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नामों को लेकर विवाद से बचने के लिए किसी भी हस्ती को मानद उपाधि नहीं देगी यूनिवर्सिटी

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इस साल भी किसी हस्ती को मानद उपाधि नहीं दे पाएगी। 30 मार्च को होने वाले दीक्षांत समारोह की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:45 AM IST

नामों को लेकर विवाद से बचने के लिए किसी 
भी हस्ती को मानद उपाधि नहीं देगी यूनिवर्सिटी
देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी इस साल भी किसी हस्ती को मानद उपाधि नहीं दे पाएगी। 30 मार्च को होने वाले दीक्षांत समारोह की तैयारी में जुटे यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने साफ कर दिया कि सिर्फ पासआउट छात्रों को ही गोल्ड और सिल्वर मेडल दिए जाएंगे। पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को डिग्री दी जाएगी। पहले तीन-चार हस्तियों को मानद उपाधि देने का कहा था। कई नामों पर विचार भी किया था, लेकिन बताते हैं नामों को लेकर विवाद की स्थिति बनने और समय कम होने की वजह से प्रबंधन ने निर्णय बदल दिया।

चार माह पहले कार्यपरिषद की बैठक में यूनिवर्सिटी ने मानद उपाधि को लेकर जिन चार-पांच नामों पर विचार किया था, उसमें एक नाम कार्यपरिषद के ही सदस्य रहे पद्मश्री डॉ. कुट्टी मेनन का था, जबकि अभिनेता धर्मेंद्र सहित कुछ अन्य नाम भी थे। लेकिन धर्मेंद्र के नाम पर सहमति नहीं बनने और विवाद होने पर यूनिवर्सिटी ने चर्चा अगली बैठक तक के लिए टाल दी थी।

कम से कम 4 माह का वक्त चाहिए

दरअसल मानद उपाधि की प्रक्रिया में कम से कम चार माह लगते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी के पास एक माह का ही वक्त है क्योंकि 30 मार्च को दीक्षांत समारोह होना है। इधर, नाम पहले एकेडमिक काउंसिल में तय होते हैं, फिर कार्यपरिषद में मुहर लगती है। इसके बाद नाम सहमति के लिए राज भवन भेजे जाते हैं। फिर अधिसूचना जारी होती है।

विवादों में भी रही, 2007 में आखिरी बार दी, वह भी वापस लेना पड़ी थी

मानद उपाधि विवादों में भी रही। 2007 में यूनिवर्सिटी ने आईटी कंपनी सत्यम के प्रमुख रामालिंगा राजू को उपाधि प्रदान की थी, लेकिन घोटाले में जेल जाने के बाद उक्त उपाधि वापस ले ली गई। तब से किसी को भी मानद उपाधि नहीं दी। कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार धाकड़ का कहना है मानद उपाधि इस बार नहीं दी जा सकेगी। कोई नाम तय नहीं हो पाया और इतना समय भी नहीं बचा कि इस पर विचार किया जा सके।

थाईलैंड की यूनिवर्सिटी के साथ डीएवीवी का समझौता, पांच साल तक साथ करेंगे रिसर्च

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी और थाईलैंड की फयाओ यूनिवर्सिटी पांच साल तक कई रिसर्च पर साथ-साथ काम करेंगे। यहां के छात्र थाईलैंड जाकर वहां की रिसर्च लैब उपयोग करेंगे और रिसर्च प्रोजेक्ट में साथ देंगे। वहीं थाईलैंड के छात्र यहां आएंगे और डीएवीवी की रिसर्च लैब उपयोग करेंगे। वे यहां के छात्रों और प्रोफेसर के साथ काम करेंगे। देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी के दो विभाग स्कूल ऑफ कम्प्यूटर साइंस और स्कूल ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इसका हिस्सा होंगे, जबकि थाईलैंड की यूनिवर्सिटी का इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेेक्नोलॉजी विभाग इसका हिस्सा बनेगा। इन टीचिंग विभागों के रिसर्च स्कॉलर एक-दूसरे के देश में आकर आधुनिक रिसर्च फैसिलिटी का फायदा लेंगे। डीएवीवी की तरफ से इस प्रोजेक्ट की डॉ. संजय तनवानी और डॉ. माया इंगले को जिम्मेदारी दी गई है।

थाईलैंड से यहां आने वाले छात्र शैक्षणिक कार्यों में भी होंगे शामिल

थाईलैंड से यहां आने वाले छात्र संबंधित विभाग की शैक्षणिक गतिविधियों में भी शामिल होंगे। दोनों देश की यूनिवर्सिटी ने इसके लिए एमओयू साइन किया है। यह पांच साल तक के लिए मान्य रहेगा। कुलपति प्रो. नरेंद्रकुमार धाकड़ ने बताया आधुनिक रिसर्च में एक-दूसरे की मदद से बेहतर रिजल्ट दे सकेंगे। साथ ही दोनों देशों की विशेषताओं का फायदा एक-दूसरे को मिल सकेगा।

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