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जब 60-70 रन पर नॉटआउट लौटता था तो रातभर मुझे नींद नहीं आती थी : बुंदेला

22 साल के रणजी क्रिकेट सफर को पूरा करने के बाद क्रिकेट को अलविदा कहने वाले मध्यप्रदेश के रणजी कप्तान देवेंद्र...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 05:15 AM IST

जब 60-70 रन पर नॉटआउट लौटता था तो रातभर मुझे नींद नहीं आती थी : बुंदेला
22 साल के रणजी क्रिकेट सफर को पूरा करने के बाद क्रिकेट को अलविदा कहने वाले मध्यप्रदेश के रणजी कप्तान देवेंद्र बुंदेला अपने रिटायरमेंट जलसे में अत्यंत भावुक हो गए। होलकर स्टेडियम में आयोजित एक सादे समारोह में बुंदेला ने मीडिया से बातचीत की और कहा कि यही सबसे सही समय है मेरे क्रिकेट से रिटायर होने का। इन 22 सालों में मुझे सभी का सहयोग मिला। मैंने अपने क्रिकेट जीवन को बड़े मजे के साथ जिया और खूब लुत्फ उठाया।

अपने खेल जीवन के दौरान हुए रोचक क्षणों पर बुंदेला ने बड़े बेबाक अंदाज में बातें की। उन्होंने कहा कि मैच के दौरान जब में शाम को स्टंप्स पर 60-70 रन बनाकर नॉटआउट लौटता था तो मुझे रातभर नींद नहीं आती थी। पूरी रात मैं करवटे बदलता रहता और यही सोचता रहता कि कल मुझे 100 रन पूरे करना है। करियर के यादगार पलों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा जब हम रणजी ट्रॉफी के फाइनल में पहुंचे थे तो यह मेरे क्रिकेट जीवन का सबसे रोमांचक क्षण था, पर जैसे ही हम फाइनल में हार गए तो मुझे बहुत बुरा लगा था।

13-14 की उम्र में क्रिकेट शुरू किया था जगदाले सर की देखरेख में : मैं उज्जैन में रहता था। मेरे पिताजी बैंक में थे। बचपन से ही मुझ में क्रिकेट का जुनून सवार हो गया था। फिर में इंदौर खेलने आ गया। जगदाले सर से मिला। वे मेरे खेल से प्रभावित हुए। उस समय वे सीसीआई को देखते थे लेकिन सीसीआई में मेरी जगह बन नहीं रही थी और मुझे सर ने स्टार क्रिकेट क्लब भेज दिया। वहां पर मैने सुशील भाई और मनोज माहेश्वरी के साथ क्रिकेट में अपने पैर जमाए।

22 साल का रणजी करियर कैसे शुरू हुआ और कैसे खत्म हुआ इसका पता ही नहीं चला। सीढ़ी-दर-सीढ़ी खेल आगे बढ़ता गया। मुझे चंद्रकांत पंडित की कप्तानी में भी रणजी मैच खेलने का मौका मिला। वे बड़े ही अनुशासनबद्ध व्यक्ति थे। मुझे उनसे डर भी लगता था। लेकिन उनके साथ खेलकर मुझे आगे बढ़ने का मौका मिला। मुझे हीरू भाई, अमय भाई, हरविंदर सोढी, ईश्वर पांडे, नमन, टीम के साथियों और सिंधियाजी, भार्गव सा. मुकेश, नितिन, समंदर भाई, नाईकजी, होलकर स्टेडियम ग्राउंड्समैन और कैंटीन के गुड्‌डू भैया का भी भरपूर सहयोग मिला। मैं अपने परिवार को ज्यादा समय नहीं दे पाता था। इसके बावजूद मेरे परिवार के लोग मुझे हमेशा सपोर्ट करते रहे। इस दौरान बुंदेला भावुक भी हो बैठे, उनकी अांखे डबडबा गई लेकिन आंसुओं को उन्होंने रोक लिया। एमपीसीए की ओर से सचिव मिलिंद कनमड़ीकर ने बुंदेला की क्रिकेट में की गई सेवाओं की तारीफ की। स्वागत कनमड़ीकर, संदीप मुंगरे, राजू सिंह चौहान ने किया।

होलकर को नमन करते देवेंद्र बुंदेला।

22 साल ऐसा लगा जैसे में मध्यप्रदेश के लिए नहीं, देश के लिए खेला हूं

यही सबसे सही समय था मेरे लिए क्रिकेट से अलविदा होने का

मप्र को रणजी चैंपियन नहीं बनाने का मलाल रहेगा

बुंदेला का फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर

164 मैच, 10004 रन, 26 शतक, 54 अर्धशतक, 104 कैच ।

पहला रणजी मैच तमिलनाडु (1995-96), आखिरी रणजी मैच दिल्ली (2017-18)

9201 सर्वाधिक रन रणजी बनाने वाले देश के तीसरे क्रिकेटर, पहले वसीम जाफर (10738), दूसरे अमोल मजुमदार (9202)।

145 रणजी मैच खेलने वाले देश के पहले क्रिकेटर, दूसरे वसीम जाफर (138), तीसरे अमोल मजुमदार (136)।

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Web Title: जब 60-70 रन पर नॉटआउट लौटता था तो रातभर मुझे नींद नहीं आती थी : बुंदेला
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