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ह्यूमन मिल्क बैंक के लिए स्वास्थ्य विभाग तलाश रहा 17 सौ वर्गफीट जगह

इंदौर और भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक बनाने को लेकर प्रदेश सरकार तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग इस बार फिर...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:40 AM IST
इंदौर और भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक बनाने को लेकर प्रदेश सरकार तैयारी कर रही है। स्वास्थ्य विभाग इस बार फिर मेडिकल कॉलेज के ही भरोसे है। विभाग केे पास खुद का अस्पताल नहीं है जहां इसे शुरू किया जा सके, इसलिए एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधीन एमटीएच महिला अस्पताल पर नजर है, जबकि यहां के अधिकारी चाहते हैं कि यह नई सुविधा स्वास्थ्य विभाग के नवनिर्मित पीसी सेठी अस्पताल में भी शुरू की जाए।

हैदराबाद की कार्यशाला से लौटने के बाद डॉ. नायक 17 सौ वर्गफीट जगह तलाश रहे हैं। भोपाल से डिप्टी डायरेक्टर ने इसके लिए एमटीएच को उपयुक्त माना था। अभी यह अस्पताल निर्माणाधीन है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग यहीं ह्यूमन मिल्क बैंक बनाना चाहता है। गौरतलब है कि एनआरएचएम की मदद से ही एमवाय अस्पताल में एसएनसीयू स्थापित किया गया है। दरअसल हर जिले में जिला अस्पतालों में इसे स्थापित किया गया है लेकिन इंदौर में खुद स्वास्थ्य विभाग चाहता था कि मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा शुरू हो। इसलिए एसएनसीयू उनके हिस्से चला गया।

दूध स्टोर करने के लिए जुटाएंगे सुविधाएं

दूध इकट्‌ठा करने के लिए कोल्ड स्टोरेज, विशेष कुर्सियां, ब्रेस्ट मिल्क पंप, इन्वर्टर, एसी जैसी सुविधा जुटाई जाती हैं। इसमें तापमान मेंटेनेंस करने से लेकर संक्रमण का ध्यान रखना पड़ता है। कई प्रकार की महंगी मशीनें खरीदी जाना हैं। शुरू में खुद के बच्चे के लिए ही मां का दूध सुरक्षित रखा जाएगा। इसके लिए सभी के लिए यह मिल्क बैंक काम करेगा।

परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा दूध

दूध लेने के पूर्व महिलाओं में एचआईवी, हेपेटाइटिस बी या सी, टीबी या सिफलिस जैसे संक्रमण की भी जांच की जाएगी। प्री-मैच्योर बच्चे, कम वजनी, चार सप्ताह से कम उम्र के नवजात, मां को कोई बीमारी होने पर, गोद लिए बच्चे या फिर छोड़े हुए बच्चों के लिए यह उपयोगी है। रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, पौष्टिक तत्वों की मौजूदगी होने से बच्चे के विकास में मां का दूध कारगर माना जाता है।