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बजट में स्मार्ट सिटी, मेट्रो, एक्सप्रेस वे को औपचारिक मंजूरी

News - शिवराजसिंह चौहान सरकार ने अपने आखिरी बजट में इंदौर के विकास से जुड़े तीन अहम प्रोजेक्ट को औपचारिक मंजूरी दे दी।...

Dainik Bhaskar

Mar 01, 2018, 04:45 AM IST
बजट में स्मार्ट सिटी, मेट्रो, एक्सप्रेस वे को औपचारिक मंजूरी
शिवराजसिंह चौहान सरकार ने अपने आखिरी बजट में इंदौर के विकास से जुड़े तीन अहम प्रोजेक्ट को औपचारिक मंजूरी दे दी। स्मार्ट सिटी के लिए सौ करोड़ मिलेंगे तो मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट लाइन के लिए भी शुरुआत की घोषणा हुई है।

इंदौर एयरपोर्ट को भोपाल बायपास तक सीधे जोड़ने के लिए छह लेन एक्सप्रेस वे के लिए भी पांच हजार करोड़ का प्रावधान किया है। यह तीनों प्रोजेक्ट इंदौर के मेट्रो सिटी में तब्दील होने से जुड़े हुए हैं और इनसे भविष्य में प्रदेश की बिजनेस सिटी को लाभ होगा। हालांकि इस बजट से उद्योग जगत को निराशा मिली है।

इन तीनों प्रोजेक्ट से यह होगा लाभ

स्मार्ट सिटी : केंद्र की योजना में शामिल इंदौर में चौड़ी सड़कों का जाल बिछ रहा है। पश्चिमी शहर में पहले से ही सड़कें चौड़ी करने का काम शुरू हो चुका है। सारी केबल अंडरग्राउंड डल रही हैं।

मेट्रो प्रोजेक्ट : यह 10-15 साल बाद का प्रोजेक्ट है। इसके लिए अभी जमीन चिह्नित होने का काम हो रहा है, लेकिन इसकी घोषणा बजट में होने से प्रोजेक्ट पर संशय खत्म हो गया। इससे भविष्य में लोक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और शहर का विस्तार होगा।

इंदौर-भोपाल एक्सप्रेस वे : इससे इंदौर और भोपाल के बीच की दूरी केवल दो घंटे रह जाएगी। 50 किमी दूरी कम होने के साथ ही बायपास के दोनों तरफ उद्योग और लॉजिस्टिक हब विकसित हो सकेगा, जिससे व्यापार, उद्योग और रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।

एमवायएच में हार्ट ट्रांसप्लांट व कई तरह की सुविधाएं मिल सकेंगी

एमवाय अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी में तब्दील करने के लिए 60 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे भविष्य में अस्पताल में हार्ट ट्रांसप्लांट व कई तरह की सुविधाएं मिल सकेंगी। यहां हर दिन डेढ़ हजार से ज्यादा मरीज आते हैं और सर्जरी के लिए लंबी वेटिंग लगती है।

मर्जर होने वाली कंपनियों को मिली राहत

बजट में मर्जर होने वाली कंपनियों को यह राहत दी गई है कि अब उनकी संपत्ति के मूल्य पर पंजीयन शुल्क 0.8 फीसदी नहीं लगकर, स्टैम्प ड्यूटी पर 0.8 फीसदी लगेगा। कोई कंपनी मर्जर करती और उसकी अचल संपत्ति सौ करोड़ रहती है तो उस पर अभी के प्रावधान से 80 लाख रुपए पंजीयन शुल्क लगता, लेकिन अब स्टैम्प ड्यूटी (पांच फीसदी) यानी पांच करोड़ पर 0.8 फीसदी यानी चार लाख रुपए ही लगेंगे। पंजीयक वकील पंडित देवीप्रसाद शर्मा का कहना है कि अभी अन्य राज्यों में मर्जर पर काफी कम ड्यूटी है। इसलिए इंदौर की जगह कंपनी मुंबई से मर्जर करती है। अब ड्यूटी कम होने से यहां से भी मर्जर हो सकेंगे।

रियल सेक्टर िनराश

एक-दो साल से जिस तरह रियल सेक्टर में कम विकास हो रहा है, उसे देखते हुए लोगों को उम्मीद थी कि इस सेक्टर के लिए सरकार स्टैम्प ड्यूटी कम करने और इसे बढ़ावा देने के लिए कोई छूट ला सकती है, लेकिन नगरीय सीमा में स्टैम्प ड्यूटी 10.30 को बनाए रखा गया है। ‌इससे इस सेक्टर में निराशा है।

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बजट में स्मार्ट सिटी, मेट्रो, एक्सप्रेस वे को औपचारिक मंजूरी
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