल पकड़ गया है। इसी मुद्दे ने क्लब में कई बार राजनीतिक समीकरण और रिश्ते बदल दिए।

दरअसल, यशवंत क्लब के संविधान में क्लब सदस्य की संतान को 18 से 25 साल की उम्र होने पर अलग से सदस्यता लिए जाने का प्रावधान है। इससे अधिक उम्र होने पर सदस्यता नहीं मिलती है। अधिक उम्र वालों को सदस्यता देने के लिए करीब दस साल पहले तत्कालीन चेयरमैन पम्मी छाबड़ा के समय मिस द बस योजना आई और 25 साल से अधिक वाली संतान को भी सदस्यता लेने का अवसर दिया गया। गोरानी गुट के संजय गोरानी के रिश्तेदार नरेंद्र गोरानी ने भी इसके तहत आवेदन किया। लेकिन तकनीकी वजह और तत्कालीन क्लब की विधि समिति के सुझाव को आधार बताते हुए मैनेजिंग कमेटी ने आवेदन खारिज कर दिया। तभी से गोरानी गुट इस बात को लेकर लड़ाई लड़ रहा है।



इस मुद्दे के कारण ही ईओजीएम का मामला कोर्ट में, गोरानी-संघवी और छाबड़ा गुट के बीच फिर तनातनी

इसी विवाद में अलग हुए 35 साल से जुड़े टोनी-पम्मी

इसी विरोध के चलते साल 2016 के मैनेजिंग कमेटी चुनाव में गोरानी-संघवी गुट ने टोनी सचदेवा का सपोर्ट किया, जिससे 35 साल से जुड़े टोनी और पम्मी अलग हो गए और दोनों ने एक-दूसरे के विरोध में चुनाव लड़ा, जिसमें गोरानी-संघवी गुट के सहयोग से सचदेवा जीत गए। दोनों की सुलह के मुताबिक मैनेजिंग कमेटी एक साल पहले भी अधिक उम्र वालों को सदस्यता देने के लिए ईओजीएम में प्रस्ताव लाई, लेकिन तब छाबड़ा गुट की भारी संख्या बल से विरोध हो गया और प्रस्ताव खारिज हो गया।

इस बार 60 सदस्यों के बीच पास हुआ नो एज लिमिट

जब सोमवार को इस बार ईओजीएम हुई तो मैनेजिंग कमेटी केवल 45 साल तक की उम्र के लिए प्रस्ताव लेकर आई, जिस पर किसी को विरोध नहीं था, लेकिन जब चुनाव मुद्दे पर छाबड़ा और उनके साथियों ने ईओजीएम का बहिष्कार कर दिया तो इस बार गोरानी-संघवी गुट ने पम्मी के करीबी अजय बागड़िया को अपने पाले में लेकर ईओजीएम में प्रस्ताव में संशोधन कर इसे नो एज लिमिट में बदलकर मौजूद 60 सदस्यों के बीच पास करा लिया।

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