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सिलेंडर का रेग्युलेटर चालू करते ही धमाका, दंपती और मैकेनिक झुलसे

गौरी नगर के पास की एक सोसायटी के एक घर में गैस चालू नहीं होने पर महिला ने टंकी बदली। इसके बावजूद गैस चूल्हा नहीं जला...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:50 AM IST

गौरी नगर के पास की एक सोसायटी के एक घर में गैस चालू नहीं होने पर महिला ने टंकी बदली। इसके बावजूद गैस चूल्हा नहीं जला तो उन्होंने मैकेनिक को बुलवाया। मैकेनिक ने गैस सुधारकर जैसे ही उसे ऑन किया तो धमाके के साथ सिलेंडर फट गया। गैस लीक होने से हुए धमाके में दंपती सहित मैकेनिक झुलस गए। उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। धमाका इतना जोरदार था कि हादसे वाले घर के अलावा आस-पड़ोस के मकानों के भी खिड़की-दरवाजे उखड़ गए। तभी धमका हुआ और हादसे में तीनों लोग जल गए।

हीरा नगर थाना क्षेत्र स्थित गौरी नगर के पास की राधिका सोसायटी की है। निजी कंपनी में काम करने वाले विजय (45) पिता गोविंददास जैन प|ी करुणा (40) व बेटे अमन (19) के साथ रहते हैं। शनिवार सुबह करीब 9 बजे करुणा चाय बनाने के लिए गैस चालू करने का प्रयास कर रही थीं, लेकिन गैस चूल्हा नहीं जल रहा था। उन्हें लगा कि गैस टंकी खत्म हो गई है, इसलिए उन्होंने घर में रखी दूसरी टंकी बदलकर लगा ली, लेकिन चूल्हा फिर भी नहीं जला। आखिरकार परेशान होकर उन्होंने पति को फोन किया और इस बारे में बताया। इस पर पति विजय ने भारत गैस एजेंसी पर करीब पौने 10 बजे कॉल किया और शिकायत की। शिकायत के बाद वहां से मैकेनिक अशोक (40) पिता रामचरण विश्वकर्मा निवासी लवकुश आवास विहार उनके घर पहुंचा और गैस सुधारने लगा। मैकेनिक ने जैसे ही टंकी का रेग्युलेटर चालू किया, वैसे ही धमाका हो गया। धमाका इतना जोरदार था कि घर में लगे खिड़की-दरवाजे टूट गए। इसके अलावा किराएदार और पड़ोसी के यहां का दरवाजा भी टूट गया। परिवार कुछ समझ पाता उसके पहले ही तीनों गैस से लगी आग में जल चुके थे। धमाके की आवाज सुन लोग आ गए। घटना के बाद तीनों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

एफएसएल एक्सपर्ट बोले- बम से भी ज्यादा खतरनाक है गैस लीकेज का धमाका

हादसे के बाद जांच के लिए एफएसएल एक्सपर्ट बीएल मंडलोई की टीम मौके पर पहुंची तो पता चला गैस पूरे किचन में फैल गई थी। जैसे ही इलेक्ट्रिक स्विच आॅन हुआ या फिर फ्रीज की स्पार्किंग से गैस को चिंगारी मिली तो वह विस्फोट में बदल गई। एफएसएल अधिकारी मंडलोई ने बताया कि लापरवाही के कारण लोग इस तरह के हादसों में शिकार हो जाते हैं। उनके मुताबिक एलपीजी गैस हवा से हलकी होती है, जब भी रिसाव होता है तो गैस कमरे की जमीनी सतह पर फैलती है। इस दौरान इलेक्ट्रिक बोर्ड के स्विच को आॅन करने या फ्रीज के कंप्रेसर से निकलने वाली चिंगारी से धमाके ज्यादा होते हैं। ये हीट का धमाका होता है जो बम से भी दोगुनी ताकत का रहता है और लोहे के दरवाजे को भी तोड़ सकता है।

बाल-बाल बच गया दूसरे हाल में बैठा बेटा

हादसे में विजय सबसे ज्यादा 55, करुणा 20 और अशोक 40 प्रतिशत झुलस गए। घटना के कुछ देर पहले ही उनका बेटा अमन मंदिर से दर्शन कर घर लौटा था। वह घर में ही दूसरे हाल में बैठा था। हालांकि आग की चपेट में आने से उसके बाल जल गए, लेकिन हादसे में बच गया। घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस घटना स्थल पर पहुंची और जांच-पड़ताल शुरू की।

ऐसे बचें गैस हादसों से

मंडलोई ने बताया कि अधिकांश घरों में किचन में ही फ्रीज होता है। फ्रीज में हमेशा कम्प्रेशर बंद चालू होता रहता है, जिससे हल्की स्पार्किंग होती रहती है जो नजर नहीं आती, यही धमाके को जन्म देती है। जरूरी है कि रोजाना रात में गैस बंद करने के साथ रेग्युलेटर भी बंद करें। किचन में घुसने से पहले कभी भी एकदम लाइट न जलाएं, पहले दरवाजे-खिड़की या वेंटिलेशन खोलें। यदि गैस लीकेज भी है तो उसे निकलने का स्थान मिल जाएगा। सीधे न तो स्विच ऑन करें और ना ही माचिस जलाएं।

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